केजरीवाल ने दिया संकेत, नहीं लेंगे बीजेपी-मोदी से टकराव

02:28 pm Feb 16, 2020 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने के बाद केंद्र सरकार की ओर मेल-मिलाप और दोस्ती का हाथ बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री समेत सबका आशीर्वाद चाहते हैं।

 केजरीवाल ने कहा, ‘मैंने शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री को भी न्योता था, शायद वे किसी दूसरे काम में व्यस्त हैं। मैं इस मंच से कहना चाहता हूं कि हमें उनका और सबका आशीर्वाद चाहिए।’

केजरीवाल ने इसके साथ ही चुनावी कड़वाहट छोड़ कर आगे बढ़े का संकेत दिया और कहा कि वह सबके लिए काम करना चाहते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा : 

‘चुनाव प्रचार के दौरान राजनीति होती है और हुई भी। मेरे ख़िलाफ़ जिसने जो कुछ कहा, मैं सबको उसके लिए माफ़ करता हूँ। मैं आप सबसे भी गुजारिश करता हूँ कि आप तमाम नकारात्मक बातें भूल जाएँ। हमें दिल्ली के विकास के लिए मिल कर काम करना है। हम केंद्र के साथ भी मिल कर काम करेंगे।’


अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली

केजरीवाल ने कहा, ‘चुनाव ख़त्म हो चुके हैं। आपने किसी को भी वोट दिया हो, आप अब हमारे परिवार के सदस्य हैं। किसी पार्टी से जुड़ाव होने की वजह से मेरे काम में अड़चन कभी नहीं आई।’

यह वही अरविंद केजरीवाल हैं, जो बीजेपी के ख़ास निशाने पर थे और जिन पर ज़ोरदार निजी हमले हुए। बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने उन्हें आतंकवादी क़रार दिया।

केजरीवाल ने प्रचार के दौरान कहा, ‘क्या मैं आपको आतंकवादी लगता हूं?’ इस पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस आरोप को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘हाँ। अरविंद केजरीवाल हैं।’ उन्होंने इसके पक्ष में तर्क भी दिए। 

केंद्र से टकराव नहीं

केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह से दो महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिए। उन्होंने यह मजबूत संकेत दिया कि वह केंद्र से किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। वह केंद्र सरकार के साथ मिल कर काम करना चाहते हैं और इसमें उन्हें केंद्र सरकार की मदद चाहिए।

केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री को न्योता। इसमें मोेदी के शरीक नहीं होने को भी केजरीवाल ने मुद्दा नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि पीएम व्यस्त रहे होंगे। इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री का आशीर्वाद चाहिए।

विपक्षा का जमावड़ा नहीं 

केजरीवाल ने अपने शपथ ग्रहण समारोह को विपक्षी एकता का प्रतीक बनाने से परहेज किया। उन्होंने दूसरे राज्यों से विपक्षी दलों के नेताओं को इसमें भाग लेने के लिए हीं बुलाया। उन्होंने किसी राज्य के मुख्यमंत्री को इसमें शिरकत करने की दावत नहीं दी।

इसके पहले जब झारखंड में हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उन्होंने तमाम विपक्षी दलों के नेताओं को न्योता था। उसमें विपक्षी दलों के सभी मुख्यमंत्रियों और तमाम बड़े नेताओं को बुलाया गया था। उस समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ तक गए थे।

प्रकट तौर पर यह कहा गया कि यह दिल्ली केंद्रित कार्यक्रम है, दिल्ली के लोग बुलाए गए हैं। पर इसके ज़रिए केजरीवाल ने बीजेपी को यह संकेत दिया कि वह विपक्ष को एकजुट करने की राजनीति से दूर रहना चाहते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्राथमिकताएं साफ़ कर दी हैं, जो आम आदमी पार्टी की रणनीति और राजनीति के अनुकूल है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें न तो प्रधानमंत्री बनने की लालसा है और न ही वे अपने दल को विपक्षी एकता की धुरी बनाना चाहते हैं। केजरीवाल ने साफ़ संकेत दे दिया कि वह दिल्ली से संतुष्ट हैं, दिल्ली में ही सीमित रहेंगे और बीजेपी से लड़ाई और केंद्र से टकराव की नीति पर नहीं चलेंगे।