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तालिबान की मदद कर रही पाकिस्तान एयर फ़ोर्स: अफ़ग़ानिस्तान

तालिबान की मदद कर रही पाकिस्तान एयर फ़ोर्स: अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के चरमपंथियों और अफ़ग़ान सैनिकों के बीच चल रही लड़ाई में पाकिस्तान पर बेहद गंभीर आरोप लगा है।

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के चरमपंथियों और अफ़ग़ान सैनिकों के बीच चल रही लड़ाई में पाकिस्तान पर बेहद गंभीर आरोप लगा है। यह आरोप अफ़ग़ानिस्तान के उप राष्ट्रपति अमीरूल्लाह सालेह ने लगाया है। अमीरूल्लाह सालेह ने कहा है कि पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स तालिबान की मदद कर रही है और उसने अफ़ग़ान सेना को चेतावनी दी है कि वह उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई न करे। 

सालेह ने गुरूवार रात को ट्वीट कर कहा कि पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स ने अफ़ग़ान आर्मी और एयर फ़ोर्स के लिए आधिकारिक रूप से चेतावनी जारी की है। इसमें उसने कहा है कि तालिबान को स्पिन बोल्डक के इलाक़े को खदेड़ने का पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स की ओर से जवाब दिया जाएगा। 

सालेह ने कहा कि पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स कुछ इलाक़ों में तालिबान को हवाई समर्थन दे रही है। 

इसके थोड़ी देर बाद सालेह ने एक और ट्वीट कर कहा कि किसी को उनके पाकिस्तान एयर फ़ोर्स वाले बयान पर शक हो तो वह इसका सबूत भी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अफ़गान एयर फ़ोर्स के जहाज स्पिन बोल्डक के इलाक़े से 10 किमी़ की दूरी पर थे और तब उनसे कहा गया कि वे यहां से चले जाएं वरना उन पर एयर मिसाइल दाग दी जाएंगी। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि पाकिस्तान के लिए अफ़ग़ानिस्तान को निगलना आसान नहीं होगा। 

सुनिए, इस विषय पर चर्चा- 

आगे बढ़ रहा तालिबान 

तालिबान ने बुधवार को पाकिस्तान के साथ लगने वाली एक बड़ी सीमा पर कब्जा कर लिया और वहां अपना झंडा लगा दिया। इस सीमा के एक ओर अफ़ग़ानिस्तान का वेश शहर है जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान का चमन इलाक़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक़, इसे तालिबान के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है क्योंकि यह बेहद अहम वाणिज्यिक इलाक़ा है और यहां से हर दिन 900 ट्रक गुजरते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी और नैटो देशों की सेनाओं की इस मुल्क़ से वापसी जारी है। 

अफ़ग़ानिस्तान की सरकार का कहना है कि उसके सैनिकों ने तालिबान को यहां से पीछे धकेल दिया है लेकिन स्थानीय लोगों और पाकिस्तान के अफ़सरों का कहना है कि यहां पर तालिबान का कब्जा बना हुआ है। 

तालिबान एक इसलामिक कट्टरपंथी संगठन है और इसने 1996 से 2001 तक वहां शासन किया था। 2001 में अमेरिका पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान आकर तालिबान के ख़िलाफ़ जंग शुरू की थी।

गनी से मिले जयशंकर 

इधर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ग़नी से गुरूवार को मुलाक़ात की है। मुलाक़ात के बाद जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान के हालात के बारे में बात हुई है और हमने वहां पर शांति, स्थिरता और विकास के लिए अपने समर्थन को दोहराया है। बता दें कि भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में कई परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश किया है। कुछ दिन पहले ही भारत ने काबुल में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास से कर्मचारियों को वापस बुला लिया था। 

तालिबान और अफ़ग़ान सैनिकों के बीच जारी इस जंग में ग़नी को विश्वास है कि उनकी सेना तालिबान के कब्जों वाले कुछ अहम रणनीतिक इलाक़ों को वापस लेने में कामयाब होगी। अफ़ग़ानिस्तान के लोग तालिबान के आगे बढ़ने से परेशान हैं।  

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