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गांवों में हालात ख़राब लेकिन यूपी सरकार का दावा- 64% गांव कोरोना फ्री

गांवों में हालात ख़राब लेकिन यूपी सरकार का दावा- 64% गांव कोरोना फ्री

राज्य सरकार ने दावा किया है कि वह ग्रामीण इलाक़ों में हर दिन 1 लाख से ज़्यादा टेस्ट कर रही है और सरकार के द्वारा बनाई गई कमेटियां ‘टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट’ के मंत्र का कड़ाई से पालन कर रही हैं

एक ओर उत्तर प्रदेश के गांवों में कोरोना का संक्रमण फैलने और इससे मौतें होनें, गंगा किनारे बड़ी संख्या में शव मिलने और इन्हें दफ़नाए जाने की ख़बरें और तसवीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार ने दावा किया है कि राज्य के 64% गांव कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो गए हैं। सरकार के दावे के मुताबिक़, इसके पीछे वजह वायरस को फैलने से रोकने के लिए किए गए उसके प्रयास हैं। 

राज्य सरकार के मुताबिक़, बुधवार को राज्य में रिकॉर्ड 2,97,327 टेस्ट किए गए और इसमें से 73 फ़ीसदी टेस्ट गांवों में किए गए। बीते कुछ दिनों से प्रदेश में संक्रमण के मामले भी घटे हैं और बीते 24 घंटों में संक्रमण के 7,336 नए मामले सामने आए हैं और 282 लोगों की मौत हुई है। 

‘टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट’ पर जोर

राज्य सरकार ने दावा किया है कि वह ग्रामीण इलाक़ों में हर दिन 1 लाख से ज़्यादा टेस्ट कर रही है और सरकार के द्वारा बनाई गई कमेटियां ‘टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट’ के मंत्र का कड़ाई से पालन कर रही हैं और अब तक इन कमेटियों के सदस्य 79,512 गांवों में जाकर कोरोना की स्क्रीनिंग को लेकर अभियान चला चुके हैं। इन गांवों में से 28,742 गांवों में वायरस के संक्रमण का पता चला है। 

योगी सरकार का कहना है कि इन कमेटियों में आशा, आंगनबाड़ी और एनएनएम कर्मचारियों को शामिल किया जाता है और ये लोग जल्द से जल्द संदिग्ध मामलों को पहचानने, जांच को बढ़ाने और इलाज उपलब्ध करवाने का काम करते हैं। इन कमेटियों को ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर भी दिए गए हैं।

गांवों में सैनिटाइजेशन अभियान 

सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल का कहना है कि शहरों और कस्बों में ज़्यादा से ज़्यादा आरटी-पीसीआर टेस्ट कराए जा रहे हैं, इसके अलावा विशेष सैनिटाइजेशन अभियान भी चलाया जा रहा है और लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और सफाई रखने जैसी बातें बताई जाती हैं। 

उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में कोरोना का संक्रमण रोक पाना एक बड़ी चुनौती है। वो भी तब जब हाल ही में पंचायत चुनाव हुए हों और इसके बाद राज्य के कई गांवों से लोगों के बड़ी संख्या में खांसी-बुखार, बदन दर्द से परेशान होने और मौत होने की भी ख़बर सामने आई हो। 

भरोसा करना मुश्किल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के कई गांवों में कोरोना संक्रमण से मौतें होने और हालात के बिगड़ने की ख़बरें लगातार आ रही हैं। गंगा किनारे बड़ी संख्या में शव मिल रहे हैं। इसके बीच भी सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में 64% फ़ीसदी गांव कोरोना से मुक़्त हो गए हैं लेकिन ज़मीनी हालात देखकर इस दावे पर एतबार करना मुश्किल होता है। 

गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं राम भरोसे: कोर्ट

योगी सरकार के दावों के विपरीत इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में गांवों के हालात को लेकर सरकार को चेताया है। अदालत ने कहा है कि गांवों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं राम भरोसे हैं। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की बेंच ने कहा था, “बीते कुछ महीने में हमने देखा है कि उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा बेहद कमजोर है। जब यह स्वास्थ्य ढांचा सामान्य हालात में लोगों को चिकित्सा सुविधा नहीं दे पाता तो इसका इस महामारी में फ़ेल होना निश्चित ही था।” 

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