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पंजाब: बेअदबी कांड में गुरमीत राम रहीम की नामजदगी, राजनीतिक दलों में हड़कंप 

पंजाब: बेअदबी कांड में गुरमीत राम रहीम की नामजदगी, राजनीतिक दलों में हड़कंप 

डेरा सच्चा सौदा सिरसा और इसके मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह का नाम अब नए विवाद में सामने आया है। 

बहुचर्चित डेरा सच्चा सौदा सिरसा और इसके मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह का नाम अब नए विवाद में सामने आया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी कांड में पंजाब पुलिस की एसआईटी ने डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह को मुख्य साजिशकर्ता करार देते हुए उसे बाकायदा एफआईआर में नामजद किया है। साथ ही डेरे की राष्ट्रीय कमेटी के तीन प्रमुख सदस्यों हर्ष धूरी, संदीप बरेटा व प्रदीप कलेर को भी नामजद किया गया है। 

डेरा मुखी बलात्कार और हत्या के मामलों में हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल में सख्त उम्र कैद की सजा काट रहा है। 

सियासतदान भी आएंगे मुश्किल में 

इस अति संवेदनशील मामले में डेरा मुखी पर नया केस दर्ज करने वाली पंजाब पुलिस की एसआईटी टीम के प्रभारी डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा के अनुसार, गुरमीत राम रहीम को प्रोटेक्शन वारंट पर लाकर गहन पूछताछ की जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि डेरा मुखी एक और बेहद संवेदनशील तथा संगीन मामले में उलझेगा। लेकिन इस बार उसके साथ-साथ सूबे के कुछ दिग्गज सियासतदान भी लपेटे में आएंगे। 

शिरोमणि अकाली दल के चंद बड़े नेताओं से गुरमीत राम रहीम की नज़दीकियां हैं, जो कभी जगजाहिर थीं। 

बलात्कार, हत्या और अन्य कई विवादास्पद मामलों में फंसने के बाद अकाली और बीजेपी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर गुरमीत राम रहीम से दूरी बना ली लेकिन भीतर ही भीतर वे उससे जुड़े रहे।

गुरमीत से 'वोट का रिश्ता' 

गुरमीत राम रहीम सिंह से अकाली-बीजेपी गठबंधन का वास्तव में 'वोट का रिश्ता' रहा है। वक्त-वक्त पर डेरा सच्चा सौदा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में कभी कांग्रेस, कभी अकालियों तो कभी बीजेपी का समर्थन करता रहा है। पंजाब और हरियाणा के कुछ विधानसभा हलकों में उसके अनुयायियों के वोट निर्णायक माने जाते हैं।

5 साल पुराना है मामला

खैर, श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के जिस संवेदनशील मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह को मुख्य साजिशकर्ता करार देकर पंजाब पुलिस की एसआईटी ने आरोपी बनाया है, वह 5 साल पुराना है। 2015 में डेरा प्रमुख की फिल्म 'एमएसजी' रिलीज हुई थी, जिस पर कुछ सिख संगठनों को एतराज था। उस दौरान राज्य में कई जगह सिख संगठनों और डेरा प्रेमियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। 

एक जून, 2015 को जिला फरीदकोट के गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप चोरी हो गया था। चोरी के बाद पावन स्वरूप को 4 महीने तक छुपा कर रखा गया। 

25 सितंबर, 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह के गुरुद्वारे के बाहर पोस्टर लगाए गए जिसमें कई आपत्तिजनक बातें और सिखों की भावनाओं को आहत करने वाले शब्द थे। 12 अक्टूबर को जिला फरीदकोट के बरगाड़ी में ग्रंथ के अंग बिखरे मिले थे।

उबल उठा पंजाब 

इसके बाद पूरे पंजाब में तनाव व्याप्त हो गया। आगजनी और हिंसा की कई घटनाएं हुईं। कुख्यात बहबलकलां (कोटकपुरा) गोली कांड हुआ। एक अलग एसआईटी उसकी जांच कर रही है। इस एसआईटी के जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी सहित कई पुलिस अधिकारी और विधायक तथा अकाली नेता हैं। कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। 

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बरगाड़ी में हुई बेअदबी के बाद तत्कालीन अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार ने भी विशेष जांच टीम एवं न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। 

बेअदबी के मामले की तह तक सही-सही कोई नहीं जा पाया या जाने नहीं दिया गया। बढ़ते दबाव के मद्देनजर यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया लेकिन सीबीआई भी आखिरकार नाकाम रही और उसने क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी।

पिछले चुनाव में बना था मुद्दा

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बरगाड़ी और बहबलकलां कांड बड़ा चुनावी मुद्दा थे। शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्तों पर सीधी उंगलियां उठ रही थीं। मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की रहनुमाई में कांग्रेस की हर चुनावी रैली में वादा किया जाता था कि पार्टी अगर सत्ता में आई तो इन कांडों की गहन जांच कराई जाएगी। 

