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बेंगलुरु: गणेश चतुर्थी के चलते 31 अगस्त को नहीं बिकेगा मीट

बेंगलुरु: गणेश चतुर्थी के चलते 31 अगस्त को नहीं बिकेगा मीट

महानगर पालिका ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि बुधवार 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी है और इस वजह से जानवरों की हत्या और मीट बेचे जाने पर रोक रहेगी। 

बेंगलुरु महानगर पालिका ने गणेश चतुर्थी के चलते 31 अगस्त को बेंगलुरु में मीट बिकने और पशुओं के वध पर रोक लगा दी है। यह आदेश महानगर पालिका के पूरे क्षेत्र में लागू होगा। इस साल अप्रैल में रामनवमी के दौरान भी महानगर पालिका ने एक सर्कुलर जारी कर मीट की बिक्री पर रोक लगा दी थी। 

इससे पहले गांधी जयंती और महाशिवरात्रि पर भी मीट की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश महानगर पालिका की ओर से दिया गया था। 

महानगर पालिका ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि बुधवार 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी है और इस वजह से जानवरों की हत्या और मीट बेचे जाने पर रोक रहेगी। 

दिल्ली में हुआ था विवाद

इस साल दक्षिणी दिल्ली के महापौर द्वारा नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों को बंद किए जाने की मांग के दौरान विवाद हुआ था। महापौर ने नगर निगम के आयुक्त को पत्र लिखकर कहा था कि नवरात्रि के दौरान 2 अप्रैल से 11 अप्रैल तक मीट की दुकानों को बंद रखा जाए। इसे लेकर दिल्ली में बीजेपी और विपक्षी दलों के नेता आमने-सामने आ गए थे। 

इस विवाद का असर दक्षिणी दिल्ली की आईएनए मार्केट में भी दिखाई दिया था। यहां मीट की दुकानों को बंद रखना पड़ा था और इस वजह से होटलों को होने वाली मीट की सप्लाई पर असर पड़ा था।

पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा था कि नवरात्रि के दौरान देश भर में सभी जगहों पर मीट की दुकानों को बंद किया जाना चाहिए लेकिन टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें जवाब दिया था और कहा था कि भारत का संविधान उन्हें जब वह चाहें मीट खाने की इजाजत देता है और उसी तरह दुकानदारों को भी उनका व्यापार करने की आजादी देता है।

उत्तर प्रदेश में भी इस बार कई जगहों पर नवरात्रि और कांवड़ के दौरान मीट की दुकानों को बंद रखा गया था। 

बीते साल दक्षिण दिल्ली नगर निगम की ओर से मीट विक्रेताओं को जब दुकान के बाहर झटका और हलाल लिखा हुआ बोर्ड लगाने को कहा गया था तब भी खासा विवाद हुआ था।

मुंबई में हुआ था विरोध

यहां याद दिलाना होगा कि कुछ साल पहले मुंबई में मीट की दुकानों को बंद किए जाने को लेकर खासा हंगामा हुआ था। मुंबई में तब जैन धर्म के लोगों ने कहा था कि पर्यूषण पर्व के दौरान मीट की दुकानों को बंद रखा जाना चाहिए। राज्य सरकार ने उनकी इस मांग को मान लिया था लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था और मीट विक्रेताओं से कहा था कि वह अपनी दुकानें बंद नहीं करें। 

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