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भारत-चीन के सैनिकों के बीच अब अरुणाचल में झड़प

भारत-चीन के सैनिकों के बीच अब अरुणाचल में झड़प

भारत-चीन संबंधों में जो थोड़ा बहुत सुधार हुआ है क्या वह चीन का दिखावा मात्र है? अरुणाचल प्रदेश में नियंत्रण रेखा के पास बड़ी संख्या में चीनी सैनिक क्यों आए? जानिए क्या हुआ झड़प में। 

भारत-चीन के बीच अगले महीने होने वाली कोर कमांडर स्तर की बातचीत से पहले दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए। ताज़ा मामला अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा क्षेत्र का है। भारतीय और चीनी सैनिक पिछले हफ्ते तब आमने सामने आ गए जब अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के क़रीब लगभग 200 चीनी ​​सैनिकों को रोका गया। इस घटनाक्रम से अब सवाल खड़े होते हैं कि पिछले साल लद्दाख क्षेत्र में झड़प के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों का क्या कोई नतीजा नहीं निकला है?

इस दिशा में सैन्य ही नहीं, राजनीतिक स्तर पर भी कई दौर की बातचीत के बाद भारत-चीन संबंधों में जो थोड़ा बहुत सुधार हुआ था उसको अब धक्का लगता दिख रहा है। ऐसा इसलिए कि जब भी रिश्ते सुधरने के हालात बनते दिखते हैं तब चीनी सैनिक कोई न कोई बखेड़ा खड़ा करते नज़र आते हैं। कभी लद्दाख में तो कभी अरुणाचल प्रदेश में।

ताज़ा मामला अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से के पास का है। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प एक नियमित गश्त के दौरान हुई। मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय सैनिकों ने सीमा के क़रीब क़रीब 200 चीनी सैनिकों को रोका। एक अधिकारी ने कहा, जैसा कि ऐसे मामलों में होता है, सैनिकों के बीच कुछ धक्का-मुक्की हुई, लेकिन हालात को नियंत्रण में कर लिया गया।

दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडरों के बीच बातचीत कुछ घंटों तक चली और मौजूदा प्रोटोकॉल के अनुसार इसे सुलझा लिया गया। रिपोर्ट है कि इस दौरान भारतीय सुरक्षा बलों को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि चूँकि भारत-चीन सीमा का औपचारिक रूप से सीमांकन नहीं किया गया है और इसलिए वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की धारणाओं में अंतर है।

सरकारी अधिकारियों ने इस घटना को कमतर आंकते हुए कहा कि तवांग सेक्टर में ऐसी घटनाएँ होती रही हैं। लेकिन इस बार दोनों पक्षों के बीच ऐसा आमना-सामना लंबे समय के बाद हुआ है। 2016 में भी इसी तरह की घटना हुई थी।

अरुणाचल से सटी सीमा की यह घटना लद्दाख गतिरोध के समाधान पर चर्चा के लिए कोर कमांडर स्तर की 13वें दौर की वार्ता से पहले हुई है। अधिकारियों ने कहा कि वार्ता अगले कुछ दिनों में होने की उम्मीद है।

पूर्वी लद्दाख में 17 महीने से गतिरोध चला आ रहा है। 31 जुलाई को आखिरी दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्ष गोगरा पोस्ट इलाक़े से पेट्रोलिंग प्वाइंट 17ए से हट गए थे। वार्ता में यह सफलता तब हाथ लगी थी जब दोनों पक्ष फ़रवरी में पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से अपने सैनिकों और टैंकों को वापस हटा लिया था। 

इस बीच भारत ने गुरुवार को ही कहा है कि उसे उम्मीद है कि चीन द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल पर कायम रहते हुए पूर्वी लद्दाख की सीमाओं के साथ शेष मुद्दों के शीघ्र समाधान की दिशा में काम करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने दोहराया है कि चीनी पक्ष द्वारा भड़काऊ व्यवहार और एकतरफा कार्रवाई से क्षेत्र में शांति भंग हुई है। चीनी पक्ष द्वारा घुसपैठ की ख़बरों के बारे में पूछे जाने पर बागची ने कहा कि वह इस तरह के सैन्य पहलुओं पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं और रक्षा मंत्रालय इस पर विचार करने में सक्षम होगा।

 - Satya Hindi

फाइल फोटो।

बहरहाल, हाल के दिनों में जो घटनाक्रम चले हैं वे कड़वाहट को भूलने की कोशिश को धक्का देने वाले हैं। पिछले महीने चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने इलाक़े में सैनिकों के रहने के लिए अस्थायी घर बनाए हैं। ये घर कंटेनरों में बनाए गए हैं, जिन्हें आसानी से और बहुत ही कम समय में जोड़ कर तैयार किया गया है। लेकिन आपातकालीन स्थिति में इन्हें सामान्य सैनिक क्वार्टर की तरह काम में लाया जा सकता है। चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के उस पार कराकोरम दर्रा में वहाब ज़िल्गा से लेकर उत्तर में हॉट स्प्रिंग्स, पिऊ, चांग ला, ताशीगांग, मान्ज़ा और चुरुप तक ये कंटेनर लगा रखे हैं।

इसको लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कड़े शब्दों में कहा था कि चीनी सेना ने भारत-चीन सीमा पर स्थिति को बदलने के लिए एकतरफा और उकसावे वाली कार्रवाइयाँ की हैं, जिससे तनाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा था कि चीन ने एलएसी पर सैनिकों और साजो-सामान का बहुत बड़ा जखीरा इकट्ठा कर रखा है, मजबूरन भारत को भी ऐसा करना पड़ा है। 

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