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4000 शहरों में लगातार पाँचवीं बार ऐसे नंबर वन स्वच्छ शहर बना इंदौर

4000 शहरों में लगातार पाँचवीं बार ऐसे नंबर वन स्वच्छ शहर बना इंदौर

स्वच्छता के मामले में जो इंदौर शहर 2016 में 25वें स्थान पर था वह आख़िर नंबर वन कैसे बना? जानिए, इंदौर शहर ने सीमित संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया और कैसे वह लगातार नंबर वन बना हुआ है।

देश के 4000 शहरों में मध्य प्रदेश के व्यावसायिक नगर इंदौर ने एक बार फिर नंबर वन स्वच्छ शहर का खिताब हासिल कर लिया। लगातार पाँचवीं बार भारत के सबसे साफ़-सुथरे शहर बनने का ताज इंदौर के सिर सजने के कारणों की समीक्षा देश के उन शहरों ने पुनः शुरू कर दी है जो इस खिताब की दौड़ में शामिल थे।

केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 2016 से शुरू किए गए देश के सबसे स्वच्छ शहरों के सर्वेक्षण में मैसूर पहले पायदान पर रहा था। इंदौर को 25वाँ स्थान हासिल हुआ था। इंदौर ने 2016 के बाद शहर को सबसे साफ़-सुथरा बनाने की जबरदस्त मुहिम छेड़ी। बेहद सख्ती के साथ-साथ संसाधन जुटाये। नवचार किये। नगर निगम कर्मचारियों में वर्क कल्चर पैदा किया। शहरवासियों को कर्त्तव्य के निर्वहन का बोध कराते हुए सफ़ाई में साथ देने का आदि बनाया।

साल भर में पक्ष में परिणाम आ गया। वर्ष 2017 के सबसे स्वच्छ शहरों वाले राष्ट्रीय सर्वेक्षण में इंदौर ने पहले पायदान को हासिल कर लिया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। इंदौर ने 2018, 2019, 2020 और अब 2021 में भी भारत के सबसे स्वच्छ शहर अपने माथे पर सजाये रखने के सिलसिले को बरकरार रखा है। इंदौर को लगातार पाँचवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का पहला पुरस्कार प्रदान करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भरपूर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘नंबर वन तो कोई भी आ सकता है, लेकिन लगातार पांच बार नंबर वन आकर इंदौर ने बड़ा काम किया है।’

फाइव स्टार और 12 करोड़ मिले

नंबर वन आने पर इंदौर को फाइव स्टार और 12 करोड़ रुपयों के नकद पुरस्कार के साथ चमचमाती ट्रॉफी मिली है। इस पुरस्कार को लेकर शनिवार को जब इंदौर ज़िला प्रशासन और निगम के अफ़सरों के साथ जनप्रतिनिधि लौटे तो इनका शहरवासियों ने जोरदार स्वागत किया।

शानदार उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी खास अंदाज में इंदौर की सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अरे वाह भिया, छा गया अपना इंदौर फिर से, इंदौर अद्भुत है, गजब है। धन्य हैं इंदौर। इंदौर की जनता, जिन्होंने इंदौर को लगातार 5वीं बार स्वच्छता में शीर्ष पर बनाए रखा।’

इंदौर से सीखें- शहर को कैसे स्वच्छ बनाएँ 

पहले पायदान को हासिल करने और लगातार पाँचवें साल इसे बरकरार रखने के पीछे बेहद सख़्त नियम-क़ायदों का होना है। शहर में गंदगी फैलाने वालों पर एक लाख रुपए तक स्पॉट फाइन किया जाता है। थूकने, खुले में शौच या पेशाब करने पर 100 से 500 रुपए तक का जुर्माना है। शहर में 172 पब्लिक और 125 कम्युनिटी टॉयलेट बनाए गए हैं। वहाँ दिन में चार बार सफ़ाई होती है।

स्वच्छता मुहिम शुरू करते समय शहर भर के पान-ठेले वालों को सख़्त हिदायत दी गई कि अगर उनकी दुकानों के बाहर किसी तरह का कचरा, पान की पीक या रैपर नज़र आए तो जुर्माना होगा। लाखों रुपये के चालान किए।

