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महाराष्ट्र मुद्दे पर भारी हंगामे से संसद की कार्यवाही कल दोपहर तक स्थगित

महाराष्ट्र मुद्दे पर भारी हंगामे से संसद की कार्यवाही कल दोपहर तक स्थगित

महाराष्ट्र में चल रही सियासी उठापटक को लेकर संसद में भी इस मुद्दे पर ज़बर्दस्त हंगामा हुआ। विपक्षी दलों द्वारा शोर-शराबे और नारों की गूँज के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही को मंगलवार दोपहर दो बजे तक स्थगित करना पड़ा है।

महाराष्ट्र में चल रही सियासी उठापटक को लेकर संसद में भी इस मुद्दे पर ज़बर्दस्त हंगामा हुआ। विपक्षी दलों द्वारा शोर-शराबे और नारों की गूँज के बीच लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही को मंगलवार दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा है। इससे पहले भी दोनों सदनों में कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था। लेकिन दोपहर दो बजे जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भी हंगामा नहीं थमा। दोनों सदनों में विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र में ‘ग़लत’ तरीक़े से बीजेपी द्वारा सरकार बनाए को लेकर आरोप लगाया कि ‘लोकतंत्र की हत्या’ की जा रही है। इसी मुद्दे पर संसद भवन परिसर में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस सदस्य हाथों में बैनर लिए चल रहे थे जिसपर लिखा था- 'लोकतंत्र की हत्या बंद करो'।

इससे पहले लोकसभा में विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रश्न काल के दौरान 'संविधान की हत्या बंद करो, बंद करो' के नारे लगाए। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा था। 'महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या' को लेकर कांग्रेस, आईयूएमएल, टीएमसी ने पहले ही स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था। 

राज्य सभा में भी जब सुबह कार्यवाही शुरू हुई तो महाराष्ट्र के मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा ज़बर्दस्त शोर-शराबा किया गया। नेताओं द्वारा लगातार की जा रही नारेबाज़ी के कारण पहले सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा था और बाद में अगले दिन यानी मंगलवार दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा है। 

इधर महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संकट को लेकर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की ओर से दायर संयुक्त याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई और मंगलवार को फ़ैसला आना है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने को लेकर आमंत्रण देने के फ़ैसले का विरोध किया गया है। इन दलों की ओर से आरोप लगाया गया है कि महामहिम राज्यपाल ने भेदभावपूर्ण तरीक़े से काम किया है और राज्यपाल के पद का मज़ाक बना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में भी कहा गया है कि 22 और 23 नवंबर के बीच की रात राज्यपाल की कार्रवाई और 23 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह इस बात का उदाहरण है कि कैसे राज्यपाल केंद्र की सत्ता में बैठे राजनीतिक दल की ओर से काम कर सकते हैं। याचिका में माँग की गई थी कि महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए, देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के फ़ैसले को रद्द किया जाए। इसके अलावा याचिका में विधायकों की ख़रीद-फ़रोख्त को रोकने के लिए तुरंत शक्ति परीक्षण कराने का भी अनुरोध किया गया है।

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