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जमीन के बदले नौकरी घोटाला: राबड़ी देवी से ईडी की पूछताछ

जमीन के बदले नौकरी घोटाला: राबड़ी देवी से ईडी की पूछताछ

कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले में चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव और पूर्व राजद विधायक अबू दोजाना के ख़िलाफ़ छापे के बाद अब राबड़ी देवी से पूछताछ क्यों?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से ईडी ने गुरुवार को कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की है। राबड़ी गुरुवार को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुईं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार उनसे घंटों तक पूछताछ जारी रही। 

राजद प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी 68 वर्षीय राबड़ी देवी का बयान धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत दर्ज किया गया। केंद्रीय एजेंसियों ने राबड़ी देवी के परिवार के लोगों, जिनमें बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, मीसा भारती, चंदा यादव और रागिनी यादव शामिल हैं, से पिछले कुछ महीनों में इस मामले में पूछताछ की है।

यह मामला कथित ज़मीन के बदले नौकरी घोटाला का है। इस मामले में सीबीआई ने 23 सितंबर 2021 को प्राथमिक जाँच यानी पीई दर्ज की थी। आरोप लगाया गया था कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते इसके तहत रेलवे के ग्रुप डी के पदों पर लोगों को आवेदन के तीन दिन के अंदर नौकरी दी गई और बाद में उन्हें नियमित कर दिया गया था। इसके बदले नौकरी पाने वालों के परिवार ने राबड़ी देवी और मीसा भारती के नाम अपनी ज़मीन ट्रांसफर की। 

सीबीआई का कहना है कि लालू प्रसाद के परिवार ने पटना में नकद भुगतान कर 1.05 लाख वर्गफुट जमीन खरीदी। सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि गिफ्ट डीडी के अलावा जमीन के जो सात टुकड़े यादव परिवार को दिए हैं वे मौजूदा सर्किल रेट से कम रेट पर खरीदी गई थीं। सीबीआई द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने केस दर्ज किया था। 

एजेंसी ने इस साल मार्च में चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव और पूर्व राजद विधायक अबू दोजाना के पटना, फुलवारीशरीफ, दिल्ली-एनसीआर, रांची और मुंबई स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने बाद में 1 करोड़ रुपये की 'बेहिसाब नकदी' जब्त करने का दावा किया और इन खोजों के दौरान कथित रूप से 600 करोड़ रुपये के अपराध की आय का पता लगाया।

एजेंसियों का आरोप है कि 2004-09 की अवधि के दौरान भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप डी के पदों पर विभिन्न व्यक्तियों को नियुक्त किया गया और इसके बदले संबंधित व्यक्तियों ने अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को हस्तांतरित कर दी। सीबीआई ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया गया था, लेकिन पटना के कुछ निवासियों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में स्थानापन्न के रूप में नियुक्त किया गया था।

आरोप है कि इसके एवज में उम्मीदवारों ने सीधे या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से कथित तौर पर लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को अत्यधिक रियायती दरों पर जमीनें बेचीं। तेजस्वी यादव इन आरोपों का खंडन करते रहे हैं। 

 - Satya Hindi

बता दें कि इसी साल मार्च महीने में सीबीआई ने भी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से पटना स्थित उनके आवास पर उस मामले में पूछताछ की थी। वह लालू प्रसाद यादव और 14 अन्य लोगों के साथ मामले में आरोपी हैं। उनके परिवार के ख़िलाफ़ यह कोई पहला मामला नहीं है। लालू के परिवार पर चारा घोटाले से लेकर रेलवे के कथित आईआरसीटीसी घोटाले और बेनामी संपत्ति के मामले भी दर्ज हैं। इन मामलों में आरजेडी आरोप लगाता रहा है कि हर चुनाव से पहले दबाव बनाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल करती है और अब 2024 के चुनाव से पहले फिर से एक मामले में सीबीआई कार्रवाई कर रही है। 

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