+
कोरोना: देश में सामुदायिक संक्रमण हुआ या नहीं, इस हफ़्ते से 69 ज़िले में सर्वे

कोरोना: देश में सामुदायिक संक्रमण हुआ या नहीं, इस हफ़्ते से 69 ज़िले में सर्वे

देश में कोरोना वायरस इसके तीसरे चरण यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में पहुँचा या नहीं, इसके लिए पूरे देश भर में रैंडम सर्वे किया जाएगा। 

देश में कोरोना वायरस इसके तीसरे चरण यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में पहुँचा या नहीं, इसके लिए पूरे देश भर में रैंडम सर्वे किया जाएगा। इंडियन काउंसिल फ़ोर मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर यह सर्वे करेगा। यह तीसरा चरण काफ़ी ख़तरनाक होता है और इसमें मामले काफ़ी तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। मोटे तौर पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन या सामुदायिक संक्रमण का मतलब है कि कोरोना की पुष्टि ऐसे लोगों में होने लगे जो न तो विदेश से लौटा हो और न ही किसी जानकार पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आया हो। यानी इस चरण में संक्रमण फैलाने वाले व्यक्तियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है और इस कारण यह स्थिति ख़तरनाक होती है।

कोरोना वायरस के फैलने के स्तर को मापने के लिए चार चरण चिन्हित किए गए हैं। ये चार चरण हैं-

  • पहला चरण, दूसरे देश से संक्रमित केस आया हो। 
  • दूसरा चरण, स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैला हो।
  • तीसरा चरण, कम्युनिटी ट्रांसमिशन यानी बिना किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए वायरस फैला हो। 
  • और चौथा चरण, संक्रमण महामारी का रूप ले ले।

देश में कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए आईसीएमआर को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसने अभी तक यह माना है कि भारत में कोरोना का संक्रमण तीसरे चरण में नहीं पहुँचा है और अब इसकी पड़ताल करने के लिए इसी हफ़्ते रैंडम सर्वे करने का फ़ैसला लिया है। यह सर्वे दस दिनों तक चलेगा। 

यह सर्वे 21 राज्यों के 69 ज़िलों में किया जाएगा और हर ज़िले से 400 सैंपल लिए जाएँगे जिसमें हर परिवार से एक सैंपल शामिल होगा। यानी इसमें 24 हज़ार लोगों के सैंपल लिए जाएँगे।

आईसीएमआर ने सामुदायिक संक्रमण की स्थिति जानने के लिए पहले भी सर्वे किये थे। इसने रैंडम तरीक़े से यानी जहाँ-तहाँ से एक मार्च से लेकर 15 मार्च तक 1020 सैंपल लिए थे। ये वे लोग थे जिनमें गंभीर साँस की बीमारियों, न्यूमोनिया और इन्फ्लूएंज़ा जैसे लक्षण थे। तब इसने कहा था कि सामुदायिक संक्रमण नहीं हुआ है। लेकिन 14 मार्च के बाद इस नीति में बदलाव लाया गया कि रैंडम तरीक़े से ही नहीं, बल्कि गंभीर साँस की बीमारियों वाले सभी मरीजों का कोरोना टेस्ट होगा। इन रिपोर्टों में कई लोगों की रिपोर्टें पॉजिटिव आई थीं। 15 मार्च से 21 मार्च के बीच गंभीर साँस की बीमारियों, न्यूमोनिया और इन्फ्लूएंज़ा के 106 मरीजों में से दो मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। इसी तरह 29 मार्च से दो अप्रैल के बीच 2069 मरीजों में से 54 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई थी। 

इसने अप्रैल में भी एक सर्वे की योजना बनाई थी। 'एनडीटीवी' की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में ही आईसीएमआर ने देश भर के 80 ज़िलों में रैंडम सर्वे की योजना बनाई थी। उस दौरान भी तय किया गया था कि हर ज़िले से 400 सैंपल लिए जाएँगे। इस सैंपल के लिए चीन से आयात की गई एंटी बॉडी किट का इस्तेमाल करना तय हुआ था। लेकिन उस सर्वे को इसलिए टाल दिया गया क्योंकि चीन से आयातित किट सही नहीं निकली थीं। 

आधिकारिक तौर पर भारत अभी दूसरे चरण में है। अब इस ताज़ा सर्वे से पता चलेगा कि भारत तीसरे चरण में पहुँचा है या नहीं।

सत्य हिंदी ऐप डाउनलोड करें