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महाराष्ट्र, मराठों का नंबर एक शत्रु हैं अमित शाह: सामना

महाराष्ट्र, मराठों का नंबर एक शत्रु हैं अमित शाह: सामना

चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का नाम और उसके चुनाव चिह्न उद्धव ठाकरे खेमे से छीन लिए जाने पर पार्टी के मुखपत्र सामना में संपादकीय छपा है। जानिए इसमें अमित शाह को क्यों महाराष्ट्र का दुश्मन बताया गया है?

‘शिवसेना’ नाम और चुनाव चिह्न खरीदने के बाद भारतीय जनता पार्टी की कमली पैर का घुंघरू टूटने तक नाच रही है। मिंधे गुट से ज्यादा खुश भारतीय जनता पार्टी नजर आ रही है। किसी दुकान से चना-मूंगफली खरीद ली गई हो, उस तरह से शिवसेना नाम और चुनाव चिह्न के मामले का ‘फैसला’ भी खरीद लिया गया है, अब यह बात छिपी नहीं है। किसी प्रॉपर्टी का सौदा किया जाए, उस तरह से चुनाव आयोग ने ठाकरे द्वारा स्थापित, जतन की गई शिवसेना को दिल्ली के तलवे चाटने के लिए मिंधों के हाथ दे दी। गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र आए और उन्होंने मिंधों को शिवसेना-धनुष बाण मिलने पर खुशी व्यक्त की। मिंधों को धनुष-बाण का चिह्न मिला, वह इन्हीं अमित शाह की मेहरबानी से, क्या अब यह छिपा है? ये इंसान महाराष्ट्र और मराठी लोगों का नंबर एक शत्रु है। इसलिए जो भी श्रीमान शाह के पीछे पड़कर अपनी राजनीतिक खुजली मिटाना चाहते हैं, उन सभी को क्या महाराष्ट्र का दुश्मन मानना पड़ेगा। 

छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र के स्वाभिमान के लिए हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की। उस स्वराज्य की जड़ खोदने आए हर ‘शाह’ की अंतड़ी छत्रपति और उनके मावलों ने निकाल ली। छत्रपति का वही विचार लेकर महाराष्ट्र आज भी ज़िंदा है और धधक रहा है। बेईमान और गद्दारों को शिवाजी महाराज ने कड़ा सबक़ सिखाया, इस इतिहास को कोई नहीं भूल सकता। उसी शिवराय की विरासत को शिवसेना आगे बढ़ा रही है। 

हालाँकि, चुनाव आयोग ने ‘शिवसेना’ नाम और चुनाव चिह्न पर मिंधों के पक्ष में अपना फ़ैसला सुनाया है, फिर भी शिवसेना ठाकरे की थी, है और रहेगी। 40 बेईमान विधायक, 12 सांसद यानी शिवसेना, ऐसा निर्णय देकर जनभावना और कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। लाखों शिवसैनिकों ने दिल्ली के चुनाव आयोग के पास अपना शपथपत्र ‘ट्रक’ भरकर भेजा, क्या उसका कोई मूल्य नहीं? शिवसेना के पदाधिकारियों, जिलाप्रमुखों, उपनेताओं के शपथ पत्रों का कोई मोल नहीं?

शिवसैनिकों ने जिन्हें चुनकर लाया, उनके सिर गिनकर धनुष-बाण और पार्टी के स्वामित्व का फैसला सुनाना, यह संविधान के साथ भी बेईमानी है। ठाकरे के नाम पर उन्हें वोट मिले। कल भी मिलेगा और फिर ये लोग चुनकर ही आएंगे, इसकी गारंटी न होते हुए भी उन लफंगों के भरोसे शिवसेना और धनुष-बाण का भविष्य सुनिश्चित किया गया। चुनाव आयोग के सत्ता पक्ष का गुलाम बनने का ही ये संकेत है। बेईमान विधायकों की अयोग्यता के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने तक चुनाव आयोग को अपना फ़ैसला रोकना चाहिए था। कल कोई अडानी, अंबानी, नीरव मोदी उठेगा और इसी तरह विधायक-सांसद खरीदकर पूरी पार्टी, सरकार पर अपना मालिकाना हक जताएगा। देश की सरकारें रोज पत्ते के बंगले की तरह गिराई जाएंगी।