गुरमीत राम रहीम की कारगुजारियों को एक साध्वी ने उजागर किया था। देखिए, वीडियो - 

तीन साल तक जांच चलती रही और अब अचानक 4 जुलाई के बाद इसने रफ्तार पकड़ ली। पहले डेरा सच्चा सौदा सिरसा के 7 अनुयायी गिरफ्तार किए गए और उनसे पूछताछ व सुबूत हासिल करने के आधार पर डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह और उसके 3 सिपहसालारों पर 6 जुलाई को मामला दर्ज कर लिया गया। 

अगर पंजाब पुलिस डेरा मुखी की जुबान इस प्रकरण पर पूरी तरह खुलवाने में कामयाब रही तो यकीनन पंजाब के कई बड़े सियासतदानों पर आफत आएगी।

पंजाब पुलिस इससे पहले हरियाणा सरकार और वहां के जेल प्रशासन से कह चुकी है कि वह गुरमीत राम रहीम से विशेष पूछताछ करना चाहती है लेकिन हर बार सुरक्षा का हवाला दिया गया। इस बार इस बाबत निचली अदालत में अर्जी दाखिल की गई है। सूत्रों के मुताबिक़, ज़रूरत पड़ने पर पुलिस हाई कोर्ट का भी रुख कर सकती है। गुरमीत राम रहीम के हरियाणा बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ करीबी रिश्ते हैं।                                       

अक्षय कुमार से भी हुई थी पूछताछ

बता दें कि सिखों से डेरा मुखी की अदावत के मामले में मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार भी एक पक्ष हैं। एसआईटी प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल के साथ-साथ अभिनेता अक्षय कुमार से भी पूछताछ कर चुकी है। अक्षय, सुखबीर सिंह बादल और गुरमीत राम रहीम सिंह के करीबी दोस्त हैं। 

पंजाब में आम चर्चा है कि जब डेरा मुखी सिख पंथ से निष्कासित था तो अक्षय कुमार के बंगले पर सुखबीर सिंह बादल ने गुरमीत राम रहीम सिंह से मुलाकात की थी। पंथ से बहिष्कृत व्यक्ति से मिलने को सिख पंथ की मर्यादा के मुताबिक़ समुदाय विरोधी कारगुजारी माना जाता है।        

अकालियों-कांग्रेसियों ने बढ़ाया डेरे का प्रभाव

दरअसल, डेरा सच्चा सौदा के सिरसा (हरियाणा) मुख्यालय से सटे पंजाब के मालवा इलाके में 2007 के बाद डेरे और मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। उसका वर्चस्व बढ़ाने में अकालियों और कांग्रेसियों ने अपनी-अपनी भूमिकाएं अदा कीं। इसका एक नतीजा यह भी निकला कि गुरमीत राम रहीम सिंह खुद को सरकारों का 'सरताज' मानने लगा। 

2005 और 2007 के बीच डेरे की शाखाएं पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित कई राज्यों में खुल गईं। इन शाखाओं का प्रभारी उन्हें बनाया गया, जिनका राजनैतिक संपर्क तंत्र मजबूत था।

डेरा प्रमुख ने रचा स्वांग 

2007 में डेरा प्रमुख ने दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के जैसी पोशाक पहनकर अमृतपान कराने का स्वांग रचा। लेकिन आम सिखों ने इसका पुरजोर विरोध किया। गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उसे पंथ से निष्कासित कर दिया गया। उसे श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया। 

लेकिन अघोषित रूप से खुद को श्री अकाल तख्त साहिब से भी बड़ा मानने वाला डेरा मुखी पेश नहीं हुआ। 10 साल तक डेरा प्रेमियों और सिखों के बीच तगड़ा तनाव रहा। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अकालियों ने डेरा समर्थकों के वोट लेने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब से डेरा मुखी को माफी दिलवा दी तो सिख समुदाय में चौतरफा रोश फैल गया। चार दिन की बहानेबाजी के बाद यह माफी वापस ले ली गई। पहले दी गई माफी और फिर उसकी वापसी पर अब तक संशय बरकरार है।                     

पंजाब की राजनीति पर होगा असर

बहरहाल, अब बेअदबी कांड में डेरा मुखी की नामजदगी पंजाब की राजनीति को नया मोड़ देगी। विधानसभा चुनाव दो साल बाद हैं। शिरोमणि अकाली दल सिखों में खोई अपनी साख बहाल नहीं कर पाया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एक-एक करके अकालियों से पंथक एजेंडे छीन रहे हैं।

‘सख्ती के साथ हो पूछताछ’ 

इस बीच, सर्वोच्च सिख संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब पुलिस को बेअदबी मामले में गुरमीत राम रहीम को प्रोटेक्शन वारंट पर लाकर सख्ती के साथ पूछताछ करनी चाहिए। बादलों के समर्थन से जत्थेदार बनने वाले ज्ञानी कहते हैं, "श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी किसी भी सिख के लिए असहनीय है और गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।" 

डेरा सच्चा सौदा, उसके मुखिया और राष्ट्रीय समिति के तीन सदस्यों की नामजदगी के बाद पंजाब का सियासी पारा उफान पर है लेकिन फिलहाल तक शिरोमणि अकाली दल इस घटनाक्रम पर खामोश है। 

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