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भारत का घरेलू कर्ज जीडीपी के 40% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा: रिपोर्ट

भारत का घरेलू कर्ज जीडीपी के 40% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा: रिपोर्ट

5 ट्रलियिन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 'विश्व गुरु' बनने का सपना देखते-देखते कहीं लोग कर्ज के जाल में डूब न जाएं? जानिए, कर्ज की ताज़ा रिपोर्ट से क्या संकेत मिलते हैं। 

कर्ज के मामले में रिकॉर्ड बना है। मोतीलाल ओसवाल के एक विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में भारत का घरेलू ऋण जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद के 39.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट तो यह भी है कि बचत भी कम हो रही है। तो सवाल है कि आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या लोगों की आय कम हो रही है या फिर अर्थव्यवस्था में सामान की ख़पत कम हो रही है यानी मंदी जैसी स्थिति है?

कर्ज के इस स्तर पर बढ़ने से नयी चिंताएं होने लगी हैं। यह स्थिति चिंता का कारण है क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, घरेलू ऋण ऊंचा बना हुआ है और बचत कम है। चिंता की बात यह भी है कि जब कर्ज काफी बढ़ जाता है तो किसी देश की हालत क्या होती है, इसको श्रीलंका के हालात से समझा जा सकता है। हालाँकि श्रीलंका विदेशी कर्ज के तले दबा हुआ था और भारत के संदर्भ में यह रिपोर्ट घरेलू कर्ज को लेकर आई है। वैसे, भारत पर विदेशी कर्ज भी काफी ज़्यादा है।  

2022 के मध्य में श्रीलंका में कंगाली छा गई थी। वहाँ फ्यूल संकट के साथ ही, भोजन का संकट, अप्रत्याशित महंगाई और अर्थव्यवस्था चौपट हो गई थी। राजपक्षे ने चुनाव जीतने के बाद करों को कम किया। नतीजा सामने था। अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम राजस्व मिला और उस पर कर्ज बढ़ता गया। इसके बाद क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने श्रीलंका को डाउनग्रेड करना शुरू कर दिया। इससे बचने के लिए सरकार ने मुद्राएँ छापीं। इससे देश में बेतहाशा मुद्रास्फीति बढ़ी। खाने के सामान भी आयात करने पड़े और विदेशी मुद्रा भंडार खाली होता गया। हालाँकि भारत की अर्थव्यवस्था श्रीलंका से काफी अलग है, और वैसी स्थिति की संभावना फिलहाल तो बिल्कुल नहीं है, लेकिन ज्यादा कर्ज ख़राब स्थिति में पहुँचा सकता है। 

बहरहाल, अब भारत में कर्ज की स्थिति को लेकर चिंताएँ जताई जा रही हैं। भारत का घरेलू ऋण जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद का 39.1% है। यह वित्त वर्ष 2011 की चौथी तिमाही में 38.6% के पिछले सर्वोच्च स्तर से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में साल-दर-साल 16.5% की अनुमानित वृद्धि हुई और मुख्य रूप से गैर-आवासीय ऋण में तेज वृद्धि के कारण ऐसा हुआ। 

इसके अलावा शुद्ध वित्तीय बचत सकल घरेलू उत्पाद के 5% पर अपने सबसे निचले स्तर पर गिर गई है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए सितंबर 2023 में रिपोर्ट दी थी। इसके विपरीत, कॉर्पोरेट ऋण में मामूली वृद्धि हुई।

बैंकों द्वारा दिए जाने वाले असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण बढ़ रहे हैं, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक अग्रणी है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने यूबीएस सिक्योरिटीज, आरबीआई और क्रेडिट ब्यूरो विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया है कि दिसंबर 2023 तिमाही तक आईसीआईसीआई बैंक का असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण खंड में सबसे अधिक एक्सपोजर 13.8% है।

यह स्थिति चिंता का कारण है क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, घरेलू ऋण ऊंचा बना हुआ है और बचत कम है। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार अर्थशास्त्रियों ने बचत में तेज गिरावट के लिए, भले ही ऋण का स्तर ऊंचा बना हुआ है, कम आय और अर्थव्यवस्था में खपत में मंदी को जिम्मेदार ठहराया है।

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