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योगी सरकार को सुप्रीम फटकार, अखबारों ने किया दरकिनार

योगी सरकार को सुप्रीम फटकार, अखबारों ने किया दरकिनार

सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली के मामले में योगी सरकार को लगी फटकार पर देश के बड़े अखबार आखिर नरम क्यों पड़ गए?

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में सीएए विरोध मामले में संपत्ति जब्त करने की कार्रर्वाई पर योगी सरकार को लगायी गयी फटकार की खबर शनिवार के हिन्दी अखबारों में दरकिनार कर दी गयी है जबकि हिजाब मामले की सुनवाई की खबर को प्रमुखता से छापा गया है।

दिल्ली से निकलने वाले एक राष्ट्रीय दैनिक ने अपने लखनऊ संस्करण में 15 नंबर पेज पर दो विज्ञापनों के बीच तीन कालम में योगी सरकार को लगी फटकार की खबर - ’यूपी सरकार वसूली नोटिस वापस ले’ हेडइलान के साथ छापी है। इस अखबार में शनिवार को दो फ्रंट पेज छपे हैं। पहले पेज की छह कालम की लीड है- यूपी को दंगों से बचाना हैः मोदी। इसके अलावा अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बयान भी इसके साथ छापे गये हैं। इस पेज पर दो कालम में अखिलेश के बयान को जगह दी गयी है। इसके दूसरे फ्रंट पेज की लीड है- ‘हिजाब विवाद देश भर में न फैलाएंः सुप्रीम कोर्ट। 

इस अख़बार के दिल्ली संस्करण में भी हिजाब पर सुनवाई की खबर पहले पेज की लीड है जबकि योगी सरकार को फटकार की खबर पेज नंबर 18 पर चार कालम में जगह दी गयी है। यह खबर दोनों संस्करणों में एक ही हेडलाइन से छपी है। पटना संस्करण में यह खबर नजर नहीं आयी।

एक दूसरे राष्ट्रीय दैनिक ने अपने लखनऊ संस्करण में पहले पेज पर मोदी का बयान लीड खबर बनायी है- ‘यूपी को नहीं चाहिए दंगे और दबंग।’ दूसरे फ्रंट पेज की लीड हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की खबर है- ‘संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेंगे!’  सीएए मामले में योगी सरकार को लगी फटकार की खबर को इसने पहले पेज पर महज एक कालम में जगह दी है।

उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख अखबार ने योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में लगी फटकार को पहले पेज पर दूसरे लेयर में तीन कालम में जगह दी है- ‘सीएए-वसूली के नोटिस वापस ले सरकार, नहीं तो हम करेंगे खारिज’- सुप्रीम कोर्ट। इसकी लीड भी कर्नाटक के हिजाब विवाद की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है- ‘हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की करेंगे हिफाजत...राष्ट्रीय स्तर पर न फैलाएं विवाद।’

एक और राष्ट्रीय दैनिक ने अपने लखनऊ संस्करण में पहले पेज पर लीड खबर बनायी है- ‘हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अधिकारों की रक्षा होगी।’ इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट की खबर इनसेट है- ‘रिकवरी नोटिस वापस लें वरना हम खारिज कर देंगे’ - कोर्ट।

मध्य भारत के प्रमुख अखबार जो उत्तर प्रदेश से प्रकाशित नहीं होता है। इसके मूल संस्करण- भोपाल में भी योगी सकरार को सुप्रीम कोर्ट में लगी फटकार की खबर पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गयी है। यह खबर इसके पेज नंबर 15 पर एक कालम में छपी है- ‘यूपी सरकार वसूली नोटिस वापस ले, वरना हम रद्द करेंगे’ - सुप्रीम कोर्ट। हालांकि इसने अपने दूसरे फ्रंट पेज की लीड हिजाब विवाद की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की खबर ही बनायी है- ‘चीफ जस्टिस बोले- स्थानीय मुद्दे को राष्ट्रीय न बनाएं।’

राँची से निकलने वाले एक प्रमुख अख़बार ने अपने रांची संस्करण में योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में लगायी गयी खबर को बिल्कुल जगह नहीं दी है। इसके दो फ्रंट पेजों पर स्थानीय खबरें लीड बनी हैं। इसके पेज नंबर 13 पर सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद की सुनवाई की खबर दो कालम में दी है- ‘संवैधानिक अधिकारों की होगी रक्षा’ - सुप्रीम कोर्ट। 

हिन्दी अखबारों में एक ही दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की दो खबरों को इतने अंतर से प्रकाशित करने के पीछे यह तर्क दिया जा सकता है कि हिजाब विवाद अधिक चर्चित और ताजा मामला था लेकिन सीएए मामले पर लगी फटकार की खबर को इस तरह दरकिनार करना योगी  सरकार के प्रति अखबारों का नर्म रवैया उजागर करता है।

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