असर यह हुआ कि पान ठेले और खान-पान की दुकान एवं खोमचे वालों ने साफ़-सफ़ाई को अपनी रोजी का हिस्सा बना लिया। सहयोग करने से कचरा समस्या समाप्त हो गई। शहरवासियों ने भी खुले में शौच या पेशाब करने और इधर-उधर थूकना बंद कर दिया। 

सफ़ाई कर्मचारियों की ड्यूटी 

मुहिम छेड़ते समय संसाधनों की सूची बनाई तो सामने आया कि निगम में पदस्थ 70-75 प्रतिशत स्टाफ ड्यूटी से ग़ायब रहता है। सख्ती शुरू की गई। लगभग 700 नियमित और अस्थायी कर्मचारियों को या तो निलंबित किया अथवा नौकरी से निकाला। इससे खौफ़ पैदा हुआ। वे समझ गए काम करेंगे तो ही नौकरी बचेगी। अच्छा काम करने वालों को नियमित करने का प्रस्ताव दिया गया। बात बन गई। वर्क कल्चर में कर्मचारी ढल गए।

कंडम घोषित वाहनों को कबाड़े से निकाला

निगम प्रबंधन के पास 700 के लगभग वाहन हैं। इनमें से अधिकांश को कंडम घोषित कर गैराज में पटक दिया गया था। मुहिम छेड़ने के दौरान 200 को गैराज से बाहर निकाला। दुरुस्त कराया। काम शुरू किया। बात बनी तो धीरे-धीरे सभी वाहनों का उपयोग करते चले गये। वाहनों की कमी दूर हो गई।

कचरा पेटी मुक्त बनाया शहर को

नगर निगम ने शहर से कचरा पेटियां हटाने का कड़ा निर्णय लिया। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन मॉडल लागू किया। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित किया जाने लगा। नगर निगम की गाड़ियाँ दिन में दो बार कचरा लेने लोगों के घरों और दुकानों तक जाने लगीं। शहर की सफाई के लिए निगम कर्मचारियों को तीन शिफ्ट में ड्यूटी पर लगाया गया।

कचरा इकट्ठा करने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाया गया। कचरे से पॉलिथिन अलग की जाने लगी। बचे अपशिष्ट पदार्थों से खाद बनाया जाने लगा। जबकि पन्नियों का उपयोग सड़क के निर्माण के लिए किए जाने की शुरुआत की।

वेस्ट मैनेजमेंट का सही तरीक़े के इस्तेमाल से 31 मार्च को ख़त्म वित्तीय वर्ष 2019-20 में गीले और सूखे कचरे के प्रसंस्करण से शहरी निकाय की कमाई 50 फ़ीसदी बढ़कर क़रीब छह करोड़ रुपये पर पहुँच गयी। साल 2018-19 में कचरा प्रसंस्करण से इंदौर नगर निगम ने लगभग चार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था।

कचरे से सालाना कमाई 20 करोड़

इंदौर नगर निगम कचरे से अभी 20 करोड़ रुपए सालाना कमा रहा है। इसमें कार्बन क्रेडिट, कम्पोस्ट खाद, वेस्ट और सूखे कचरे से हो रही आमदनी शामिल है। जानकारों का मानना है कि जिस तेजी के साथ इंदौर कचरा प्रबंधन पर काम कर रहा है, आने वाले तीन साल में ही कचरे से नगर निगम इंदौर की कमाई 100 करोड़ का आँकड़ा पार कर जाएगी।

500 किलोमीटर सड़क रोज़ साफ़ होती है

इंदौर की साफ़-सफ़ाई के लिए अब 7 हजार के क़रीब कर्मचारियों की लंबी फौज है। इनमें 60 प्रतिशत महिलाएँ हैं। तीन पालियों में सफाई में इन्हें लगाया गया है। रात के समय मशीनों से सड़कें चकाचक की जाती हैं। हर रात लगभग 500 किलोमीटर क्षेत्र में मशीनों के जरिये इंदौर नगर निगम शहर की सड़कें साफ करवाता है।

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