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कोरोना: बिहार के लिए बड़ी चिंता- कम टेस्टिंग लेकिन ज़्यादा पॉजिटिविटी दर 

कोरोना: बिहार के लिए बड़ी चिंता- कम टेस्टिंग लेकिन ज़्यादा पॉजिटिविटी दर 

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में की तुलना में बिहार में संक्रमितों की संख्या बहुत कम दीख रही है, लेकिन स्थिति इन राज्यों से कम विस्फोटक नहीं है। राज्य में टेस्टिंग कम हुई है लेकिन राज्य में पॉजिटिव रेट काफ़ी ज़्यादा है।

भले ही महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों की तुलना में बिहार में संक्रमितों की संख्या बहुत कम दीख रही है, लेकिन स्थिति इन राज्यों से कम विस्फोटक नहीं है। संक्रमण के मामले कम होने का शायद सबसे बड़ा कारण जाँच कम होना है क्योंकि राज्य में पॉजिटिव रेट काफ़ी ज़्यादा है। पॉजिटिव रेट यानी जितने लोगों की टेस्टिंग की गई उनमें से संक्रमित आने वालों की दर। 

अब बिहार में कोरोना संक्रमण की स्थिति का अंदाज़ा इससे भी लगाया जा सकता है कि राज्य में फिर से संपूर्ण लॉकडाउन किया गया है। यह 31 जुलाई तक रहेगा। 

लॉकडाउन की घोषणा बिहार के मुख्यमंत्री वही नीतीश कुमार ने की है जो एक समय मास्क पहनने पर लोगों पर यह कहते हुए विफर गए थे कि इससे लोगों में डर और अफरा-तफरी फैलेगी। अब ज़ाहिर है मुख्यमंत्री को इसका अंदाजा तो होगा ही कि जब मास्क पहनने से अफरा-तफरी फैल सकती है तो लॉकडाउन लगाने से तो और भी अफरा-तफरी फैलेगी। फिर भी उन्होंने लॉकडाउन लगा दिया तो निश्चित ही स्थिति बेहद ख़राब होगी या होने वाली होगी। 

बिहार में अब तक सिर्फ़ 3.3 लाख टेस्टिंग हुई है। बिहार में पॉजिटिविटी रेट 5.7 फ़ीसदी है। हालाँकि राष्ट्रीय औसत 7.6 फ़ीसदी से यह कम है, लेकिन जब दूसरे राज्यों में 3.3 लाख टेस्टिंग हुई थी तब से इसकी तुलना की जाए तो बिहार की स्थिति बेहद ख़राब नज़र आती है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे राज्यों में जब इतनी टेस्टिंग (क़रीब 3 लाख) हुई थी तब बिहार से ज़्यादा पॉजिटिविटी रेट सिर्फ़ दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात में ही थी। बाक़ी राज्यों में पॉजिटिविटी रेट 4 फ़ीसदी से भी काफ़ी कम थी। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जब 3 लाख टेस्टिंग हुई थी तब मध्य प्रदेश में पॉजिटिविटी रेट 3.9, ओडिशा में 3.7, तमिलनाडु में 3.4, पश्चिम बंगाल में 3.2, उत्तर प्रदेश में 2.7, राजस्थान में 2.2, केरल में 2.16, जम्मू-कश्मीर में 2.0, पंजाब में 1.8, असम में 1.8 और आँध्र प्रदेश में 0.84 फ़ीसदी था। 

कोरोना संकट से निपटने में विपक्ष बिहार सरकार की ज़बरदस्त आलोचना करता रहा है। विपक्ष कोरोना की टेस्टिंग कम होने को लेकर हमलावर रहा है। वैसे, विपक्ष का यह आरोप बेवहज भी नहीं है। 

बिहार में देश की सबसे कम टेस्टिंग रेट है- प्रति लाख जनसंख्या पर 316 ही। अन्य सभी राज्यों में प्रति लाख 550 से ज़्यादा ही टेस्टिंग रेट है। कुल मिलाकर देश का आँकड़ा 979 नमूने प्रति लाख है।

रिपोर्ट के अनुसार, पटना में इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में कोविड-19 परीक्षण की निगरानी करने वाले डॉ. एस के शाही ने कहा, 'पटना के आसपास के 14 ज़िलों में पॉजिटिवटी रेट पिछले दो हफ्तों में 4 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। यह चिंताजनक है। पटना में पॉजिटिविटी रेट सबसे ख़राब 8 से 10 फ़ीसदी है।'

बिहार में अब तक 21 हज़ार 764 संक्रमण के मामले आ चुके हैं और 197 मरीज़ों की मौत हो चुकी है। फ़िलहाल कोरोना संक्रमण के मामले में बिहार 12वें स्थान पर है। सबसे ज़्यादा कोरोना संक्रमण के मामले महाराष्ट्र में हैं और वहाँ 2 लाख 84 हज़ार 281 पॉजिटिव केस आ चुके हैं और 11 हज़ार 194 लोगों की मौत हुई। दूसरे स्थान पर तमिलनाडु में 1 लाख 56 हज़ार 369 पॉजिटिव केस आए हैं और 2236 लोगों की मौत हुई है। तीसरे स्थान पर दिल्ली में 1 लाख 18 हज़ार 645 संक्रमण के मामले आए और 3545 लोगों की मौत हुई। बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में 43 हज़ार 441 पॉजिटिव केस आ चुके हैं और 1046 मरीज़ों की मौत हो चुकी है।

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