+
गुड़गांव में हालात नियंत्रण में... एक और धर्मस्थल फूंका, तीसरी घटना

गुड़गांव में हालात नियंत्रण में... एक और धर्मस्थल फूंका, तीसरी घटना

गुड़गांव में पुलिस हालात नियंत्रण में बता रही है लेकिन इस बीच एक और धर्मस्थल को फूंकने की घटना सामने आई है। गुड़गांव जिले में यह तीसरी घटना है। हालांकि धारा 144 लागू है और चप्पे चप्पे पर पुलिस भी तैनात है लेकिन इसके बावजूद घटनाएं हो रही हैं। 

गुड़गांव पुलिस ने बताया है कि रविवार-सोमवार की रात को अज्ञात लोगों ने शहर के खांडसा गांव में एक धार्मिक स्थल में आग लगा दी।

केयरटेकर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, "लगभग 1.30 बजे, मुझे आसपास रहने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया कि उस जगह को अज्ञात लोगों ने आग लगा दी है।" केयरटेकर ने सेक्टर 37 पुलिस स्टेशन में दी गई एक शिकायत में कहा। इससे पहले गुड़गांव में दो धार्मिक स्थलों को जलाने की घटना हो चुकी है। शहर के बीच में हुई सबसे पहली घटना में धर्मस्थल के अंदर एक धर्मगुरु की हत्या भी कर दी गई। नूंह में 31 जुलाई की हिंसा के क्रम में गुड़गांव में भी हिंसा की वारदातें शुरू हो गई थीं। धर्म विशेष के लोगों की दुकानों, घरों और धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया। 

 

फरीदाबाद के कैली गांव में समुदाय विशेष के धर्मस्थल पर पेट्रोल बम फेंकने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनकी पहचान रवि और प्रवेश के रूप में की है।


गुड़गांव में 1 अगस्त से ही धारा 144 लागू है और जगह-जगह पुलिस भी तैनात है लेकिन अराजक तत्वों को जरा भी खौफ नहीं है। गले और सिर में गमछा लपेटे हुए ये असामाजिक तत्व किसी भी धार्मिक स्थल के आगे नारेबाजी कर रहे हैं या फायर बम फेंकते हैं। लेकिन खांडसा गांव में हुई तीसरी घटना काफी चिंतित करने वाली है। पुलिस का कहना है कि अभी तक उन तत्वों की पहचान नहीं हुई है, जिन्होंने सेक्टर 37 पुलिस स्टेशन क्षेत्र में इस घटना को अंजाम दिया है।   

नूंह और गुड़गांव में धारा 144 का मतलब हर किसी के लिए अलग अलग है। सीपीआई के एक प्रतिनिधिमंडल को रविवार 6 अगस्त को धारा 144 के नाम पर नूंह में हरियाणा सरकार ने नहीं जाने दिया। लेकिन दूसरी तरफ धारा 144 लागू होने के बावजूद तिगरा में रविवार को हिन्दू समाज की महापंचायत होने दी गई। पुलिस ने इसमें कोई बाधा नहीं डाली। इस महापंचायत में वीएचपी और बजरंग दल के नेता शामिल थे। महापंचायत के मंच से धर्म और समुदाय विशेष के लोगों को धमकी दी गई। उन्हें नूंह, गुड़गांव छोड़कर जाने को कहा गया। उनके आर्थिक बहिष्कार की बात कही गई। 

फरीदाबाद में भी पेट्रोल बम फेंकाः पुलिस ने कहा कि फरीदाबाद के कैली गांव में समुदाय विशेष के एक धर्मस्थल पर कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंकने में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और छह दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने कहा कि उनके कब्जे से एक देशी पिस्तौल, पांच जिंदा कारतूस, एक देशी रिवॉल्वर, एक तलवार और पेट्रोल से भरी 13 बोतलें बरामद की गईं।

हालांकि फरीदाबाद की घटना 3 अगस्त की है। लेकिन एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद अब सामने आई है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जब ये लोग इस कार्रवाई को अंजाम दे रहे थे तो पुलिस को सूचना मिल गई थी। पुलिस के पहुंचते ही आरोपियों ने अपनी मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश की। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस ने तुरंत पीछा किया और कुछ देर पीछा करने के बाद दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पलवल जिले के असावटी गांव निवासी रवि और प्रवेश के रूप में हुई है। अन्य आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है और उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

आरोपियों पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, हिंसा भड़काने, शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन, साजिश रचने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने से संबंधित संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ सेक्टर 58 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी।

नूंह में बुलडोजर की कार्रवाई जिस तरह से हाईकोर्ट ने रोकी है, उससे हरियाणा सरकार काफी परेशान नजर आ रही है। क्योंकि नूंह के बाद गुड़गांव और अन्य जिलों में भी बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली गई थी। लेकिन सरकार को हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरा ऑपरेशन रोकना पड़ा है। नूंह के मामले में सरकार पर समुदाय विशेष की संपत्तियों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगा था। यहां तक कि दूसरे समुदाय की दुकानों और संपत्तियों को भी नूंह में निशाना बनाया गया। उनके मालिकों ने कैमरे के सामने आकर बयान दिया है कि उनकी संपत्तियों को जलाने और लूटने में दक्षिणपंथी संगठनों के लोग शामिल थे। क्विंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि उन दुकानदारों और संपत्ति मालिकों ने लूटपाट कर रही भीड़ को बताया कि वे उन्हीं के समुदाय से हैं लेकिन उन लोगों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इन लोगों ने कहा कि वे 40 वर्षों से यहां दुकान चला रहे हैं, उन्हें समुदाय विशेष के लोगों से परेशानी नहीं हुई लेकिन हथियार लेकर बाहर से आए लोगों ने यहां हिंसा की।

सत्य हिंदी ऐप डाउनलोड करें