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रात में पसीने से तर हो गए? कहीं ओमिक्रॉन संक्रमण तो नहीं?

रात में पसीने से तर हो गए? कहीं ओमिक्रॉन संक्रमण तो नहीं?

मूल कोरोना वायरस और डेल्टा वैरिएंट से ओमिक्रॉन वैरिएंट अलग कैसे है? आख़िर इसका लक्षण क्या है जिससे जांच से पहले इसकी पहचान की जा सके?

ऐसी सर्दियों में भी यदि आप रात में पसीने से तर हो जाते हैं तो आपको सचेत हो जाना चाहिए! इसकी आशंका हो सकती है कि आपको कोरोना के नये वैरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण हो। ऐसा ब्रिटेन के सरकारी स्वास्थ्य महकमे के ही एक डॉक्टर ने कहा है। उन्होंने कहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित कुछ लोगों में ऐसी शिकायतें हैं कि रात में कभी-कभी इतना पसीना चलता है कि आपको कपड़े बदलने पड़ जाते हैं।

हालाँकि, इससे इतर ब्रिटेन के ही कई वैज्ञानिकों ने कहा है कि इसके लक्षण अब सामान्य सर्दी से मेल खाते हैं। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए सबसे आम लक्षण नाक बहना, सिरदर्द, थकान, छींकने और गले में खराश हैं। यह लंदन में पुष्ट किए गए मामलों के विश्लेषण पर आधारित है।

लेकिन इसी बीच ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के एक चिकित्सक डॉ. आमिर ख़ान ने पिछले हफ्ते द सन दिखने वाले लक्षण के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 'रात में इतना पसीना आता है कि इससे पूरी तरह आप भीग जाते हैं और जहाँ आपको उठना और अपने कपड़े बदलना पड़ सकता है'।

ख़ान ने कहा है कि गले में खराश, सूखी खांसी, अत्यधिक थकान और मांसपेशियों में दर्द ये सभी कोरोना के प्रमुख लक्षण हैं। बता दें कि रात में पसीने आने को ओमिक्रॉन के सबसे आम लक्षणों में से एक के रूप में माना गया। मांसपेशियों में दर्द, थकान और गले में खराश अन्य सामान्य लक्षण हैं।

इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी ओमिक्रॉन के लक्षण पर एक रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती आँकड़ों से कुछ अलग-अलग लक्षण सामने आए हैं, लेकिन विशेषज्ञ निश्चित नहीं हैं कि वे कितने सटीक हैं। मिसाल के तौर पर दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े निजी स्वास्थ्य बीमाकर्ता द्वारा पिछले सप्ताह जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि ओमिक्रॉन वाले दक्षिण अफ़्रीकी लोगों को अक्सर गले में खरास, नाक जाम होने, सूखी खांसी और मांसपेशियों में दर्द, विशेष रूप से पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायतें रहीं।

 - Satya Hindi

लेकिन कुछ विशेषज्ञ इन लक्षणों के बारे में कहते हैं कि ये सभी लक्षण डेल्टा वैरिएंट के भी हैं और मूल कोरोना वायरस के भी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में एक नर्स प्रैक्टिशनर एशले जेड रिटर ने यही कहा। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में एक संक्रामक रोग चिकित्सक डॉ. ओटो ओ यांग ने कहा कि ओमिक्रॉन और पहले के वैरिएंट के लक्षणों बीच यदि अंतर हैं तो वे शायद काफी सूक्ष्म हैं।

एक संभावित अंतर यह है कि पहले के वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन में स्वाद और गंध जाना कम हुआ है।

शोध से पता चलता है कि मूल कोरोना स्ट्रेन वाले 48 प्रतिशत रोगियों को गंध का पता नहीं चलता था और 41 प्रतिशत को स्वाद का पता नहीं चलता था। लेकिन नीदरलैंड में टीकाकरण वाले लोगों में हुए ओमिक्रॉन संक्रमण के विश्लेषण में पाया गया कि केवल 23 प्रतिशत रोगियों को स्वाद का पता नहीं चला और केवल 12 प्रतिशत को गंध का पता नहीं चला। लेकिन इसके साथ यह भी कहा गया कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह अंतर किस कारण से है- ओमिक्रॉन या टीकाकरण की स्थिति जैसे किसी अन्य वजह से।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति को लगे टीके के कारण कोरोना के लक्षण अलग हो सकते हैं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी मेयर्स कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग में सहायक प्रोफेसर माया एन क्लार्क-कुटैया ने कहा कि डेल्टा और ओमिक्रॉन के मरीज़ों में क़रीब-क़रीब एक जैसे लक्षण ही हैं। टीके लगाए हुए ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों में सिरदर्द, शरीर दर्द और ठंड के साथ बुखार की शिकायतें आई हैं। डेल्टा और मूल कोरोना से संक्रमित बिना टीका लगाए लोगों में उसी तरह के फ्लू जैसे लक्षणों के साथ-साथ साँस लेने में तकलीफ और खाँसी होने की संभावना अधिक होती है।

ओमिक्रॉन और दूसरे वैरिएंट के बीच एक अन्य अंतर यह है कि ओमिक्रॉन में इनक्यूबेशन पीरियड कम होता है। इनक्यूबेशन पीरियड से मतलब है कि संक्रमण के संपर्क में आने से लेकर शरीर में उस संक्रमण के फैलने की अवधि। यानी इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि एक व्यक्ति के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संपर्क में आने के बाद इसके लक्षणों के उजागर होने, दूसरों में संक्रमण फैलाने की स्थिति में आने और जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव आने में कम से कम तीन दिन लगते हैं। जबकि डेल्टा या मूल कोरोना संक्रमण के मामले में ऐसा होने में चार से छह दिनों का समय लगता है। 

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