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एक अधिकारी को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी में नवीन पटनायक?

एक अधिकारी को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी में नवीन पटनायक?

नवीन पटनायक की बीजेडी का उत्तराधिकारी कौन होगा? लगातार उठते इस सवाल के बीच ही ओडिशा में एक आईएएस अधिकारी को लेकर एक दिलचस्प घटनाक्रम घटा है। जानिए, क्या मामला है।

नवीन पटनायक के सबसे क़रीबी आईएएस अधिकारी वीके पांडियन अब राज्य सरकार में कैबिनेट रैंक के साथ शामिल हो गए। एक दिन पहले तक वह एक आईएएस अधिकारी थे और मुख्यमंत्री के निजी सचिव और क़रीबी सहायक थे। ओडिशा में उन्हें सबसे ताक़तवर अधिकारी माना जाता रहा।

केंद्र ने एक दिन पहले ही ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी वीके पांडियन की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी दी है। और अब नवीन पटनायक ने उन्हें कैबिनेट रैंक के साथ 5T (परिवर्तनकारी पहल) और नबीन ओडिशा के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। पांडियन सीधे मुख्यमंत्री के अधीन काम करेंगे। यानी एक तरह से अब पांडियन की राजनीति में लॉन्चिंग हो गई है। तो क्या वह बीजेडी के उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आएँगे? 

यह सवाल इसलिए कि पार्टी में नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी को लेकर बार-बार कयास लगाए जा रहे हैं। हाल में वीके पांडियन जिस तरह से राज्य में पेश आते रहे हैं उनके नाम पर काफी चर्चा रही है।

पिछले कुछ हफ़्तों से पांडियन सीधे तौर पर पारंपरिक मंत्री स्तर के दौरे करते रहे हैं-सायरन बजना, काफिलों की दौड़, और वरिष्ठ अधिकारी वीआईपी की अगवानी का इंतज़ार, सरकारी हेलीकॉप्टर से राज्य के जिलों का दौरा। पूरी तरह एक मंत्री जैसा रुतबा। स्थिति ऐसी कि उनसे ज़्यादा हलचल पैदा करने वाला कोई और वीआईपी मंत्री भी नहीं। 

इन वजहों से राज्य में वह विपक्षी दलों के निशाने पर भी रहे हैं। हाल के महीनों में पांडियन सरकारी हेलीकॉप्टर का उपयोग करके जिलों के तूफानी दौरे करने के लिए विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए थे। विपक्षी भाजपा और कांग्रेस ने पांडियन पर सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। उन्हें सत्तारूढ़ बीजेडी के कुछ नेताओं की आलोचना का भी सामना करना पड़ा। 

तो सवाल है कि आख़िर एक सामान्य सा आईएएस अफ़सर जो एक जिले का कलेक्टर था वह इस क़द तक कैसे पहुँच गया?

मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले पांडियन ने मुख्यमंत्री के गृह जिले मयूरभंज और गंजम के कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बेहतरीन काम की अपनी छाप छोड़ी। माना जाता है कि गंजम में उनके काम ने मुख्यमंत्री का ध्यान पांडियन की ओर खींचा था और मई 2011 में वह पटनायक के कार्यालय में उनके निजी सचिव के रूप में पहुँच गये थे। पांडियन तब से इस पद पर बने हुए थे और अपने सहकर्मियों के विपरीत एक बार भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं गए हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उनकी पत्नी सुजाता कार्तिकेयन भी एक आईएएस अधिकारी और उनकी बैचमेट हैं। वह वर्तमान में मिशन शक्ति विभाग के आयुक्त के पद पर तैनात हैं।

मई 2012 में नवीन पटनायक के पूर्व सलाहकार प्यारीमोहन महापात्र से उनकी अनबन के बाद पांडियन को मौक़ा मिला। महापात्र के समय एक वक़्त तो ऐसा लगने लगा था जैसे कि पार्टी में पटनायक का दबदबा कम हो जाएगा, लेकिन उस स्थिति को पांडियन ने बेहतरीन तरीक़े से निपटा। महापात्र के हटने के बाद पांडियन मुख्यमंत्री के बेहद क़रीब आ गए। 

हाल के वर्षों में कई सरकारी योजनाओं और पहलों के पीछे पांडियन का विचार माना जाता है। '5T पहल', जिसकी छाप लगभग हर सरकारी विभाग में है, उन्हीं का विचार माना जाता है। इसे पटनायक के पांचवें कार्यकाल में प्रशासनिक तंत्र को नया रूप देने के लिए लॉन्च किया गया था।

द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि पांडियन अब राजनीति में कदम रख सकते हैं। बीजेडी के एक नेता ने कहा, 'पांडियन एक मेहनती अधिकारी हैं और उन्होंने ओडिशा के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है। जब उन्होंने जन शिकायत बैठकों में भाग लेने के लिए जिलों का दौरा किया तो राज्य के लोगों ने बड़े उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। इसलिए, अगर वह राजनीतिक कदम उठाते हैं तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।'

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