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संजीव भट्ट की पत्नी ने कहा, मेरी और बेटे की हत्या की कोशिश

संजीव भट्ट की पत्नी ने कहा, मेरी और बेटे की हत्या की कोशिश

गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाने वाले आईपीएस संजीव भट्ट की पत्नी ने कहा है कि उन्हें और उनके बेटे को जान से मारने की कोशिश की गई।

गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाने वाले पूर्व आईपीएस ऑफ़िसर संजीव भट्ट की पत्नी ने कहा है कि उन्हें और उनके बेटे को जान से मारने की कोशिश की गई। भट्ट की पत्नी, श्वेता संजीव भट्ट ने एक फ़ेसबुक पोस्ट लिखकर 7 जनवरी को हुई एक घटना के बारे में विस्तार से बताया है। संजीव भट्ट को 2011 में गुजरात सरकार ने नौकरी से निलंबित कर दिया था और बाद में उन्हें हटा दिया गया था। भट्ट 22 साल पुराने एक मामले में 125 दिनों से जेल में हैं और गुजरात हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होने से ठीक एक दिन पहले ही यह घटना हुई है। 

फ़ेसबुक पोस्ट में श्वेता संजीव भट्ट ने लिखा है, ‘मैंने और मेरे बेटे ने मौत को बहुत क़रीब से देखा। आईआईएम की व्यस्त सड़क पर तेज रफ़्तार से आ रहे एक डंपर ने हमारी कार को ड्राइवर वाली साइड से जोरदार टक्कर मारी। ट्रक के ड्राइवर ने हमें कुचलने की कोशिश की। एक पल को मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने बेटे को खो दूँगी। यह बस चमत्कार ही था कि हम दोनों बच गए और हमें सिर्फ़ मामूली चोटें आईं।’ नीचे पढ़िए श्वेता की फ़ेसबुक पोस्ट - 

मोदी के ख़िलाफ़ लड़ा था चुनाव

श्वेता ने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर अहमदाबाद की मणिनगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी। श्वेता ने पोस्ट में आगे लिखा है, ‘भगवान की कृपा से, संजीव के नेक कामों और आपकी दुआओं के कारण हम आज जिंदा हैं और मैं इस पोस्ट को लिख पा रही हूँ।’ 

एक दिन पहले क्यों हुई दुर्घटना

श्वेता ने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर अहमदाबाद में मणिनगर विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी। श्वेता आगे लिखती हैं, ‘मुझे इस सदमे से निकलने और ऐसा क्यों हुआ, यह सोचने में दो दिन लगे। मैंने सोचा कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गुजरात हाई कोर्ट में सुनवाई से ठीक एक दिन पहले ही यह दुर्घटना क्यों हुई।’ 

डंपर पर नहीं थी नंबर प्लेट 

श्वेता ने कहा, ‘हैरान करने वाली बात यह है कि डंपर ने मेरी कार को पीछे से नहीं, बल्कि ड्राइवर वाली साइड से टक्कर मारी। हमारी कार तेजी से घूमी और डंपर इसे घसीटता चला गया, जबकि टक्कर होने के बाद इसे रुक जाना चाहिए था।’ श्वेता लिखती हैं, ‘डंपर पर न कोई नंबर प्लेट थी, न ही इसका रजिस्ट्रेशन हुआ था और न ही इसके कोई कागजात थे। 

 - Satya Hindi

दुर्घटना के बाद श्वेता की कार। साभार - नेशनल हेरल्ड

'पूरी ताक़त से लड़ेंगे'  

श्वेता लिखती हैं, 'अगर कोई यह सोचता है कि इस तरह की हरकतों से वह हमें डरा देगा या संजीव भट्ट को पीछे हटने को मजबूर कर देगा तो मैं उन सभी को यह बताना चाहती हूँ कि हम घबरा सकते हैं लेकिन डरेंगे नहीं।' उन्होंने कहा कि हम पूरी ताक़त के साथ लड़ाई लड़ते रहेंगे। श्वेता ने कहा, 'उम्मीद है कि नया साल हमारे लिए इंसाफ़ के नए दरवाजे खोलेगा। ईश्वर आप सबको ख़ुश रखे।' 

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