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प्रधानमंत्री मोदी को पंडित नेहरू का नाम क्यों लेना पड़ा संसद में?

प्रधानमंत्री मोदी को पंडित नेहरू का नाम क्यों लेना पड़ा संसद में?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या खुद और अपनी पार्टी बीजेपी को आलोचनाओं से बचाव के लिए जवाहर लाल नेहरू का नाम लेना पड़ा? जानिए, प्रधानमंत्री ने क्या कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्या देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का नाम नहीं लेने का आरोप लगता है? प्रधानमंत्री मोदी तो कम से कम ऐसा ही मानते हैं। उन्होंने संसद में सोमवार को चुटकी लेते हुए कहा कि 'आप शिकायत करते हैं कि मैं पंडित जी का नाम नहीं लेता। आज मैं नेहरू जी का नाम लेता रहूंगा- आनंद लें... आप कहते रहते हैं कि मोदी-जी नेहरू-जी का नाम नहीं लेते हैं। इसलिए मैं आपकी इच्छा पूरी कर रहा हूँ।"

हालाँकि, प्रधानमंत्री मोदी का बयान जो भी हो, लेकिन उन पर आरोप लगता रहा है कि वह और उनकी पार्टी कांग्रेस के शासनकाल और पहले प्रधानमंत्री नेहरू पर हमला कर खुद को विपक्ष के हमलों से बचाते हैं। तो संसद में भी प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को जो नेहरू का नाम लिया वह भी क्या खुद के बचाव के लिए था?

इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री के बयान से ही बेहतर मिल सकता है। मुद्रास्फीति की आलोचना से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के लाल क़िले से राष्ट्र के नाम संबोधन का ज़िक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पंडित नेहरू ने लाल क़िले से (जब वैश्वीकरण नहीं था) कहा- 'कोरिया में युद्ध हमें प्रभावित कर रहा है। इसलिए कीमतें बढ़ती हैं और वे हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं'।"

उन्होंने नेहरू के भाषण को उद्धृत करते हुए आगे कहा, "अगर अमेरिका में कुछ होता है, तो यह हमारे सामान की कीमत को प्रभावित करता है। कल्पना कीजिए कि मुद्रास्फीति की समस्या कितनी गंभीर थी - कि नेहरू को लाल किले से यह कहना पड़ा। अगर आप आज सत्ता में होते तो आप कोरोना वायरस पर मुद्रास्फीति का दोष मढ़ देते और खुद को दूर कर लेते।"

इसी दौरान कांग्रेस के विरोध पर प्रधानमंत्री ने चुटकी ली और कहा कि आप शिकायत करते हैं कि मैं पंडित जी का नाम नहीं लेता तो आज मैं नेहरू जी का नाम लेता रहूँगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के इस आरोप पर भी पलटवार किया कि सरकार ने केवल कुछ मुट्ठी भर उद्योगपतियों का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि नेहरू और इंदिरा गांधी के समय भी लोग टाटा-बिड़ला की सरकार कहकर आरोप लगाते थे।

दरअसल, प्रधानमंत्री का पूरा बयान राहुल गांधी पर हमले का केंद्रित लग रहा था। राहुल गांधी ने बजट पेश होने के एक दिन बाद यानी 2 फ़रवरी को राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान सरकार पर तीखा हमला किया था और कहा था कि 'भारत में दो भारत बसते हैं। एक वो हैं जहां अमीर रहते हैं। दूसरा वो है जहां न पानी है, न बिजली है, न खाना है।' 

राहुल गांधी ने अडाणी और रिलायंस ग्रुप का नाम लेते हुए कहा था कि मोदी सरकार ने सारा खजाना इनके लिए लुटा दिया। उन्होंने कहा था कि दोनों उद्योग समूहों ने इस देश के सारे संसाधनों पर कब्जा कर लिया है।

राहुल ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा था कि भारत में एक राजा का शासन चल रहा है। राहुल ने कहा था, '1947 में कांग्रेस ने राजा और साम्राज्यवाद के विचार को तोड़ा, लेकिन अब वह वापस आ गया है। तमाम संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। आपके विज़न में किसानों की आवाज़ नहीं है।'

राहुल ने कहा था, 'अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु। मेरी समझ यह है कि आरएसएस और बीजेपी हमारे देश की नींव के साथ खेल रहे हैं। वे देश के बीच की कड़ी को कमजोर कर रहे हैं। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि एक भी युवा को नौकरी न मिले। अपने आप से पूछें कि क्यों।'

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