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दिल्ली दंगों पर चार्जशीट दाखिल, ताहिर हुसैन को बताया 'मास्टर माइंड'

दिल्ली दंगों पर चार्जशीट दाखिल, ताहिर हुसैन को बताया 'मास्टर माइंड'

दिल्ली पुलिस ने फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में हुए सांप्रदायिक दंगों पर चार्जशीट मंगलवार को दाखिल कर दी है।

दिल्ली पुलिस ने फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में हुए सांप्रदायिक दंगों पर चार्जशीट मंगलवार को दाखिल कर दी है। इसमें आम आदमी पार्टी के निलंबित कौंसिलर ताहिर हुसैन और दूसरे 14 लोगों के ख़िलाफ़ दंगे फैलाने और हिंसा करने के आरोप लगाए गए हैं। 

ताहिर हुसैन को दंगों का मास्टर माइंड बताया गया है। पुलिस ने 1,030 पेज की चार्जशीट में कहा है कि हुसैन ने हिंसा भड़काई थी, दंगों की साजिश रची थी और दंगे कराने के लिए 1.30 करोड़ रुपए खर्च किए थे।  

पुलिस ने कड़कड़डूमा अदालत में दाखिल चार्जशीट में कहा है कि उत्तर दिल्ली के चांद बाग इलाक़े में हुए दंगे में ताहिर हुसैन की अहम भूमिका थी। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने बड़े पैमाने पर दंगे की साजिश रची थी।

नाम उमर खालिद का भी

पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि ताहिर हुसैन ने उमर खालिद और खालिद सैफ़ी  से भी मुलाक़ात की थी। ये वे लोग हैं, जिन्होंने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली में आन्दोलन चलाया था।

पुलिस ने 75 गवाहों की सूची पेश की है। इसमें कहा गया है कि ताहिर हुसैन के मकान की छत पर पेट्रोल बम और 100 जीवित कारतूस पाए गए थे, जिनका इस्तेमाल दंगों के दौरान हुआ था।

अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट

बता दें कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बहुत ही साफ़ शब्दों में कहा है कि ये दंगे ‘सुनियोजित’, और ‘एकतरफा’ थे और ‘मुसलमानों के घरों और दुकानों को ही अधिक नुक़सान हुआ है’ और उन्हें ‘स्थानीय लोगों की मदद से ही’ निशाना बनाया गया है।

अल्पसंख्यक आयोग ने दो पेज की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि किस तरह आगजनी की वारदात को अधिक भयावह बनाने के लिए गैस सिलिंडरों का इस्तेमाल किया गया था और किस तरह दुकानों और घरों को आग के हवाले करने के पहले उन्हें लूटा गया था।  

क्या कहा था ताहिर हुसैन ने

इसके पहले ताहिर हुसैन ने कहा था कि वह बेगुनाह है। लेकिन अब मामला अदालत में है और ताहिर को क़ानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। ताहिर को लेकर दिल्ली पुलिस के बयानों में जबरदस्त विरोधाभास है।

ताहिर ने पहले भी इस बात को कहा था कि पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को 24 फ़रवरी की रात को उनके घर से निकाल लिया था। पहले पुलिस के एक अफ़सर ने ताहिर के बयान का समर्थन किया लेकिन बाद में पुलिस इससे मुकर गयी।

क्या कहना है पुलिस का

दिल्ली पुलिस के एसीपी ए.के.सिंगला ने कहा था कि नेहरू विहार के पार्षद ताहिर हुसैन ख़ुद भी हिंसा के शिकार थे। सिंगला ने कहा था कि ताहिर की ओर से 24 फ़रवरी की रात को मुसीबत में होने की कॉल आने पर पुलिस उनके मकान पर गई थी, लेकिन पार्षद ने पुलिस की सुरक्षा के बिना मकान से बाहर आने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस की टीम ने उसे वहां से निकाला था।  

लेकिन दिल्ली पुलिस ने सिंगला के दावे को ग़लत बताया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कुछ लोगों ने 24-25 फ़रवरी की रात को चांदबाग में तैनात पुलिसकर्मियों को सूचना दी थी कि ताहिर के घर को भीड़ ने घेर लिया है और वह घर में फंस गये हैं।

पुलिस ने कहा कि भीड़ के द्वारा घेरे जाने की सूचना ग़लत निकली और ताहिर हुसैन अपने घर में ही मौजूद थे। इसके बाद पुलिस ने कहा कि 26 फ़रवरी को अंकित का शव मिलने के बाद ताहिर के घर की तलाशी ली गई और तब ताहिर घर से फरार थे। ऐसे में पुलिस का कौन सा बयान सही है, यह पता कर पाना मुश्किल है।

ताहिर के वकील की ओर से पुलिस के बयानों में विरोधाभास को अदालत के सामने रखा जा सकता है और ऐसे में पुलिस को इसका जवाब देना मुश्किल होगा।  

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