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सांप्रदायिक हिंसा की आग में क्यों झुलसने लगा है मालवा-निमाड़?

सांप्रदायिक हिंसा की आग में क्यों झुलसने लगा है मालवा-निमाड़?

मध्य प्रदेश के खरगोन और बड़वानी में हिंसा क्यों हुई? क्या यह सिर्फ़ शोभायात्रा का मामला है या फिर इसमें कुछ राजनीतिक वजह भी है?

मध्य प्रदेश का मालवा-निमाड़ क्षेत्र सांप्रदायिक हिंसा की आग में आखिर क्यों झुलसने लगा है? इस सवाल की गूंज आम जन से लेकर मीडिया और राजनीतिक एवं प्रशासनिक गलियारों में भी हो रही है। रामनवमी पर रविवार को खरगोन और बड़वानी में सांप्रदायिक हिंसा हुई है। दोनों ही जगह रामनवमी पर जुलूस के दौरान उपद्रव हुआ है। 

खरगोन में दो संप्रदायों के बीच रविवार को निकाली गई शोभायात्रा पर पथराव के बाद शुरू हुआ झड़पों का सिलसिला दोपहर से लेकर देर शाम, और आधी रात से लेकर सोमवार तड़के तक चलता रहा। इस दौरान पत्थरबाज़ी, तोड़फोड़, लूटपाट, आगज़नी की घटनाओं की सूचनाएं निरंतर आती रहीं। खरगोन में घटना के बाद हालात बेकाबू हो जाने पर कर्फ्यू लगा दिया गया था। इसके बाद भी उपद्रवी, हिंसा-आगजनी की घटनाओं को अंजाम देते रहे। इंदौर से भारी मात्रा में पुलिस बल भेजा गया है। सोमवार को भी क्षेत्र में पूरे दिन तनाव बना रहा। कर्फ्यू लागू रखा गया।

उपद्रवियों को काबू में करने का प्रयास करते खरगोन में तो एसपी के पैर में गोली भी लगी है। वे बुरी तरह ज़ख्मी हुए हैं। खरगोन के एक निजी अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ है। फ़िलहाल वे अस्पताल में ही भर्ती हैं। पुलिस द्वारा उपद्रवियों की धर-पकड़ की जा रही है। 

बता दें कि मध्य प्रदेश में सत्ता की सीढ़ी मालवा-निमाड़ क्षेत्र ही है। राज्य की कुल 230 सीटों वाली विधानसभा की सबसे ज़्यादा 66 सीटें इसी क्षेत्र में हैं। मालवा-निमाड़ बीजेपी के गढ़ के तौर पर विख्यात है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रयोगशाला भी माना जाता रहा है। 

आरएसएस की जबरस्त पकड़ वाले मालवा-निमाड़ ने साल 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ा झटका दिया था। महज 27 सीटें ही इस क्षेत्र से बीजेपी को मिल पायी थीं।

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में बुरी तरह पिछड़ने के बाद बीजेपी लगातार चौथी बार मध्य प्रदेश में सरकार नहीं बना पायी थी। साल 2018 में कमलनाथ की अगुवाई में कांग्रेस सत्ता पाने में सफल हो गई थी।

बीजेपी को साल 2013 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ की कुल 66 में से 57 सीटें मिली थीं। इस तुलना में 2018 में बीजेपी को सीधे-सीधे 30 सीटों का नुक़सान हुआ था।

खास गढ़ माने जाने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कुल 15 ज़िलों में 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का खरगोन, बुरहानपुर, झाबुआ और अलीराजपुर में तो खाता भी नहीं खुल सका था। भोजशाला को लेकर ख्यात धार जिले की कुल सात सीटों में एक पर बीजेपी को 2018 में मिल पायी थी, जबकि 6 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।

विधानसभा के 2018 के चुनाव में मालवा-निमाड़ की कुल 66 में 36 सीटें कांग्रेस, 27 बीजेपी और तीन सीटें निर्दलीयों को मिली थीं।

