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बूस्टर डोज़ पर राहुल ने जो कहा वही मोदी सरकार ने माना?

बूस्टर डोज़ पर राहुल ने जो कहा वही मोदी सरकार ने माना?

कोरोना संक्रमण के मामले जब देश में आए भी नहीं थे तभी से राहुल गांधी कोरोना को लेकर सरकार को आगाह करते रहे हैं। क्या राहुल गांधी जो कहते हैं सरकार बाद में वही क़दम उठाती है?

राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा है कि केंद्र सरकार ने कोरोना पर वही क़दम उठाया जो उन्होंने सुझाव दिया। उन्होंने आज कहा कि 'केंद्र सरकार ने बूस्टर डोज़ का मेरा सुझाव मान लिया है'। चार दिन पहले राहुल गांधी ने कहा था कि हमारी जनसंख्या के अधिकतर लोग अभी भी टीकाकृत नहीं हैं तो केंद्र सरकार बूस्टर डोज कब लगवाएगी? उनका यह सवाल तब आया था जब देश में लगातार ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं और शुरुआती शोध में सामने आया है कि बूस्टर खुराक से ओमिक्रॉन संक्रमण को तेज़ी से फैलने से रोका जा सकता है।

अब जब केंद्र सरकार ने बूस्टर खुराक पर फ़ैसला लिया है तब राहुल गांधी ने ट्वीट कर याद दिलाया है कि वह कोरोना पर जो कह रहे हैं वह सही है। 

राहुल का यह ट्वीट आज तब आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात अचानक किए गए राष्ट्र के नाम संबोधन में 15-18 साल के बच्चों के लिए वैक्सीन लगाए जाने की घोषणा की है। इनको 3 जनवरी से ये टीके लगाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों को डॉक्टरों की अनुमति के बाद प्रीकॉशन डोज यानी बूस्टर खुराक लगाने की भी घोषणा की। यह कार्यक्रम 10 जनवरी से शुरू होगा।

बूस्टर खुराक और बच्चों के लिए वैक्सीन को लेकर तब ज़्यादा चर्चा शुरू हुई जब ओमिक्रॉन का ख़तरा बढ़ने लगा। केंद्र सरकार ने ही माना है कि ओमिक्रॉन का डेल्टा से भी कम से कम 3 गुना ज़्यादा तेज गति से संक्रमण फैलता है। देश में अब तक ओमिक्रॉन के 400 से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

बहरहाल, बूस्टर डोज वाला मामला एक मात्र केस नहीं है जिसमें राहुल गांधी की बात केंद्र सरकार मानती हुई मालूम होती है। कई मामलों को देखने में आता है कि राहुल गांधी जो कहते हैं, उसे देरी से ही सही मगर सरकार मान लेती है। चाहे दुनिया के दूसरे देशों में बनी कोरोना वैक्सीन को भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी देने का मामला हो या 45 साल से ज़्यादा उम्र के सभी नागरिकों को कोरोना की वैक्सीन लगाने का मामला। सीबीएससी की परीक्षाएँ टालने की मांग भी राहुल गांधी लगातार करते रहे थे। 

राहुल गांधी ने अप्रैल महीने में कहा था कि सरकार को दुनिया भर में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूर की गई वैक्सीन को भारत में मंजूरी देनी चाहिए। राहुल का यह बयान आते ही तत्कालीन केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कहा था कि पार्ट टाइम नेता के तौर पर फेल होने के बाद राहुल गांधी अब फुल टाइम लॉबिस्ट हो गए हैं। 

लेकिन राहुल के सुझाव के महज तीन दिन बाद ही भारत सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ से मंजूर सभी वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी।

टीकाकरण के पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया गया था। उसके बाद से ही राहुल गांधी मांग कर रहे थे कि 45 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को भी टीका लगाना शुरू करना चाहिए। थोड़ी हीला-हवाली के बाद सरकार ने इस पर फ़ैसला लिया और एक अप्रैल से 45 से ऊपर उम्र वालों को भी टीका लगाना शुरू कर दिया था।

इसी तरह राहुल गांधी ने सीबीएससी की परीक्षाएँ स्थगित करने की मांग की थी। फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी यही मांग दोहराई। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ बैठक की और 10वीं की परीक्षा रद्द करने तथा 12वीं की परीक्षा टालने का फ़ैसला किया। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि शिक्षा ज़रूरी है लेकिन उससे ज़्यादा ज़रूरी बच्चों का स्वास्थ्य है।

राजनेताओं में राहुल पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने इस महामारी को लेकर सरकार को आगाह किया था। उन्होंने पिछले साल जनवरी महीने में ही सरकार को सचेत किया था, जबकि भारत में कोरोना वायरस का प्रवेश भी नहीं हुआ था।

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