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विधानसभा चुनाव: त्रिपुरा में बीजेपी को मिला बहुमत

विधानसभा चुनाव: त्रिपुरा में बीजेपी को मिला बहुमत

पूर्वोत्तर के तीन महत्वपूर्ण राज्यों- त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में विधानसभा चुनावों के रुझान/नतीजे के ताज़ा अपडेट जानिए। 

भारतीय जनता पार्टी त्रिपुरा में एक बढ़त लेती दिख रही है। चुनावों में तिप्रा मोथा के 'किंगमेकर' के रूप में उभरने की संभावना कम है। रुझानों में बीजेपी ने अपने दम पर 31 के बहुमत के निशान को पार कर लिया है।

बीजेपी का नगालैंड और मेघालय में भी बढ़िया प्रदर्शन रहा। नगालैंड में वह एनडीपीपी के साथ मिलकर सरकार बनाती दिख रही है। मेघालय में पांच सीटों पर बीजेपी की बढ़त ने पार्टी को खुश होने की एक और वजह दे दी है। ये जीत ईसाई बहुल राज्य में पिछले पांच वर्षों में पार्टी के लिए बढ़ती स्वीकार्यता की ओर इशारा कर सकती है। राज्य में बीजेपी पर मुख्य रूप से यह आरोप लगाकर दबाया जाता है कि यह अल्पसंख्यक विरोधी है। इस बीच, पार्टी तीनों राज्यों में सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रही है। 

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के सुबह आठ बजे जब से रुझान आने शुरू हुए तब से ही बीजेपी आगे रही। चुनाव नतीजों के लिहाज से मतगणना स्थलों पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई। त्रिपुरा में 81.11 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने मतदान किया था।

तीनों राज्यों में चुनाव संपन्न होते ही सोमवार को जो एग्जिट पोल के सर्वे आए थे उसमें त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार बनने के आसार बताए गए थे। सर्वे में कहा गया था कि उसकी गठबंधन सरकार नागालैंड को बरकरार रख सकती है। एग्जिट पोल के मुताबिक, मेघालय में कोनराड संगमा की एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। 

त्रिपुरा के लिए जो एग्ज़िट पोल सामने आए थे उन सभी सर्वे में बीजेपी बहुमत से सरकार बनाती हुई दिख रही थी। चाहे वह इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया का सर्वे हो या फिर टाइम्स नाउ ईटीजी, ज़ी न्यूज़ या फिर जन की बात का।

 - Satya Hindi

जिन तीन राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं उनमें त्रिपुरा सबसे अहम है। इसका कारण यह है कि वर्तमान में वहां बीजेपी की सरकार है। यह उत्तर पूर्व के किसी राज्य में उसकी पहली सरकार है। पिछले चुनाव में बीजेपी, सीपीएम और उसके करिश्माई नेता माणिक सरकार को हराकर सत्ता मे आई थी। माणिक सरकार वहां पिछले 20 साल से सत्ता में बने हुए थे। बीजेपी की जीत और माणिक सरकार की हार को सीपीएम के खत्म होते जनाधार में आखिरी कील के तौर पर समझा गया। 

इस बार के चुनाव में जहां कांग्रेस औऱ सीपीएम मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं वहीं बीजेपी अकेले चुनाव के मैदान में उतरी है। गठबंधन के सहारे जहां कांग्रेस और सीपीएम अपना खोया जनाधार पाने की कोशिश कर रही है वहीं बीजेपी की कोशिश है कि पूर्वोत्तर की इकलौती सरकार को वापस सत्ता में ला सके। चुनाव से पहले भाजपा ने तिप्रा मथा और इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के साथ गठबंधन की कोशिशें की लेकिन वह किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। 

2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जिसने 43.5 प्रतिशत वोट और 36 सीटें पाकर बहुमत प्राप्त किया था। पिछले 27 साल से सत्ता पर काबिज माणिक सरकार की पार्टी सीपीएम 42.22 प्रतिशत वोट और 16 सीटें पाकर दूसरे नंबर पर रही थी। तीसरे नंबर पर इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा रही थी जिसे 7.38 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 8 सीटों पर जीत मिली थी। 

सबसे ज्यादा नुक़सान कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ा था जो 2013 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नम्बर पर थी। पिछले चुनाव में चौथे नम्बर पर खिसक गई थी, जिसे केवल 1.79 प्रतिशत वोट मिले थे। 

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