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बीजेपी के टिकट पर अमृतसर से चुनाव लड़ेंगे सनी देओल!

बीजेपी के टिकट पर अमृतसर से चुनाव लड़ेंगे सनी देओल!

अमृतसर से बीजेपी ने सिने स्टार सनी देओल को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने सनी देओल से मुलाक़ात भी की है। 

पंजाब की हाई प्रोफ़ाइल सीट अमृतसर से बीजेपी ने सिने स्टार सनी देओल को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सनी देओल से मुलाक़ात भी की है। बस, अब अधिकारिक घोषणा होने का इंतजार है।

पंजाब में बीजेपी का शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन है। जिसके तहत बीजेपी को 3 सीटें मिली हैं और 10 पर शिरोमणि अकाली दल चुनाव लड़ रहा है। अमृतसर सीट बीजेपी के हिस्से में आई है। गुरदासपुर व होशियारपुर से भी बीजेपी को ही उम्मीदवार तय करना है।

बीजेपी ने इस बार अमृसर सीट को जीतने के लिये कमर कस ली है। इसी मक़सद से यहाँ से किसी राजनेता को मैदान में उतारने के बजाए सेलिब्रेटी को उतारने का फ़ैसला लिया गया है। जिसके चलते पार्टी ने सिने स्टार सनी देओल पर दाँव खेलने की तैयारी कर ली है।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पुणे में सनी देओल के साथ बैठक कर चुके हैं। इस बैठक में क्या बात हुई, इसका पता अभी नहीं चल पाया है। लेकिन बताया जा रहा है कि अमित शाह ने सनी के सामने अमृतसर से चुनाव लड़ने की पेशकश रखी है। 

पुणे की इस बैठक में अमरोहा के बीजेपी नेता तरूण राठी भी मौजूद थे। राठी ने बाक़ायदा अपने फ़ेसबुक पेज पर इस बैठक की तसवीरें पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘आज पुणे में प्रिय मित्र सनी देओल व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के साथ लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा की।’ तसवीर में अमित शाह और सनी देओल के साथ राठी भी नज़र आ रहे हैं। 

बताया जा रहा है कि अमित शाह इस ख़ास मुलाक़ात के लिये विशेष विमान से पुणे गये थे।  इस बैठक को लेकर पंजाब की सियासत में माहौल गरमाया हुआ है और सोशल मीडिया में इसकी ख़ूब चर्चा हो रही है। हालाँकि सनी को लेकर पिछले एक माह से चर्चा चल रही थी, लेकिन उस समय कहा जा रहा था कि सनी राजनीति में आने को तैयार नहीं हैं। लेकिन अब अमित शाह से हुई उनकी मुलाक़ात के बाद एक बार फिर उनकी उम्मीदवारी का मामला चर्चा में आ गया है।

पंजाब बीजेपी के नेता भी मान रहे हैं कि पार्टी सनी को लेकर संजीदा है। पार्टी चाहती है कि वह अमृतसर से ही लड़ें। इसी के चलते अमित शाह उन्हें मनाने पुणे गये थे। अगर वह मान गए तो अमृतसर में पार्टी की राह आसान हो जाएगी।

दरअसल, अमृतसर जीतने के लिए बीजेपी स्थानीय दावेदारों पर दाँव नहीं खेलना चाहती क्योंकि वे गुटबाज़ी का शिकार हो जाएँगे। रजिंदर मोहन छीना तीन बार हार चुके हैं। अनिल जोशी के तो प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ही ख़िलाफ़ हैं। यहाँ कोई बाहरी उम्मीदवार ही पार्टी की नैया पार लगा सकता है। इसलिए बीजेपी शुरू से ही किसी सेलेब्रिटी की तलाश में है। सबसे पहले पूनम ढिल्लों, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के नाम चले। किरण खेर को अमृतसर से लड़ाने का मन भी बनाया, पर उन्होंने मना कर दिया। लिहाज़ा, अब सनी देओल को मनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

अमृतसर में पिछली बार बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने क़रीब एक लाख वोटों से हराया था। मोदी लहर में मिली इस हार को पार्टी अब तक पचा नहीं पाई है।

पार्टी ने अमृतसर की सीट को जीतना इस बार प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। हाल ही में अमृतसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक हुई। उसमें भी अमृतसर से उम्मीदवार पर मंथन किया गया। संघ ने शहरवासियों से भी फ़ीडबैक लिया है कि कैसा उम्मीदवार होना चाहिए, स्थानीय या बाहरी, पर वे भी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके।दूसरी ओर, होशियारपुर सीट पर भी पार्टी अब तक फ़ैसला नहीं कर सकी है। आंतरिक सर्वे में विजय सांपला की स्थिति थोड़ी कमजोर है। लेकिन दूसरे प्रमुख दावेदार सोम प्रकाश गुटबाज़ी का शिकार हो जाएँगे। बीजेपी का एक वर्ग आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए सांसद हरिंदर सिंह ख़ालसा को भी विकल्प मान रहा है। हिंदू सीट पर सिख उम्मीदवार के सवाल पर उनकी दलील है कि वह रविदासिया बिरादरी से हैं, जिसका यहाँ वर्चस्व है। 

उधर, गुरदासपुर सीट से कविता खन्ना की उम्मीदवारी लगभग तय है। बीजेपी नेतृत्व ने भले ही तीनों सीटों पर कैंडिडेट घोषित न किए हों, पर पार्टी ने तैयारी शुरू कर दी है। तीनों हलकों में चुनाव कार्यालय खोल दिए गए हैं। हालाँकि होशियारपुर का कार्यालय विवादों में आ गया क्योंकि वहाँ सांपला का पहले से दफ़्तर है। सारा वार रूम और कॉल सेंटर अमृतसर शिफ़्ट कर दिया गया है। 

पार्टी ने तीनों लोकसभा क्षेत्रों में 39-39 मेंबरों की चुनाव समितियाँ बनाई थीं, उनकी लगातार बैठकें हो रही हैं। सभी को कह दिया गया है कि कैंडिडेट कोई भी आए, बूथ स्तर पर अपनी तैयारी पूरी करें।

बीजेपी की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल भी बठिंडा सीट पर उलझी हुई है। कई दिन पहले चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद भी पार्टी ने बठिंडा से अब तक हरसिमरत कौर बादल को औपचारिक तौर पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। पार्टी यहाँ से कांग्रेस कैंडिडेट का इंतजार कर रही है। लेकिन कांग्रेस को अब तक कोई कैंडिडेट नहीं मिला है। दावेदार भी उतने मजबूत नहीं हैं। सर्वे में मनप्रीत बादल मजबूत हैं, पर वह मना कर चुके हैं। नवजोत कौर सिद्धू भी चुनाव लड़ने से मना कर चुकी हैं। 

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