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कर्नाटक : मंदिर के सामने से गुजरने पर दलित की पिटाई

कर्नाटक : मंदिर के सामने से गुजरने पर दलित की पिटाई

कर्नाटक के मैसूरु ज़िले में दलित-लिंगायत संघर्ष एक बार फि खुल कर कैसे सामने आ गया? दलितों को शिव मंदिर के सामने की सड़क से गुजरने का विरोध क्यों हो रहा है?

कर्नाटक में ईसाइयों पर हमलों के बीच अब दलित उत्पीड़न की वारदात बढ़ रही है। एक चौंकाने वाली घटना में मैसूरु ज़िले के एक लिंगायत-बहुल गाँव में एक दलित युवक को इसलिए पीटा गया कि वह एक मंदिर के सामने सरकार की ओर से बनाई गई सार्वजनिक सड़क का इस्तेमाल कर रहा था। 

इस मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 11 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दायर किया गया है। 

यह वारदात एच. डी. कोटे तालुक के अन्नूर होशाहल्ली गाँव की है। अनुसूचित जाति आदि कर्नाटक का युवक महेश अपने एक दोस्त के साथ मोटर साइकिल पर जा रहा था कि उसे शिव मंदिर के पास कुछ लोगों ने रोक लिया। उसके बाद उन लोगों ने महेश को कथित तौर पर पीटा। वे सभी लिंगायत समुदाय के लोग थे। 

लिंगायत वर्चस्व

बता दें कि कर्नाटक के समाज में लिंगायत व वोक्कालिगा दो बड़ी और महत्वपूर्ण जातियाँ हैं। राजनीति, शिक्षा, व्यवसाय, खेती-बाड़ी, नौकरी समेत सभी क्षेत्रों पर इनका दबदबा है। ये दोनों जातियाँ वर्चस्व के लिए आपस में भिड़ती रहती हैं, पर इन दोनों ही जातियों के लोगों पर अनसूचित जातियों व जनजातियों के लोगों के उत्पीड़न व भेदवभाव के आरोप लगते रहते हैं। 

ताजा मामले में दलित युवक महेश ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "पाँच साल पहले इस गाँव के लिंगायतों व दलितों ने मिल कर शिव मंदिर बनाया, दोनों ही पैसे दिए, दोनों ने ही श्रमदान किया, दोनों की बराबर की हिस्सेदारी थी।"

उन्होंने आगे कहा, 

मंदिर बनने के बाद लिंगायतों ने दलितों से कहा कि वे इस मंदिर से दूर रहें और उनके इस मंदिर के अंदर घुसने पर भी रोक लगा दी। जब-जब दलितों ने इस पर सवाल उठाया है, उनके साथ मार-पीट की गई है।


महेश, उत्पीड़न का शिकार दलित युवक

महेश ने कहा, "हालत यह हो गई है कि दलितों से कहा गया है कि वे मंदिर के सामने की सड़क से न गुजरें और ज़्यादातर दलितों ने इसे मान भी लिया है। पर मैंने इसे नहीं माना और सड़क से जाता-आता रहा।" 

महेश ने कहा, "मैं अपने दोस्त के साथ मोटर साइकिल से जा रहा था तो लोगों ने मुझे रोका और कह कि मैं इस सड़क से न जाऊँ। जब मैंने इसका कारण पूछा तो उन लोगों ने मुझे पीटा।" 

इस गाँव में लगभग तीन सौ घर लिंगायतों के और 35 दलितों के हैं।

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