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कमलनाथ की सरकार 15 महीनों बाद गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बगावत करने वाले कांग्रेस के विधायकों में काफी संख्या में विधायक मालवा-निमाड़ के भी रहे थे।

बीजेपी से हाथ मिला लेने के बाद ये बागी कांग्रेसी, उपचुनाव में ‘कमल’ चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरे थे। उपचुनावों में ज़्यादातर को बीजेपी के उम्मीदवार रहते जीत मिल गई थी। अनेक को शिवराज काबीना में जगह भी मिली।

बहरहाल, मालवा और निमाड़ अंचल में सांप्रदायिक तनाव की बढ़ती घटनाओं को लेकर विश्लेषकों की राय, राज्य की चुनावी राजनीति से ही जुड़ती नज़र आ रही है।

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार-विश्लेषक और राष्ट्रीय सेक्युलर मंच के संयोजक लज्जाशंकर हरदेनिया ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, “मीडिया ने खरगोन की घटना को ‘रामनवमी के जुलूस पर पथराव और इसके बाद हिंसा’, हेडलाइन से रिपोर्ट किया है।”

वे आगे कहते हैं, ‘हकीकत अकेले यह नहीं है। मैंने जो पता किया है, उसके अनुसार जुलूस में शामिल धर्मध्वजधारियों ने समुदाय विशेष के लोगों को उकसाने वाले नारे लगाये। इस क्रिया की प्रतिक्रिया में उपद्रव आरंभ हुआ।’

हरदेनिया ने तंज कसते हुए कहा, ‘यूपी में चुनाव के पहले जैसा ट्रेंड, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में देखने को मिलने लगा है। अभी आगाज़ है। जैसे-जैसे चुनाव पास आयेंगे, ऐसे घटनाक्रम और भी बढ़ जायें तो आश्चर्य नहीं कीजियेगा!’

बीजेपी का एजेंडा है: कांग्रेस नेता

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने खरगोन-बड़वानी में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को निंदनीय करार दिया। यादव खरगोन से ही आते हैं। उन्होंने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘बड़ा सवाल यही है कि चुनाव पास आते ही इस तरह के सांप्रदायिक तनाव की वारदातें मध्य प्रदेश में आखिर क्यों बढ़ जाती हैं? क्यों मालवा-निमाड़ में नफ़रत की आग फैलने लगती है?’

यादव ने कहा, ‘राजनीति चमकाने के लिए नफ़रत फैलाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। मध्य प्रदेश गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए पहचाना जाता है, इस पहचान को बिगाड़ने का प्रयास उचित नहीं माना जायेगा।’

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किसी भी दंगाई को छोड़ेंगे नहीं: शिवराज सिंह

उधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी ताजा वारदातों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, ‘मध्य प्रदेश में दंगाइयों के लिए कोई स्थान नहीं हैं। खरगोन-बड़वानी घटनाओं को अंजाम देने वालों को चिन्हित कर लिया गया है।’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘राज्य सरकार ने सरकारी, और निजी संपत्तियों को नुक़सान पहुँचाने वालों को सख्त सज़ा एवं उनसे वसूली का कानून बनाया हुआ है। इसी कानून के तहत ताजा घटनाक्रम में निजी एवं सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वालों से वसूली की जायेगी।’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘खरगोन-बड़वानी में सांप्रदायिक हिंसा, तोड़फोड़ और उपद्रव करने वालों को कठोरतम दंड दिलाया जायेगा। किसी भी दंगाई को सरकार बख्शेगी नहीं।’

‘एक-एक पत्थर का हिसाब लेंगे’

मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रोटेम स्पीकर और बीजेपी के विधायक रामेश्वर शर्मा ने सोमवार को अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, ‘उपद्रवियों से एक-एक पत्थर का हिसाब लिया जायेगा। किसी भी को भी बख्शा नहीं जायेगा। हिंसा फैलाने और शांति भंग करने वालों की खबर शिवराज मामा का बुल्डोज़र लेगा।’

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