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पीएम मोदी एनडीए सांसदों के साथ क्यों कर रहे बैठक, क्या कह रहे हैं

पीएम मोदी एनडीए सांसदों के साथ क्यों कर रहे बैठक, क्या कह रहे हैं

पीएम मोदी भले ही संसद में नहीं आ रहे हों लेकिन वो एक बहुत महत्वपूर्ण मिशन पर काम कर रहे हैं। 2024 के चुनाव के मद्देनजर वो एनडीए के सांसदों से अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से बैठक कर रहे हैं और उन्हें चुनाव के नुस्खे भी बता रहे हैं, उनका मनोबल भी बढ़ा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी के मद्देनजर पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों को अलग-अलग समूहों में बुलाकर बातचीत शुरू कर दी है और उन्हें अगले चुनाव में जीत का नुस्खा भी बता रहे हैं। पीएम मोदी की एनडीए सांसदों के साथ बैठक पर इंडियन एक्सप्रेस ने एक विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एनडीए सांसदों के साथ ये बैठकें सोमवार से शुरू हुई हैं। इन बैठकों में पीएम मोदी का असली संदेश यही है कि अब एनडीए राम मंदिर जैसे मुद्दों के सहारे बार-बार चुनाव में नहीं उतर सकती। इसलिए सांसद अपने क्षेत्र में छोटे-छोटे मुद्दे पर खुद को केंद्रित करें और उसी हिसाब से काम करें। पीएम मोदी ने यह भी संदेश दिया है कि हर राज्यसभा सांसद कम से एक बार चुनाव जरूर लड़े, चाहे वो नगर निगम का ही चुनाव क्यों न हो। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी आगामी चुनाव के लिए एनडीए सांसदों का मनोबल बढ़ाने के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। वो हर सांसद को भरोसा दे रहे हैं कि 2024 में भाजपा सत्ता में वापसी करने जा रही है। दरअसल विपक्ष यानी इंडिया के आक्रामक होने के बाद तमाम सर्वे बता रहे हैं कि भाजपा के वोट शेयर में कमी आ सकती है। हालांकि किसी सर्वे ने भाजपा को कमजोर नहीं बताया है।

नए मुद्दों की तलाश

पीएम मोदी की पहली बैठक पश्चिमी और पूर्वी यूपी के एनडीए सांसदों के साथ रही। लेकिन इस बैठक से मुद्दों को लेकर काफी रोचक जानकारी सामने आई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यूपी के एनडीए सांसदों के साथ अपनी पहली बैठक में, प्रधानमंत्री ने कहा राम मंदिर आंदोलन उस विचारधारा से पैदा हुआ था, जिसमें भाजपा यकीन करती है और यह अपने "तार्किक" निष्कर्ष के करीब पहुंच है। हालांकि, हम जीत के लिए केवल राम मंदिर पर निर्भर नहीं रह सकते... उन्होंने कहा कि हम संतुष्ट नहीं हो सकते।" इंडियन एक्सप्रेस ने एक सूत्र को कोट करते हुए इस बारे में लिखा है। प्रधानमंत्री के इस बयान से साफ हो गया कि भाजपा अब खुद भी अयोध्या मुद्दे को ज्यादा महत्व नहीं देने जा रही है। हालांकि जनवरी में राम मंदिर का उद्घाटन खुद पीएम मोदी करने वाले हैं। ऐसे में यह स्टैंड क्यों बदल रहा है, आने वाले समय में यह बात और साफ होगी। क्योंकि भाजपा नेतृत्व कहीं न कहीं यह भी सोच रहा है कि जनवरी में उद्घाटन के बाद चुनाव के लिए समय कम रहेगा तो शायद पहले जैसा माहौल पैदा नहीं होगा। यह भी संभव है कि विपक्षी दल अन्य आक्रामक मुद्दों के साथ इसे पीछे धकेल दें।

जाति की राजनीति पर हमलाः इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों की बैठकों में जाति की राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने सांसदों से कहा- विपक्ष "जाति की राजनीति खेल रहा है। जबकि हमारे लिए एकमात्र जाति गरीबी है।'' उन्होंने कहा कि सभी एनडीए सांसद यह दावा करें कि उनकी लड़ाई गरीबी के खिलाफ है और इस संदर्भ में केंद्र द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी स्कीमों की जानकारी जनता को दें।

एनडीए सांसदों के साथ अपनी पहली बैठक में, मोदी ने यह चौंकाने वाला संदेश भी दिया कि वह भाजपा के सभी राज्यसभा सांसदों को चुनाव लड़ते देखना चाहते हैं ताकि उन्हें 'महसूस' किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कहा कि यह नगर निगम का चुनाव भी हो सकता है। कहा जा रहा है कि राज्यसभा में वरिष्ठ नेताओं को 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

और क्या समझायाः एनडीए में हाल ही में शामिल हुई ओमप्रकाश राजभर की पार्टी और दक्षिण भारत की पार्टियों के मद्देनजर भी पीएम ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि भाजपा ने हमेशा अपने सहयोगियों का सम्मान किया है। चाहे बिहार में पूर्व सहयोगी जेडीयू हो या महाराष्ट्र में शिवसेना हो। दोनों राज्यों में बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा ने मुख्यमंत्री पद छोड़ सहयोगी के लिए छोड़ दिया। मोदी ने कहा कि अकाली दल के साथ लंबे समय तक गठबंधन में रहने के बावजूद भाजपा ने पंजाब में कभी भी डिप्टी सीएम पद की मांग नहीं की।

दक्षिण भारत में जहां भाजपा कमजोर है, वहां के एनडीए सहयोगियों के सांसदों का भी भरोसा जीतने की कोशिश पीएम मोदी ने अपनी बैठक के जरिए की। उन्होंने साउथ के सांसदों से यह संदेश फैलाने का आग्रह किया कि भाजपा वहां सत्ता में नहीं होने के बावजूद भी अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने तमिलनाडु में एआईएडीएमके का उदाहरण दिया।

एनडीए सांसदों से पीएम ने यह भी कहा कि एनडीए बने हुए 25 साल हो चुके हैं और इसका गठन "किसी एक शख्स का विरोध करने के लिए नहीं" किया गया था। सूत्रों का कहना है कि दरअसल यह बात विपक्षी इंडिया के संदर्भ में कही गई है, जिसका स्पष्ट मकसद पीएम मोदी को रोकना है।

भाजपा ने एनडीए को खड़ा करते हुए कुछ नई पार्टियों को जोड़ा और पुरानों से संबंध और मजबूत किए। हालांकि टीडीपी और अकाली दल अभी भी वापस नहीं लौटी हैं। लेकिन अकाली भाजपा के पुराने मित्र हैं तो वे देर सवेर लौट आएंगे। 

पीएम मोदी और भाजपा के लिए एनडीए कितना महत्वपूर्ण हो गया है, उसका अंदाजा इस घटनाक्रम से लगाया जा सकता है कि हाल ही में 38 पार्टियों की बैठक एनडीए के मंच पर हुई थी। उसी दिन 26 विपक्षी दलों ने अपने गठबंधन का नाम इंडिया रखा था।

बहरहाल, अभी बिहार, पंजाब, हरियाणा और पूर्वोत्तर के सांसदों को भी पीएम संबोधित करेंगे। यह संबोधन मॉनसून सत्र के दौरान भी हो सकता है, क्योंकि सभी सांसद अभी दिल्ली में मौजूद हैं। 

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