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रघुवर दास की जूतों से पिटाई वाली वायरल ख़बर का सच

रघुवर दास की जूतों से पिटाई वाली वायरल ख़बर का सच

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को जूतों से पीटा गया। ये दावा एक न्यूज़ साइट 'वायरल इन इंडिया' ने किया है। 'वायरल इन इंडिया' ने इस ख़बर का शीर्षक 'बड़ी खबर- बीजेपी के मुख्यमंत्री को मारे गए जूते। 

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को जूतों से पीटा गया। ये दावा एक न्यूज़ साइट 'वायरल इन इंडिया' ने किया है। 'वायरल इन इंडिया' ने इस ख़बर का शीर्षक 'बड़ी खबर- बीजेपी के मुख्यमंत्री को मारे गए जूते, सभी 500 लोगों पे केस दर्ज' दिया है। ख़बर में आगे लिखा गया कि 'झारखंड में सत्तारूढ़ बीजेपी की सरकार जनता के विरोध को हजम नहीं कर पा रही है।' 'प्रदेश की जनता ने मुख्यमंत्री रघुवर दास का जूते और चपल्लों के साथ विरोध किया गया है।'

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'वायरल इन इंडिया' पर प्रकाशित ख़बर का स्क्रीन शाॅर्ट

ख़बर में आगे दावा किया गया कि 'मुख्यमंत्री रघुवर दास एक शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यहां पर बीजेपी के सताए लोग उन पर ही जूते चप्पल की बरसात कर देंगे।' 'वायरल इन इंडिया' ने यह ख़बर अपनी साइट पर 9 जनवरी 2019 को प्रकाशित की थी।   

ख़बर की सच्चाई

जब हमने इस ख़बर की सच्चाई जानने के लिए गूगल पर झारखंड के मुख्यमंत्री 'रघुवर दास' का नाम सर्च किया, तो वहां पर ऐसी कोई भी ख़बर नहीं थी जो वायरल हो रही ख़बर पर मुहर लगाती हो। इसके बाद जब हमने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया तो हमें एक न्यूज़ वेबसाइट 'हिंदुस्तान टाइम्स' पर ऐसी ही एक ख़बर दिखाई दीं। लेकिन यहां पर यह ख़बर आज से 2 साल पहले 1 जनवरी 2017 को प्रकाशित की गई थी। 'हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक ये मामला झारखंड के खरसावां गाँव का है। 

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2 जनवरी, 2017 को 'हिंदुस्तान टाइम्स' पर प्रकाशित हुई ख़बर

मुख्यमंत्री रघुवर दास यहां शहीद स्थल पर आयोजित शहीद दिवस समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुँचे थे। इस दौरान रघुवर दास को आदिवासी समुदाय के लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। ख़बर के मुताबिक इस दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों ने मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाते हुए वापस जाओ के नारे भी लगाए थे। श्रद्धांजलि देने के बाद रघुवर दास का काफ़िला जब वहां से निकल गया, तो बाद में लोगों ने वहां पर जूते-चप्पल उछाले। यानी कि उस दौरान रघुवर दास को कोई जूता नहीं लगा था।

इस पूरे मामले को ज़्यादातर मीडिया हाउस ने रिपोर्ट किया था।

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अमर उजाला पर प्रकाशित ख़बर का स्क्रीन शाॅर्ट

2 साल पुरानी ख़बर को 9 जनवरी को तोड़-मरोड़ कर प्रकाशित किया गया। हमारी पड़ताल में रघुवर दास की जूतों से पिटाई और 500 लोगों पर केस दर्ज होने की बात पूरी तरह से झूठी साबित हुई।

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