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अमरनाथ यात्रा रोकी, पर्यटकों, श्रद्धालुओं से वापस जाने को कहा

अमरनाथ यात्रा रोकी, पर्यटकों, श्रद्धालुओं से वापस जाने को कहा

जम्मू-कश्मीर सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और राज्य में आने वाले पर्यटकों से कहा है कि वे जल्द से जल्द कश्मीर घाटी को खाली कर दें और वापस चले जाएँ।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और राज्य में आने वाले पर्यटकों से कहा है कि वे घाटी से वापस चले जाएँ। राज्य सरकार ने इस बारे में एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमलों के इनपुट को देखते हुए और कश्मीर में यात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनज़र यह सलाह दी जाती है कि वे घाटी में न रुकें और जल्द से जल्द वापस चले जाएँ। 

दरअसल, ख़ुफ़िया रिपोर्टों से इस बात की पुष्टि हुई है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन और उसकी सेना अमरनाथ यात्रा में दख़ल देने की कोशिश में जुटे हैं। सेना ने कहा है कि लंबे तलाशी अभियान के बाद यह जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही सेना को बारुदी सुरंग और पाकिस्तान की हथियार बनाने वाली फ़ैक्ट्री में बनी एम - 24 अमेरिकन स्नाइपर राइफ़ल भी मिली है। इसके बाद ही अमरनाथ यात्रा को रोकने का फ़ैसला किया गया है।

एडवाइजरी जारी किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर नाराजगी जताई है। उमर ने कहा कि क्या एक सरकारी आदेश से पर्यटक घाटी छोड़कर भागने लगेंगे 

बता दें कि सेना और पुलिस ने शुक्रवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कई अहम जानकारियाँ दीं है। चिनार कोर के लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा है कि कश्मीर में सेना की लगातार नजर बनी हुई है और हम हर हाल में शांति को बरकरार रखेंगे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि घाटी और जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी बनने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा कि पाकिस्तान की सेना लगातार अशांति फैलाने की कोशिशों में जुटी हुई है। लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा और किसी को भी शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बता दें कि कश्मीर में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती होने के कारण यह माना जा रहा है कि सरकार आतंकवादी संगठनों से कड़ाई से निपटना चाहती है। हालाँकि इसे राज्य में अनुच्छेद 35ए को हटाने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

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