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जब ऋषि कपूर ने कहा था- ज़िंदगी में जो कुछ बना इस 'मुल्क' ने बनाया

जब ऋषि कपूर ने कहा था- ज़िंदगी में जो कुछ बना इस 'मुल्क' ने बनाया

ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई हिट और सुपरहिट फ़िल्में की हैं, जिसमें से कुछ ऐसी फ़िल्में भी हैं जिन्हें कोई कभी नहीं भूला सकता। फिर वो चाहे बॉबी हो या चांदनी। इसी कड़ी में एक और फ़िल्म मुल्क को भी जोड़ना ग़लत नहीं होगा।

सभी के दिलों में राज करने वाले अभिनेता ऋषि कपूर भले ही अब हमारे बीच न रहे हों, लेकिन सभी के दिलों में ज़िंदा हैं। ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई हिट और सुपरहिट फ़िल्में की हैं, जिसमें से कुछ ऐसी फ़िल्में भी हैं जिन्हें कोई कभी नहीं भूला सकता। फिर वो चाहे बॉबी हो या चांदनी। इसी कड़ी में एक और फ़िल्म को भी जोड़ना ग़लत नहीं होगा जिसका नाम मुल्क है। फ़िल्म मुल्क जो कि साल 2018 में रिलीज़ हुई और इसे डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने डायरेक्ट किया है। फ़िल्म में ऋषि कपूर के साथ एक्ट्रेस तापसी पन्नू, नीना गुप्ता, आशुतोष राणा लीड रोल में हैं। फ़िल्म मुल्क में ऋषि कपूर ने दमदार एक्टिंग तो की ही थी, साथ ही फ़िल्म में कुछ ऐसी लाइनें भी बोली थीं जिसकी काफ़ी सराहना की गई थी। फ़िल्म को क्रीटिक्स द्वारा ख़ूब पसंद किया गया था।

क्या है फ़िल्म में

फ़िल्म मुल्क में एक मुसलिम परिवार को दिखाया गया है और इसमें ऋषि कपूर (मुराद अली) का भतीजा आतंकवादियों के साथ मिलकर एक हमला करा देता है। वो लड़का इनके परिवार का होता है इसलिए सभी आस-पास के लोग मुराद अली के पूरे परिवार को शक की नज़र से देखने लगते हैं और आतंकवादी समझने लगते हैं। वकील आरती का किरदार निभा रही तापसी पन्नू इस परिवार का केस लड़ती हैं, जो इसी परिवार की बहू भी है। मुसलिम परिवार के लोगों को यह प्रमाण देने की आवश्यकता पड़ जाती है कि वो सच्चे मुसलमान हैं या नहीं और अगर हैं तो साबित करें।

ऋषि कपूर ने ‘मुल्क’ में क्या कहा था

वकील की भूमिका में तापसी पूछती हैं कि कैसे साबित करेंगे आप एक सच्चे मुसलमान हैं इसके जवाब में फ़िल्म मुल्क में ही ऋषि कपूर का 2 मिनट का एक सीन है जिसमें वह कहते हैं, ‘जो कुछ भी बना इस ज़िंदगी में इस मुल्क ने बनाया। अब्दुल हमीद से भी सिर ऊँचा हुआ तो गाँधी और मदर टेरेसा से भी हुआ। मुसलमान होने के इस मुल्क में फ़ायदे भी हुए और कभी-कभी शक की नज़र से भी देखा गया पर दफ़न उसी कब्र में होना है जो मेरे घर से 200 मीटर दूर है। मेरे ही घर में मेरा स्वागत करने का हक़ किसी और को किसने दिया। अगर आपको शक है मेरी वफादारी पर तो जाइए आप पता करिए क्यों शक है आपको। अगर आपको फर्क नहीं करना आता शाहिद और मुराद अली में तो आप पता करिए कि ऐसा क्यों है और अगर आप मेरी दाढ़ी और ओसामा बिन लादेन की दाढ़ी में फर्क नहीं कर पा रहे तो भी मुझे हक़ है मेरी सुन्नत निभाने का। गले लगाकर सवाल पूछेंगे तो कलेजा निकालकर हाथ में रख दूँगा। अंगुली उठाकर सवाल पूछियेगा ना तो याद रखियेगा मेरी जवाबदारी आपसे नहीं है, अपने ईमान से है और अपने मुल्क से है।’ 

इस सीन, वाक्य और ऋषि कपूर की दमदार एक्टिंग के चलते इस फ़िल्म को खूब पसंद किया गया था। इस फ़िल्म में वो सच दिखाया गया था जो कहीं न कहीं हमारे समाज का हिस्सा है। 

बता दें कि ऋषि कपूर का मुंबई स्थित चंदनवाड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया पर लॉकडाउन के चलते श्मशान घाट पर ज़्यादा लोग मौजूद नहीं थे। कपूर परिवार के 5 सदस्य और बाक़ी सभी 20 रिश्तेदार भी शामिल हुए। ऋषि कपूर की बेटी रिद्धीमा कपूर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाईं लेकिन वो दिल्ली से मुंबई पास लेकर पहुँच गईं।

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