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<i></i>लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखें: सीजेआई रमना 

लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखें: सीजेआई रमना 

सीजेआई एनवी रमना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्रियों, हाई कोर्ट्स के चीफ जस्टिस की मौजूदगी में लक्ष्मण रेखा वाला बयान दिया है। इसका क्या मतलब समझा जाना चाहिए?

सीजेआई एनवी रमना ने शनिवार को कहा है कि संविधान लोकतंत्र के तीन स्तंभों के बीच ताकतों का बंटवारा करता है और सभी को अपने दायित्व का पालन करते वक्त लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना चाहिए।

सीजेआई रमना ने अदालतों में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल की भी जोरदार पैरवी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका समर्थन किया। 

सीजेआई रमना मुख्यमंत्रियों और सभी राज्यों की हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की संयुक्त कांफ्रेंस में बोल रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। 

सीजेआई ने कहा कि न्यायिक घोषणाओं के बावजूद सरकारों द्वारा जानबूझकर की जाने वाली निष्क्रियता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। 

पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन 

उन्होंने जनहित याचिकाओं यानी पीआईएल के दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई है और इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया जाता है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अदालतों में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे न केवल आम आदमी का न्यायिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा बल्कि वह अदालतों के कामकाज से कहीं ज्यादा जुड़ाव महसूस करेगा।

मोदी ने कहा कि अदालतों में कामकाज अंग्रेजी में होता है और इसलिए देश की एक बड़ी आबादी को अदालत के फैसलों को समझना मुश्किल होता है। 

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे पुराने पड़ चुके कानूनों को खत्म करें जिससे लोगों को त्वरित न्याय मिल सके। उन्होंने कहा केंद्र सरकार बीते कुछ सालों में 1450 ऐसे कानूनों को खत्म कर चुकी है जबकि राज्यों ने सिर्फ 75 ऐसे कानून खत्म किए हैं।

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