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दिल्ली: सगे भाइयों ने दुकान में की आत्महत्या, कारोबार में हुआ था आर्थिक नुक़सान

दिल्ली: सगे भाइयों ने दुकान में की आत्महत्या, कारोबार में हुआ था आर्थिक नुक़सान

दिल्ली के चांदनी चौक में दो सगे भाइयों ने अपनी ज्वैलरी शॉप में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

दिल्ली के चांदनी चौक में दो सगे भाइयों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार को हुई और पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि दोनों भाई दिन में 3 बजे अपनी ज्वैलरी की दुकान में फांसी के फंदे से लटके मिले। स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण उन्हें कारोबार में नुक़सान हुआ था और कुछ का यह कहना है कि वे उधार लिया पैसा नहीं चुका पा रहे थे। 

मरने वालों के नाम अर्पित (42) और अंकित (47) थे। वे अपने परिवारों के साथ चांदनी चौक के बेहद व्यस्त इलाक़े बाज़ार सीताराम में रहते थे। मौक़े से सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें दोनों ने लिखा है कि ख़राब आर्थिक हालात की वजह से उन्हें ऐसा क़दम उठाना पड़ रहा है। सुसाइड नोट में दोनों भाइयों ने अपने परिवारों से ऐसा आत्मघाती क़दम उठाने के लिए माफ़ी भी मांगी है। 

दिल्ली पुलिस की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने कहा है कि दोनों के शव ज्वैलरी शॉप की तीसरी मंजिल में मिले। उस दौरान इनके पिता पहली मंजिल पर थे। 

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, स्थानीय लोगों ने कहा है कि दोनों भाइयों ने कुछ लोगों से पैसा उधार लिया था और वे इसे वापस करने के लिए इन लोगों को परेशान कर रहे थे। लॉकडाउन के चलते हुए आर्थिक नुक़सान की वजह से ये लोग उधार नहीं चुका पा रहे थे। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उधार देने वालों ने उनके साथ मारपीट भी की थी। 

दोनों भाइयों ने सुसाइड नोट में किसी का नाम नहीं लिया है। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए हैं और मामले की जांच जारी है। अंकित के दो बच्चे थे जबकि अर्पित की शादी नहीं हुई थी। ये लोग ज्वैलरी बनाते थे।

उनके पिता अधीश्वर ने भी आरोप लगाया है कि उनके बेटों को ज्वैलरी की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। 

चांदनी चौक की ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यशपाल सिंघल का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से व्यापारी कर्ज में डूब गए हैं।

इस इलाक़े में वेडिंग कार्ड की दुकान चलाने वाले लोकेश गुप्ता ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, मैं इस परिवार को सालों से जानता हूं। दोनों भाइयों ने लॉकडाउन से पहले लोन लिया था। आम तौर पर लोन छह महीने में चुका दिया जाता है लेकिन लॉकडाउन के कारण सेल नहीं हुई थी। 

बढ़ रहा अर्थव्यवस्था का संकट 

इस तरह की ख़बरें ऐसे वक्त में और भी परेशान करने वाली हैं, जब आरबीआई की ओर से यह कहा गया है कि मोदी सरकार की तमाम घोषणाओं, दावों और उपायों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ता जा रहा है और इसके पटरी पर लौटने की फ़िलहाल कोई गुंजाइश नहीं दिखती। आरबीआई ने आधिकारिक तौर पर यह मान लिया है और कहा है कि अर्थव्यवस्था को दुरुस्त होने में अभी समय लगेगा। 

बैंक ने वित्तीय वर्ष 2019-2020 की अपनी सालाना रिपोर्ट में यह भी माना है कि कोरोना महामारी की वजह से जो आर्थिक स्थिति बिगड़ी, उसकी सबसे ज़्यादा मार उन लोगों पर पड़ी है जो सबसे अधिक ग़रीब थे। आरबीआई ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के जो लक्षण मई-जून में दिखे थे, वे जुलाई-अगस्त आते-आते कमज़ोर पड़ गए। इसकी वजह लॉकडाउन को सख़्ती से लागू करना है। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी लॉकडाउन को लेकर बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था में जो दिक्कतें आईं, उसके पीछे सरकार द्वारा सख़्त लॉकडाउन लगाने का फ़ैसला है। 

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