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जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष में एक खरोंच नहीं आई वे बढ़-चढ़कर फ़ैसले ले रहे: संजय राउत

जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष में एक खरोंच नहीं आई वे बढ़-चढ़कर फ़ैसले ले रहे: संजय राउत

शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा है कि जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष में एक खरोंच नहीं आई वे फ़ोरफ़्रंट यानी अग्रिम पंक्ति में फ़ैसले ले रहे हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन इस बीच मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को नहीं बुलाने का आरोप लगाकर शिवसेना के नेता संजय राउत ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष में एक खरोंच नहीं आई वे बढ़-चढ़कर फ़ैसले ले रहे हैं। हालाँकि राउत ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन समझा जाता है कि उनके निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी हैं। हाल के दिनों में विपक्षी दलों के नेताओं ने इस पर सवाल खड़े किए हैं कि प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़े नहीं रहे हैं और वह इतने समय तक अयोध्या भी नहीं गए, लेकिन भूमि पूजन कार्यक्रम कर वाहवाही लूट रहे हैं।

कुछ ऐसा ही आरोप शिवसेना के नेता संजय राउत ने भी लगाया है। उन्होंने 'न्यूज़18' से कहा, 'भगवान के नाम पर राजनीति हो रही है। क्या किया जा सकता है यदि इस पर राजनीति नहीं होती तो लोग प्रभु राम के नाम पर वोट नहीं माँगते। लेकिन उन्होंने ऐसा किया।' इस सवाल पर कि शिवसेना प्रमुख को क्यों आमंत्रित नहीं किया गया, संजय राउत ने कहा कि जिन्होंने भी संघर्ष में हिस्सा लिया था वे अतिथियों की सूची में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा, 'कल्याण सिंह, एल के आडवाणी, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी जी, सभी ने आंदोलन में काफ़ी भूमिका निभाई। आयोजकों ने कहा कि अतिथि सूची इसलिए छोटी रखी गई है क्योंकि कोरोना का ख़तरा है।'

बता दें कि बाबरी मसजिद विध्वंस के मुक़दमे में अभियुक्तों की सूची में पहला नाम तत्कालीन यूपी शिवसेना के अध्यक्ष पवन पांडे का है जबकि आडवाणी, जोशी सहित अन्य का नाम साज़िश रचने वालों में हैं। पवन पांडे यूपी में पहली और अब तक आखिरी बार शिवसेना के टिकट से जीतने वाले विधायक रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम में उन्हें बुलाया तक नहीं गया है। पांडे के साथ दूसरे जो लोग भी ढाँचा गिराने के आरोपी हैं और मुक़दमे का सामना कर रहे हैं उन्हें नहीं बुलाया गया है।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में इस पर एक संपादकीय लिखा गया। इसमें कहा गया है कि 'लोग जानते हैं कि संघर्ष में शिवसेना थी। बीजेपी ने ख़ुद के शामिल होने से इनकार किया था। उनका आधिकारिक बयान यह था कि उन्होंने यह नहीं किया है। उस समय बाला साहेब थे जिन्होंने कहा था कि उन्हें शिवसैनिकों पर गर्व है। हम अभी भी कोर्ट में केस का सामना कर रहे हैं। लोग यह जानते हैं।'

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