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आडवाणी बोले, राजनीतिक विरोधियों को कभी राष्ट्र विरोधी नहीं कहा

आडवाणी बोले, राजनीतिक विरोधियों को कभी राष्ट्र विरोधी नहीं कहा

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने इशारों-इशारों में बीजेपी के मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने इशारों-इशारों में बीजेपी के मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य आडवाणी ने ब्लॉग लिखकर कहा है कि बीजेपी ने कभी भी अपने राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन नहीं माना। 

आडवाणी ने कहा कि जो भी लोग हमसे राजनीतिक तौर पर सहमत नहीं हैं, हमने उन्हें कभी ‘राष्ट्र विरोधी’ नहीं कहा। बता दें कि बीजेपी ने इस बार 91 वर्षीय आडवाणी का टिकट काट दिया है और उनकी जगह पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ रहे हैं। 

आडवाणी ने बीजेपी के स्थापना दिवस 6 अप्रैल से ठीक पहले लिखे ब्लॉग में कहा कि बीजेपी प्रत्येक देशवासी की व्यक्तिगत और राजनीतिक पसंद की स्वतंत्रता के पक्ष में रही है। आडवाणी के ब्लॉग का शीर्षक ‘पहले राष्ट्र, फिर दल और अंत में मैं' है।

आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा है कि वह भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी दोनों के संस्थापक सदस्य रहे हैं। आडवाणी ने लिखा कि 14 साल की उम्र में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए थे और लगभग सात दशक से पार्टी के साथ अविभाज्य रूप से जुड़े हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और कई अन्य महान, प्रेरणादायक नेताओं के साथ काम करने का मेरा सौभाग्य रहा है। उन्होंने गुजरात के गाँधीनगर के लोगों का शुक्रिया अदा किया जहाँ से वह छह बार सांसद रहे। 

आडवाणी ने लिखा है कि 6 अप्रैल को बीजेपी अपना स्थापना दिवस मनाएगी। इस मौक़े पर हम सभी को अतीत में, भविष्य में देखने के साथ ही अपने भीतर भी झाँकना चाहिए।

टिकट न देने के साथ ही बीजेपी ने इस बार आडवाणी को स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी जगह नहीं दी थी। टिकट कटने के साथ ही यह माना गया कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार में आडवाणी युग का औपचारिक तौर पर समापन हो गया है। आडवाणी दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के साथ ही गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री पद पर भी रहे। 

पिछले कुछ सालों में कई बार ऐसी तस्वीरें सामने आईं जब आडवाणी प्रधानमंत्री मोदी के सामने याचक की मुद्रा में खड़े दिखाई दिए। दरअसल, मोदी और आडवाणी का रिश्ता 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी की दावेदारी के बाद से ही ख़राब हो गया था और उसके बाद यह कभी नहीं सुधरा। माना जा रहा था कि मोदी, आडवाणी को राष्ट्रपति बनाने के लिए उनके नाम का समर्थन करेंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।

कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी ख़ूब वायरल हुआ था जिसमें एक जनसभा के मंच पर मोदी क़तार में खड़े पार्टी के बाक़ी नेताओं से तो मिलते हैं लेकिन आडवाणी की ओर देखते तक नहीं। वीडियो में साफ़ दिखता है कि आडवाणी याचक की तरह हाथ जोड़े खड़े रह जाते हैं लेकिन मोदी उन पर ध्यान दिए बिना ही आगे निकल जाते हैं। 

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