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जिस देश में दुनिया का वन्यजीव संरक्षण केंद्र वहाँ 100 टाइगर लापता कैसे हुए?

जिस देश में दुनिया का वन्यजीव संरक्षण केंद्र वहाँ 100 टाइगर लापता कैसे हुए?

भारत के सबसे बड़े वन्यजीव संरक्षण केंद्र में 100 बाघों के लापता होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वन्यजीव संरक्षण की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच और जवाबदेही की मांग तेज।

जिस देश में अनंत अंबानी के वनतारा को वन्य जीवों को बचाने का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बताया जा रहा है, उसी देश में बाघों की संख्या ख़तरनाक़ स्तर तक कम होती जा रही है। इसके लिए सिर्फ़ प्राकृतिक वजहें ही ज़िम्मेदार नहीं हैं, बल्कि एक संगठित तस्करी नेटवर्क की साज़िश बड़ी वजह है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क ने 2022 से अब तक '100 से लेकर अनगिनत' बाघों को मार दिया है। इस नेटवर्क ने डिजिटल भुगतान, हवाला फंड्स और नेपाल-म्यांमार की अलग-अलग सप्लाई लाइनों का इस्तेमाल कर पूरे देश में अपना जाल फैलाया है। रिपोर्ट के अनुसार पांच राज्यों के जांचकर्ताओं, चार केंद्रीय एजेंसियों और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में इस साल अब तक दर्जनों गिरफ्तारियां हुई हैं।

पुराने तौर तरीकों वाले शिकारियों की छवि अब पुरानी हो चुकी है। पहले जहाँ गरीब शिकारी, बस्तियों में सौदे तय करने वाले दलाल और छोटे शहरों के तस्करी से जुड़े लोग पॉलीथिन की थैलियों में बाघों की खाल और हड्डियाँ ट्रेन-बसों से ले जाते थे, वहीं अब यह नेटवर्क तेज, चुस्त और तकनीक-संपन्न हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस ने गिरफ्तारी रिकॉर्ड, कोर्ट दस्तावेज और वन अधिकारियों, जांचकर्ताओं व पूर्व शिकारियों से बातचीत के आधार पर पाया कि इस नेटवर्क में मध्यस्थों की संख्या कम कर दी गई है। पहले शिकारी रह चुके कई लोग अब मुखबिर बन गए हैं। इसके बजाय किराए के ट्रांसपोर्टरों का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें जोखिम कम हैं और माल को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। नशीले पदार्थों और हथियारों के सिंडिकेट्स के साथ गठजोड़ ने इसे और ख़तरनाक बना दिया है।

अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों और केंद्र की वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी की चल रही जांच में पिछले सात हफ्तों में एक दर्जन से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। यह नेटवर्क मुख्य रूप से म्यांमार सीमा के जरिए काम करता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो और राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई अलग-अलग सुरागों पर काम कर रहे हैं, वहीं प्रवर्तन निदेशालय ईडी को धन के लेन-देन की जांच के लिए शामिल किया गया है। 

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि कोविड के बाद के वर्षों में 7.5-8 करोड़ रुपये के भुगतान का पता चला है। जाँच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि यह 8-12 लाख रुपये प्रति बाघ के हिसाब से करीब 90 बाघों की हत्या को दिखाता है। नेपाल-तिब्बत मार्ग और अन्य तस्करी के मार्गों को भी जोड़ लें तो कुल नुक़सान 100 से लेकर अनगिनत तक हो सकता है। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गैर-बाघ जंगलों से तेंदुए की खाल और हड्डियों का व्यापार शामिल नहीं है।

भारत के 58 टाइगर रिज़र्व में से सिर्फ़ आठ में 100 या उससे ज़्यादा बाघ हैं। 2022 के ताज़ा राष्ट्रीय अनुमान के अनुसार, देश में कुल 3682 बाघ हैं। अख़बार ने इस नुक़सान की गंभीरता को समझने के लिए राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व की मिसाल दी है। यह इस जांच के दायरे से बाहर है। कोविड के बाद से रणथंभौर से 40 बाघ लापता हैं। वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. धर्मेंद्र खांडल के अनुसार, इनमें से आधे— 14 नर और 6 मादा के गायब होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि 'बुढ़ापा, प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा और अंतर-प्रजाति संघर्ष से क़रीब 20 बाघ मरे। बाक़ी कहां गए, पता नहीं।' उन्होंने बताया कि 2021 में राज्य ने रणथंभौर के आसपास की सामुदायिक निगरानी योजना बंद कर दी थी।

संगठित तस्करी नेटवर्क के खुलासे ने वन्य जीव संरक्षण के लिए लागू किए जाने वाले सिस्टम की खामियों को भी उजागर कर दिया है। सालों से टाइगर सेंसस पर निर्भर यह सिस्टम और कई अवैध शिकार विरोधी एनजीओ ढीले पड़ गए हैं और उस तरह की अब सतर्कता नहीं बरती जा रही है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि इस सिंडिकेट के दो प्रमुख नेताओं, सोनू सिंह बावरिया को जुलाई 2023 में महाराष्ट्र से और अजीत सियालाल परधी को जुलाई 2024 में मध्य प्रदेश से संदिग्ध शिकार के लिए गिरफ्तार किया गया था, लेकिन दोनों जमानत पर छूट गए। महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा, 'जमानत पर छूटने के बाद अजीत रडार से गायब हो गया। सोनू को छह महीने तक कई एजेंसियां ट्रैक कर रही थीं, फिर भी वह सबको चकमा देता रहा। कभी-कभी वह मुखबिर बनकर प्रतिस्पर्धियों को खत्म करता था।'

वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए डब्ल्यूसीसीबी नाम की विशेष इकाई है। अगस्त 2022 से आईपीएस अधिकारी तिलोत्तमा वर्मा के जाने के बाद इसके पास कोई समर्पित प्रमुख नहीं है। डब्ल्यूसीसीबी के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने जवाब नहीं दिया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रमुख जी.एस. भारद्वाज ने कहा, 'पिछले कुछ हफ्तों में हमने सक्रिय कदम उठाए हैं। एक बहु-एजेंसी विशेष जांच समूह बनाया गया है, और एनटीसीए रोजाना राज्यों के साथ जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है।'

नई पीढ़ी के शिकारी: तकनीक और हवाला का खेल

द इंडियन एक्सप्रेस ने नागपुर के सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि ये शिकारी 'पीढ़ियों से इस धंधे में हैं, लेकिन ये अपने पिता की तरह मध्यस्थों पर निर्भर नहीं हैं। सूत्र ने कहा, 'वे इंटरनेट के जानकार हैं, सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद बैंक खाते चलाना, ऑनलाइन भुगतान ट्रैक करना और फ्लाइट टिकट बुक करना उनके लिए आसान है। एक जांचकर्ता ने बताया, 'उन्होंने मध्यस्थों को ट्रांसपोर्ट सेवाओं से बदल दिया। खाल और हड्डियां पूर्वोत्तर तक ले जाने के बजाय, वे भंडारण सुविधा वाले ट्रांसपोर्टर से माल बुक करते हैं। फिर ट्रेन या फ्लाइट से गुवाहाटी पहुंचते हैं, सामान लेते हैं, शिलांग जाते हैं और डिलीवरी करते हैं।'

रिकॉर्ड और अधिकारियों के साक्षात्कार से पता चलता है कि यह तस्करी का यह "वर्टिकल" रूट कोविड के बाद शुरू हुआ, जब हरियाणा के पिंजौर से सोनू बावरिया और मध्य प्रदेश के कटनी से अजीत परधी ने हाथ मिलाया। सोनू कुशल समन्वयक था, जबकि अजीत का कबीला 'जॉ ट्रैप' में माहिर था। यह गठजोड़ मेघालय और मिजोरम के मध्यस्थों के जरिए म्यांमार तक बाघों के अंग पहुंचाता था, जहां से वे चीन के रुइली व्यापार केंद्र, वियतनाम के हेकौ सीमा या लाओस के मेंगला सीमा तक जाते थे। हवाला के ज़रिए मेघालय और मिजोरम से पैसा 13 अन्य राज्यों— असम, बिहार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक पहुंचा। उत्तरी राज्यों से माल पारंपरिक नेपाल मार्ग से जाता था।

म्यांमार: नया पसंदीदा रास्ता

हैरानी की बात यह है कि अन्य क्षेत्रों से माल मुख्य रूप से म्यांमार के रास्ते गुवाहाटी, शिलांग, मणिपुर के चुराचांदपुर जिले और मिज़ोरम के चम्फाई ज़िले से होकर जाता था। मणिपुर में अशांति के कारण मिज़ोरम का जोखावथार सीमा शहर पसंदीदा एग्ज़िट रूट बन गया है।

रिकॉर्ड के अनुसार, प्रमुख आरोपियों में लालनेसुंग (2015 में असम रेजिमेंट से रिटायर्ड) और कप लियान मुंग (असम राइफल्स का जवान) शामिल हैं। वह अपनी म्यांमारी मूल की पत्नी निंग सान लुन की मदद कर रहा था। निंग के फोन से बाघों और अन्य जानवरों की 500 से ज़्यादा तस्वीरें बरामद हुईं। रिकॉर्ड के मुताबिक, व्यवसायियों के सहयोगियों ने हवाला के जरिए ऐजोल में जमखान कप नामक स्थानीय ऑपरेटर को पैसा भेजा। जमखान को 2022 में ईडी ने तिरुपति से म्यांमार तक मानव बालों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। शिकारी ज़्यादातर जीरो-बैलेंस खाते इस्तेमाल करते थे, और पैसा 3 लाख रुपये की किश्तों में IMPS से ट्रांसफर होता था। अजीत परधी के परिवार के पास कटनी में बैंक ऑफ बड़ौदा और ICICI बैंक के खाते थे।

आगे की चुनौती

यह भी गौर करने वाली बात है कि भारत में बाघों को बचाया नहीं जा रहा है और दुनिया भर से वन्यजीवों को भारत लाया जा रहा है। पीएम मोदी ने महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत कई क़दम उठाए। केंद्र सरकार ने देश में चीतों को बसाने की कोशिशों के तहत दक्षिण अफ्रीका से 12 और नामीबिया से 8 चीते भारत मंगाए थे। उसमें से कई चीतों की मौत हो गई। पीएम मोदी ने हाल ही में वनतारा का दौरा किया था। इसको वन्य जीवों को बचाने का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बताया जा रहा है और दुनिया भर से जीवों को वनतारा लाया जा रहा है। वनतारा हाल में वनतारा सुर्खियों में रहा है।

लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट देश में वन्यजीवों की तस्करी पर कई सवाल उठाती है। यह जाँच न सिर्फ बाघों के संरक्षण के लिए ख़तरे को उजागर करती है, बल्कि सिस्टम की कमियों और तस्करी के नए तरीकों पर भी सवाल उठाती है। क्या यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म होगा, या यह फिर से नए रूप में उभरेगा? जवाब जांच के नतीजों और सख्त कदमों पर निर्भर है।

(इस रिपोर्ट का संपादन अमित कुमार सिंह ने किया है)

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