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मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ आज भारत बंद, आ सकती हैं ये दिक्कतें

मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ आज भारत बंद, आ सकती हैं ये दिक्कतें

मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ व्यापार संघों ने आज भारत बंद बुलाया है। कई संगठनों ने हड़ताल की घोषणा की है। बैंक से जुड़े काम, एटीएम से रुपये निकासी सहित व्यापार से जुड़े कई काम प्रभावित होने की संभावना है।

मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ व्यापार संघों ने आज भारत बंद बुलाया है। कई संगठनों ने हड़ताल की घोषणा की है और इसमें हज़ारों कर्मचारी भाग ले रहे हैं। एटीएम से रुपये निकासी सहित बैंक से जुड़े दूसरे कामकाज और व्यापार से जुड़े कई कामकाज के भी प्रभावित होने की संभावना है। सार्वजनिक गाड़ियों की आवाजाही बाधित हो सकती है।

हड़ताल के कारण सरकारी बैंकों में कामकाज के ज़्यादा प्रभावित होने की संभावना है। नकदी जमा और निकासी करने, चेक क्लीयरेंस और इंश्योरेंस से जुड़े कामकाज ठप्प रहने के आसार हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि कई बैंकों ने स्टॉक मार्केट को सूचना भेज दी है कि बैंक की सेवाओं पर हड़ताल का असर रह सकता है। हालाँकि निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित नहीं होने की संभावना है। 

दस केंद्रीय व्यापार संघों- इंटक, ऐटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ़, यूटीयूसी सहित कई स्वतंत्र फ़ेडरेशनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। सभी दसों केंद्रीय व्यापार संघों ने संयुक्त बयान में कहा है, 'हमें उम्मीद है कि कम से कम 25 करोड़ कर्मचारी आठ जनवरी को हड़ताल में भाग लेंगे।' बयान में यह भी कहा गया है कि उनकी माँग है कि कर्मचारी विरोधी, आम लोग विरोधी और राष्ट्र विरोधी नीतियों को सरकार वापस ले। इसके अलावा, वे प्रस्तावित लेबर लॉ का भी विरोध कर रहे हैं।

इस देशव्यापी हड़ताल में छात्रों और विश्वविद्यालयों में चुनाव जीतने वाले अधिकारियों के क़रीब 60 संगठनों ने भी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। वे फीस बढ़ोतरी और शिक्षा के निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों की माँगों के समर्थन के साथ ही अपनी माँगों के लिए किसानों से जुड़े 175 कृषि संघों ने हड़ताल करने का निर्णय लिया है और ग्रामीण भारत बंद रखने की बात कही है। 

व्यापार संघों ने जेएनयू में हिंसा और दूसरे विश्वविद्यालयों में भी ऐसी घटनाओं के विरोध में छात्रों और शिक्षकों के साथ एकजुटता दिखाई है।

ये संगठन रेलवे के निजीकरण, 49 रक्षा उत्पादन यूनिट के कॉर्पोरेटाइज़ेशन और बैंकों की ज़बरदस्ती विलय का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि बैंक कर्मचारी बैंकों के विलय के फ़ैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं, इसी वजह से वे हड़ताल में शामिल हो रहे हैं।

बैंक संघों में ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयी एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन, बीईएफ़आई, आईएनबीईएफ़, आईएनबीओसी और बैंक कर्मचारी सेना महासंघ ने पिछले महीने ही हड़ताल की घोषणा कर दी थी। 

दूसरी सेवाएँ भी होंगी प्रभावित

बैंकिंग सेवाओं के अलावा परिवहन और दूसरी सेवाएँ भी कई राज्यों में प्रभावित रह सकती हैं। पश्चिम बंगाल और केरल के सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बंद के दौरान हिंसा के दौरान गाड़ियों के नुक़सान होने पर छह लाख रुपये तक का इंश्योरेंस कवर देने का आश्वासन दिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि निजी बस, टैक्सी, कैब ऑपरेटर संघों ने पूरे राज्य में सामान्य सेवा बहाल रखने का आश्वासन दिया है। केरल में व्यापार संघों ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को बंद से मुक्त रखा है। दूसरे कई राज्यों में भी हड़ताल के कारण कई सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना है। 

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