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निर्यातक परेशान: कारख़ाने खोलने दे सरकार वर्ना बाज़ार पर हो जाएगा चीन का कब्जा

निर्यातक परेशान: कारख़ाने खोलने दे सरकार वर्ना बाज़ार पर हो जाएगा चीन का कब्जा

निर्यातकों ने सरकार से माँग की है कि उन्हें निर्यात शुरू करने और उसके लिए अपने कारखाने खोलने की अनुमति दी जाए।

निर्यातकों ने सरकार से माँग की है कि उन्हें निर्यात शुरू करने और उसके लिए अपने कारखाने खोलने की अनुमति दी जाए। उन्होंने आशंका जताई है कि तुरन्त निर्यात नहीं शुरू किया गया तो भारत के बाज़ार पर चीन का कब्जा हो जाएगा क्योंकि चीन ने अपनी उत्पादक इकाइयाँ खोल दी हैं।

फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गनाइजेशन के सदस्यों ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाक़ात कर यह माँग रखी।

चीन का डर!

ऑर्गनाइजेशन ने दवा उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन में दवा बनाने वाली कपनियाँ खुल गई हैं, उत्पादन शुरू हो चुका है। यदि भारतीय कंपनियों को दवा निर्यात की अनुमति नहीं दी गई तो भारत का पूरा निर्यात बाज़ार चीन के पास चला जाएगा। 

फ़ेडरेशन के महानिदेशक अजय साहनी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा : 

‘हमने सरकार को बताया है कि समस्या यह है कि यदि आप अपना बाज़ार किसी देश, ख़ास कर चीन जैसे देश के लिए छोड़ देते हैं तो उसे वापस लेना बहुत ही मुश्किल है।’


अजय साहनी, महानिदेशक, फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गनाइजेशन

उत्पादन शुरू हो

उन्होंने आगे कहा, ‘हमने सरकार से कहा है कि हमें कम से कम आधे कर्मचारियों के साथ ही सही, पर काम शुरू करने दिया जाए, जिससे सोशल डिस्टैंसिंग भी बरक़रार रहे और हम काम भी शुरू कर सकें ताकि उद्योग पर बहुत गहरी चोट न पड़े।’

निर्यातकों के इस संगठन का मानना है कि जिस तरह सामानों की ढुलाई चालू कर दी गई, उसी तरह कुछ कर्मचारियों के आने-जाने की अनुमति भी दे दी जाए। इसी तरह उत्पादन के अलावा कुछ दूसरे आवश्यक काम से जुड़े कर्मचारियों को भी कारखाने तक जाने दिया जाए।

ईएसआई, पीएफ़ से छूट की माँग

इस बैठक में उद्योगपतियों ने यह माँग भी रखी कि कुछ समय के लिए कर्मचारी बीमा कोष में पैसे जमा करने की बाध्यता ख़त्म कर दी जाए। इस योजना के तहत कंपनियों को ईएसआई स्कीम में पैसे जमा कराने होते हैं ताकि उस पैसे से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर खर्च किया जा सके। 

उद्योग ने यह माँग भी की है कि कुछ दिन के लिए 15 हज़ार रुपए वेतन पाने वालों के पीएफ़ में पैसे डालने की बाध्यता हटा ली जाए, क्योंकि सरकार ने 3 महीनों तक यह पैसा देने की बात कही है। 

कॉरपोरेट घरानों ने यह माँग भी की है कि कर्मचारियों के वेतन का कुछ हिस्सा फ़िलहाल सरकार चुकाए, क्योंकि उद्योगों के पास पैसे नहीं है।

टेलीकॉम इक्विपमेंट एंड सर्विसेज एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल के प्रमुख श्यामल घोष न कहा कि ऐसी स्थिति हो जाएगी कि किसी को पैसे नहीं दिए जा सकेंगे। यदि खर्च होने वाले पैसे निर्यात से वापस नहीं मिले तो समस्या होगी। इस स्थिति में उद्योगों को कुछ पैसे आसानी से नहीं मिले तो वेतन का भुगतान करना भी मुश्किल हो जाएगा।

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