महाराष्ट्र में कम से कम दो हजार करोड़ का सौदा करके पहले सरकार खरीदी गई और अब धनुष-बाण, शिवसेना के नाम का सौदा किया गया। यह वैसा लोकतंत्र है? ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना को उनसे छीन लिया गया और बालासाहेब ठाकरे के देवघर में पूजे जाने वाले धनुष-बाण को भी चुराकर दिल्ली के तलवे चाटने या फिर और कुछ चाटने वालों के हाथों सौंप दिया गया, वह किस बहुमत के आधार पर? यह तरीक़ा निरंकुशता का है और ये निरंकुश लोग महाराष्ट्र में आकर छत्रपति शिवराय पर फूल बरसाते हैं, यह तो महाराष्ट्र और शिवराय का अपमान है। 

अफजल खान की तरह बीड़ा उठाकर शिवसेना की पीठ में छुरा भोंक दिया गया है। यह महाराष्ट्र और मराठी माणुस को दिया गया घाव है और अगर भारतीय जनता पार्टी इसका जय-जयकार कर रही है तो महाराष्ट्र उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

भारतीय जनता पार्टी ने यह घिनौना कृत्य तब किया, जब आज़ादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को अब लाल क़िले से घोषणा करनी चाहिए, ‘हमने आज़ादी के 75 साल बर्बाद कर दिए हैं और देश में ‘हम करें सो’ क़ानून की तानाशाही प्रस्थापित हो गई है। न्यायालय, संसद, अख़बार और चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाएँ इसके आगे हमारे गुलाम के तौर पर काम करेंगी। 

आज़ादी के लिए आवाज़ उठाने वालों को और उसके लिए लड़ने वालों को देश का अपराधी ठहराकर फाँसी पर लटका दिया जाएगा। देश में ईमानदारी की कद्र नहीं होगी, चोर और लुटेरों को अहमियत दी जाएगी।’ यानी ‘लोकतंत्र’ व ‘आज़ादी’ शब्द को हमेशा के लिए ख़त्म करने की राह आसान हो जाएगी। महाराष्ट्र में इस विकृति की शुरुआत हुई, लेकिन महाराष्ट्र पर लगा यह जख्म यानी आपकी तानाशाही के अंत की शुरुआत साबित होगी। आज सत्ता का इतना मनमाना दुरुपयोग इतिहास में इससे पहले कभी नहीं हुआ था। अब गृह मंत्री अमित शाह पुणे आकर कहते हैं, ‘धोखा देनेवाले को कभी नहीं छोड़ना चाहिए!’ यह बेतुका बयान वे एक नंबर के धोखेबाजों की टांग से टांग सटाकर दे रहे हैं। मोदी के नाम पर वोट मांगा, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के लिए विपक्ष के तलवे चाट लिए, ऐसा दिव्य विचार उन्होंने रखा। ऐसा बोलने वाले खुद अपने पाखंड पर ही मुहर लगा रहे हैं। 

मोदी युग ख़त्म हो गया और बालासाहेब ठाकरे व उनके द्वारा स्थापित शिवसेना के बिना महाराष्ट्र में भाजपा को कुत्ता भी नहीं पूछेगा, इसलिए उन्होंने शिवसेना पर डाका डाला और अपने तलवे चाटने वाले मिंधे को मुख्यमंत्री बना दिया। हिंदुत्वरक्षक, मराठी लोगों की शान शिवसेना का अस्तित्व नष्ट करने वाला यह फ़ैसला महाराष्ट्र को स्वीकार्य नहीं है।‌ न्याय नहीं हुआ, फ़ैसला खरीदा गया है। व्यापारियों के राज्य में और दूसरा क्या होगा? लड़ाई जारी रहेगी!

(शिवसेना के मुखपत्र सामना से साभार।)

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