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यूक्रेन संकट बढ़ने के साथ ही सेंसेक्स 1000 अंक तक फिसला

यूक्रेन संकट बढ़ने के साथ ही सेंसेक्स 1000 अंक तक फिसला

यूक्रेन संकट और इसको लेकर रूस, यूरोपीय देश और अमेरिका की प्रतिक्रियाओं के बीच शेयर बाज़ार में हताशा क्यों है?

यूक्रेन संकट के बीच बीएसई सेंसेक्स और एनएसई में मंगलवार को भारी गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में वैश्विक बाजार में कमजोरी के संकेत के बीच लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ शेयर बाज़ार खुले। समझा जाता है कि दुनिया भर के बाजार पर यूक्रेन पर रूस के संभावित हमले का असर पड़ा। हमले की आशंका ने निवेशकों को निराश किया। 

एक समय तो एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 1,015 अंक यानी क़रीब 1.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 56,668  पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 285.40 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,921 पर कारोबार कर रहा था।

सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक सेंसेक्स में कुछ सुधार हुआ और इसने क़रीब 630 अंकों की गिरावट के साथ 57,057 पर कारोबार किया। इसी तरह निफ्टी साढ़े ग्यारह बजे तक क़रीब 191 अंकों की गिरावट के साथ 17019 पर कारोबार कर रहा था। 

शुरुआती कारोबार में बीएसई के सभी सेक्टोरियल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। डॉ. रेड्डीज, एलएंडटी, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, एचडीएफसी और एशियन पेंट्स 2 प्रतिशत से अधिक के नुक़सान के साथ शीर्ष पर रहे।

बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्वी यूक्रेन के विद्रोही दो इलाकों को आज़ाद या अलग देश के तौर पर मान्यता दे दी है। इन इलाक़ों के नाम लुहान्स्क और दोनेत्स्क हैं। पुतिन ने मंगलवार तड़के राष्ट्र के नाम संबोधन में इस बात का एलान किया। पुतिन के इस कदम पर यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने नाराजगी जताई है। 

पुतिन ने यूक्रेन के इन विद्रोही या अलगाववादी इलाकों के नेताओं को मदद देने पर भी अपनी सहमति जताई है। लुहान्स्क और दोनेत्स्क में रूस समर्थक लोगों की एक बड़ी तादाद है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी इलाकों- लुहान्स्क और दोनेत्स्क को आजाद देश के तौर पर मान्यता देने के तुरंत बाद जर्मनी फ्रांस और अमेरिका ने एक बयान जारी कर कहा है कि इसका जवाब दिया जाएगा।

उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह का कोई खौफ नहीं है और इस बात की पूरी उम्मीद है कि उन्हें पश्चिमी देशों से मदद मिलेगी।

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