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नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पारित, सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज

नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पारित, सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज

अनुमान के मुताबिक़ ही राज्यसभा ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष में और उसके ख़िलाफ़ मत पड़े। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुका है।

दिन भर की गरमागरम चर्चा और ज़ोरदार व कई बार तीखी नोक झोंक के बीच राज्यसभा ने विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया। इसके पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि इसके ख़िलाफ़ 105 सदस्यों ने मतदान किया। 

विधेयक के तहत अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, पारसी, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक की आलोचना की है और इसे संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ बताया है। 

मतदान के पहले विधेयक को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की माँग की गई। लेकिन यह प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके पक्ष में 92 और इसके ख़िलाफ़ 113 वोट पड़े।

सेलेक्ट कमेटी में विधेयक को भेजने के प्रस्ताव गिरने के बाद एक के बाद एक 14 संशोधन प्रस्ताव पेश किए गए। सभी संशोधन प्रस्ताव विपक्ष के सदस्यों ने रखे थे। लेकिन को छोड़ सभी प्रस्ताव ध्वनि मत से ही खारिज कर दिए गए। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने एक संशोधन प्रस्ताव रखा, जिस पर मतदान हुआ, पर यह गिर गया। इस संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में 96 और उसके ख़िलाफ़ 116 वोट पड़े। 

पहले बीजेपी की सहयोगी रही और अब उसके ख़िलाफ़ मोर्चा संभालने वाली शिवसेना ने मतदान का बॉयकॉट किया। इसके तीन सदस्य सदन में पूरे दिन रहे, उसका विरोध किया। पर वोटिंग के पहले सदन से बाहर निकल गए।

यह एक तरह से सरकार की मदद करना ही हुआ, क्योंकि वोटिंग का नतीजा सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों की तादाद पर निर्भर करता है। शिवसेना के 3 सदस्यों के बॉयकॉट करने से विधेयक को पारित कराने के लिए ज़रूरी वोटों की संख्या भी कम हो गई। इससे सरकार को सुविधा ही हुई। 

बहस के दौरान कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर हमला है और यह लोकतंत्र के भी ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा कि बंटवारे की राजनीति को बंद किया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि 1937 में हिंदू महासभा के नेता वीडी सावरकर ने दो राष्ट्रों की थ्योरी दी थी और हिंदू महासभा की बैठक में इस थ्योरी को पास किया गया था न कि कांग्रेस इसे लाई थी। उन्होंने कहा कि हिंदू महासभा और मुसलिम लीग ने देश के बंटवारे का समर्थन किया था। शर्मा ने कहा कि भारत ने हमेशा से ही शरणार्थियों को शरण दी है लेकिन कभी भी धर्म को आधार नहीं बनाया। 

लेकिन, इसका जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर घोर अत्याचार हुए और इन देशों में अल्पसंख्यक आबादी घट गई। उन्होंने दुहराया कि इन देशों में धार्मिक रूप से प्रताड़ना सहने वाले लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। शाह ने कहा, ‘भारत के मुसलमानों को इस विधेयक से चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं है और वे किसी के भी बहकावे में नहीं आएं। मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा मिलेगी।’ उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की भाषाई, सामाजिक रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों के कारोबार को भारत में नियमित किया जाएगा। 

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