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रफ़ाल सौदा मामले में पुनर्विचार याचिका ख़ारिज की सुप्रीम कोर्ट ने

रफ़ाल सौदा मामले में पुनर्विचार याचिका ख़ारिज की सुप्रीम कोर्ट ने

रफ़ाल सौदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने इस सौदे की जाँच सीबीआई से कराने के आग्रह को भी ठुकरा दिया है।

रफ़ाल सौदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने इस सौदे की जाँच सीबीआई से कराने के आग्रह को भी ठुकरा दिया है। यानी, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है। अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं को यह कह कर खारिज किया है कि उनमें कोई 'मेरिट' नहीं है, यानी मामले में दम नहीं है। ।

इन पुनर्विचार याचिकाओं पर जिस खंडपीठ ने फ़ैसला सनाया है, उसकी अगुआई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कर रहे हैं। उस खंडपीठ में एस. के. कौल और के. एम. जोसेफ़ भी हैं। जस्टिस कौल ने फ़ैसला पढ़ कर सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमें नहीं लगता है कि रफ़ाल सौदा मामले में एफ़आईआर दर्ज कराने या इसकी जाँच कराने का आदेश देने की ज़रूरत है।'

इन याचिकाओं पर सुनवाई 10 मई को पूरी कर ली गई थी। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी और मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर कर कहा था कि इस फ़ैसले पर फिर से विचार किया जाए, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि 36 लड़ाकू विमान खरीदने के मामले में सरकार के फ़ैसले की प्रक्रिया पर संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है

इसके अलावा वकील विनीत धंधा और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी इसी तरह की अलग-अलग याचिकाएँ दायर की थीं। 

इसके पहले अदालत ने 14 दिसंबर, 2018 को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें 58 हज़ार करोड़ रुपए के रक्षा सौदे में गड़बड़ियाँ करने के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जाँच करने की दरख़्वास्त की गई थी। 

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कोर्ट को केन्द्र सरकार ने ‘सीलबंद लिफाफे’ में ग़लत सूचना देकर गुमराह किया है, लिहाज़ा, उस फ़ैसले की समीक्षा की जानी चाहिए।

पहले याचिकाओं को कर दिया था रद्द

इससे पहले प्रधान न्यायाधीष रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस. के. कौल और के. एम. जोसफ की बेंच ने दाखिल चारों याचिकाओं को 14 जनवरी को ख़ारिज कर दिया था। तब अदालत ने कहा था कि वह रफ़ाल सौदे में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहती, विमानों की कीमत तय करना उसका काम नहीं है। 

बता दें कि रफ़ाल पर उच्चतम न्यायलय के फैसले में पेज नम्बर 21 में पैराग्राफ 25 पर विवाद खड़ा हुआ था। जिसमें कहा गया था कि रफ़ाल की कीमत की जानकारी कैग(सीएजी) के साथ साझा की गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट पीएसी यानी लोक लेखा समिति को सौंपी थी। लेकिन पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि पीएसी को ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है और ना ही सीएजी को इसकी कोई जानकारी थी।

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