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एक्टिविस्ट हर्ष मंदर से जुड़े तीन जगहों पर ईडी के छापे

एक्टिविस्ट हर्ष मंदर से जुड़े तीन जगहों पर ईडी के छापे

एक्टिविस्ट और पूर्व सिविल सर्वेंट हर्ष मंदर से जुड़े तीन जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने छापे मारे हैं। इनमें वे आश्रय गृह- उम्मीद अमन घर और खुशी रेनबो होम भी शामिल हैं जिनका वह संचालन करते हैं।  

मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक रहे एक्टिविस्ट हर्ष मंदर से जुड़े तीन जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने छापे मारे हैं। रिपोर्ट है कि यह छापेमारी गुरुवार सुबह तब की गई जब कुछ घंटे पहले ही हर्ष मंदर जर्मनी चले गए। अभी तक यह साफ़ नहीं है कि किस मामले में यह कार्रवाई की गई है। हर्ष मंदर का भी अभी तक इस पर बयान नहीं आया है।

दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज में मंदर के घर और अदचीनी में उनके कार्यालयों पर छापे मारे गए। इसके अलावा शहर के महरौली क्षेत्र में मंदर द्वारा संचालित दो आश्रय गृहों-उम्मीद अमन घर और खुशी रेनबो होम पर भी छापे मारे गए हैं।

उनके इन दोनों एनजीओ के ख़िलाफ़ इसी साल फ़रवरी में एक मामले में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग यानी एनसीपीसीआर ने उम्मीद अमन घर और खुशी रेनबॉ होम के ख़िलाफ़ महरौली थाने में केस दर्ज कराया था। इसने आरोप लगाया था कि दोनों एनजीओ में मौजूद अनाथ बच्चों को सीएए और एनआरसी विरोधी आंदोलनों में इस्तेमाल किया गया था। इन दोनों एनजीओ की स्थापना सेंटर फॉर इक्यूटी स्टडीज़ यानी सीएसई ने की है। सीएसई का संचालन न्यास सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर द्वारा किया जा रहा है।

हर्ष मंदर सामाजिक मुद्दों पर काफ़ी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगों में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी। बाद में पुलिस ने उस हिंसा में शामिल होने का आरोप हर्ष मंदर पर ही लगा दिया था। 

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हिंसा की चार्जशीट में हर्ष मंदर का नाम भी जोड़ा दिया था। हर्ष मंदर पर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को उकसाने का आरोप लगा था। यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने दिल्ली हिंसा की साज़िश रची थी।

दरअसल, पिछले दो दशक में हर्ष मंदर की छवि अल्पसंख्यक समर्थक की बन गई है। ख़ासकर गुजरात जनसंहार के समय से बहुसंख्यकवादी हिंसा के शिकार मुसलमानों के लिए और उनके साथ उन्होंने जो काम किया है, उसके कारण उनके ख़िलाफ़ घृणा का प्रचार किया गया है।

हर्ष मंदर ने साल 2002 के गुजरात दंगों से आहत होकर नौकरी छोड़ दी थी और बाद में वह सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने लगे। बता दें कि हर्ष मंदर ने 2005 के सोहराबुद्दीन शेख़ फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में अमित शाह के ख़िलाफ़ छह साल पहले याचिका दायर की थी। 

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