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रंजीत सिंह हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित 5 को उम्रकैद

रंजीत सिंह हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित 5 को उम्रकैद

दूसरे मामले में पहले से ही जेल की सज़ा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम को अब रंजीत सिंह हत्या के मामले में सज़ा सुनाई गई है। जानिए, किनको और कितनी मिली सज़ा।

रंजीत सिंह हत्या के दोषी डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम के अलावा चार अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा दी है। राम रहीम पर 31 लाख रुपये और बाक़ी आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह अपने आश्रम की दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में पहले से ही जेल की सजा काट रहा है। उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उम्रक़ैद की सजा सुनाई जा चुकी है। 

ताज़ा फ़ैसला रंजीत सिंह हत्या मामले में आया है। रंजीत सिंह डेरा की 10 सदस्यों वाली कमेटी का अहम सदस्य थे। 10 जुलाई, 2002 को रंजीत सिंह की चार बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक़, राम रहीम को ऐसा लगता था कि उसके ख़िलाफ़ जारी किया गया वो पत्र, जिसमें साध्वियों से दुष्कर्म की बात लिखी थी, इसे जारी करने में रंजीत सिंह का हाथ था।

सज़ा सुनाए जाने के मौक़े पर पंचकूला में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। डेरा प्रमुख को 8 अक्टूबर को दोषी ठहराया गया था। राम रहीम सहित सभी पांचों अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में छठे आरोपी की क़रीब एक साल पहले मौत हो गई थी। 

समर्थकों ने की थी हिंसा 

इससे पहले साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उसके समर्थकों ने जबरदस्त तांडव किया था। उस दौरान पंचकूला समेत कई जगहों पर दंगे, आगजनी और तोड़फोड़ हुई थी और राम रहीम के समर्थकों ने बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया था। तब केवल पंचकूला में ही 36 लोग हिंसा में मारे गए थे। 

पंचकूला से शुरू हुई हिंसा पंजाब के बठिंडा, मानसा और मुक्तसर तक फैल गयी थी। एहतियात के तौर पर दिल्ली, पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड तक धारा 144 लगानी पड़ी थी। कई जिलों में तमाम स्कूलों व कॉलेजों को बंद करना पड़ा था। खट्टर सरकार इस हिंसा से निपटने में पूरी तरह विफल रही थी। बस और रेल सेवा को भी रोकना पड़ा था। 

रामचंद्र ने किया था ख़ुलासा

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के ज़रिए ही साध्वी यौन शोषण का मामला सामने आया था। इस मामले में छत्रपति ने डेरा से जुड़ी कई ख़बरें अपने अख़बार में प्रकाशित की थीं। मामले में छत्रपति पर पहले काफ़ी दबाव बनाया गया। लेकिन जब वह धमकियों के आगे नहीं झुके तो 24 अक्टूबर 2002 को उन पर हमला कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई थी। सीबीआई ने 2007 में इस मामले में चार्जशीट दाख़िल की थी।

काफी संख्या में हैं समर्थक

गुरमीत राम रहीम सिंह के समर्थकों की अच्छी-खासी संख्या है और हरियाणा और पंजाब में तमाम राजनीतिक दल राम रहीम का समर्थन चाहते हैं। कहा जाता है कि बीजेपी को हरियाणा में 2014 के विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा का साथ मिला था और तब राज्य में उसकी सरकार बनी थी। 

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