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वरूण का बयान; कौन बना रहा लखीमपुर की घटना को हिंदू बनाम सिख?

वरूण का बयान; कौन बना रहा लखीमपुर की घटना को हिंदू बनाम सिख?

बीजेपी सांसद वरूण गांधी इस चिंता की ओर सरकार का ध्यान दिला रहे हैं कि लखीमपुर की घटना को हिंदू बनाम सिख करने की कोशिश की जा रही है। 

लखीमपुर खीरी की घटना के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाकर बीजेपी को असहज करने वाले सासंद वरूण गांधी ने नई चिंता की ओर ध्यान दिलाया है। वरूण ने ट्वीट कर कहा है कि लखीमपुर खीरी की घटना को हिंदू बनाम सिख बनाने की कोशिश की जा रही है। 

उन्होंने इसे न सिर्फ़ अनैतिक बताया है बल्कि यह भी कहा है कि यह उन जख़्मों को फिर से हरा करने की कोशिश है, जिन्हें भरने में एक पूरी पीढ़ी लग गई। उन्होंने चेताते हुए कहा है कि हमें तुच्छ राजनीतिक फ़ायदे को राष्ट्रीय एकता से ऊपर नहीं रखना चाहिए। 

वरूण गांधी किस ओर इशारा कर रहे हैं? वरूण साफ कहना चाहते हैं कि कुछ लोग किसान आंदोलन की आड़ में हिंदू बनाम सिखों की लड़ाई करवाकर देश में तनाव फैलाना चाहते हैं। 

यहां ये याद दिलाना होगा कि जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, बीजेपी के कई नेता किसानों को खालिस्तानी, देशद्रोही बता चुके हैं। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने तो उन्हें मवाली बता दिया था।

आंदोलन में सिख आगे

भले ही देश में आज की तारीख़ में किसान आंदोलन बहुत बड़ा रूप ले चुका हो। लेकिन इसकी क़यादत पंजाब के हाथों में ही है। कृषि क़ानूनों को लेकर आंदोलन पंजाब से ही शुरू हुआ और उसके बाद यह हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में मजबूत होता गया। इसके अलावा भी कई राज्यों में किसानों को समर्थन मिला। 

पंजाब के इस आंदोलन में आगे होने की वजह से इसमें सिखों की संख्या अच्छी-खासी है। लखीमपुर खीरी की घटना में मारे गए चारों किसान सिख ही हैं। ऐसे में सिखों के बीच भी इस घटना को लेकर जबरदस्त नाराज़गी है। 

यहां ध्यान देना होगा कि सोशल मीडिया के जरिये किसान आंदोलन दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। सिख लगातार मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। सरकारी जुल्म के कारण भी सिख बीजेपी से बुरी तरह नाराज़ हैं।

हिंदू बनाम मुसलमान 

सीएए आंदोलन के दौरान जिस तरह बीजेपी के नेताओं ने शाहीन बाग को तौहीन बाग कहा, मुसलमानों के ख़िलाफ़ कई तरह के आपत्तिजनक बयान बीजेपी के नेताओं की तरफ़ से आए, उससे साफ था कि इस आंदोलन को हिंदू बनाम मुसलमान करने की पूरी कोशिश की गई। 

लेकिन अब वरूण गांधी जिस ओर इशारा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि यह बेहद ख़तरनाक है, उसे भी भारत सरकार को समझना चाहिए। 

दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसान आंदोलन शुरू होते ही पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह दिल्ली आकर गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक बताया था।

आईएसआई की भूमिका 

यह मजबूत तथ्य है कि पड़ोसी मुल्क़ पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई लगातार सिखों को हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ भड़काती रहती है। लेकिन हमारे मुल्क़ में मौजूद दक्षिणपंथियों की किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्ट्स देखिए, उनकी भी यही कोशिश है कि हिंदुओं को सिखों के ख़िलाफ़ भड़का दिया जाए। 

वे जानते हैं कि 2 फ़ीसदी सिखों के कारण ऐसा करके उन्हें कोई राजनीतिक नफ़ा नहीं होगा लेकिन मोदी सरकार के विरोध में उठने वाली हर आवाज़ को देश के ख़िलाफ़ गद्दारी बताने का उनका काम इस बहाने ही सही, चालू तो रहेगा। 

बीजेपी में पढ़े लिखे और समझदार माने जाने वाले सांसदों में वरूण गांधी का नाम शुमार है। 

अगर वरूण इस ओर ध्यान दिला रहे हैं तो देश के गृह मंत्रालय को ऐसे लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिए जो देश के लिए अन्न उगाने वालों, सरहदों पर हिंदुस्तान की हिफ़ाजत करने वाले परिवारों के बच्चों-बुजुर्गों को खालिस्तानी बताकर दो समुदायों को लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

1984 के सिख विरोधी दंगे

वरूण का इशारा 1984 के सिख विरोधी दंगों की ओर भी है, जिसे आज भी हिंदुस्तान का आम सिख भूल नहीं पाया है। किसान आंदोलन के बाद जिस तरह सिखों को बदनाम किया जा रहा है, वह निश्चित रूप से राष्ट्र की एकता को कमजोर करता है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि इसमें वही लोग शामिल हैं, जो ख़ुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताते नहीं थकते हैं। 

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