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आख़िरकार बीजेपी ने माना, महाराष्ट्र में सरकार बनाने में सक्षम नहीं

आख़िरकार बीजेपी ने माना, महाराष्ट्र में सरकार बनाने में सक्षम नहीं

आख़िरकार बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाने का फ़ैसला किया है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी नेताओं ने शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात के बाद यह बात साफ़ कर दी।

आख़िरकार बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाने का फ़ैसला किया है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी नेताओं ने शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात के बाद यह बात साफ़ कर दी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इसकी घोषणा की। इसके साथ ही पाटिल ने कहा कि शिवसेना चाहे तो एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बना सकती है। राज्यपाल ने शनिवार को ही बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था।

राज्यपाल से मुलाक़ात से पहले इस संबंध में रविवार को बीजेपी कोर कमेटी की बैठक हुई थी। चुनाव नतीजे आने के 17 दिन बाद बीजेपी यह तय नहीं कर पाई थी कि वह सरकार बनाएगी या नहीं। बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना के सरकार में शामिल नहीं होने के फ़ैसले के बाद बीजेपी के लिए यह मुश्किल आई है। यही कारण है कि चुनाव नतीजे आने के इतने दिनों बाद भी इस पर फ़ैसला नहीं लिया जा सका था। लेकिन यह संभावना है कि शिवसेना अब एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। 

काफ़ी पहले से ही शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के मिलकर राज्य में सरकार बनाने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन कुछ समय पहले ऐसे संकेत मिले थे कि कांग्रेस आलाकमान शिवसेना को समर्थन देने के लिये राजी नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हालाँकि महाराष्ट्र कांग्रेस के आला नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से कहा है कि वह बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिये ज़रूरी क़दम उठाने के बारे में विचार करें। महाराष्ट्र से कांग्रेस के सांसद हुसैन दलवई ने कुछ दिन पहले शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का समर्थन किया था और सोनिया गाँधी को चिट्ठी भी लिखी थी। इसके अलावा भी कई कांग्रेस नेता इसके पक्ष में दिखते हैं।

शिवसेना की एनसीपी और कांग्रेस के साथ इन्हीं संभावनाओं को लेकर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि जनादेश हमें (बीजेपी-शिवसेना) साथ काम करने के लिए मिला था, यदि शिवसेना इसका सम्मान नहीं करती है और एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाती है तो हमारी उनके लिए शुभकामनाएँ हैं। चंद्रकांत पाटिल ने ये शब्द यूँ ही नहीं कहे हैं। दरअसल, इसकी सुगबुगाहट कांग्रेस में भी है। 

शिवसेना को समर्थन देने को लेकर कांग्रेस में मंथन चल रहा है। पार्टी ने अपने विधायकों को ख़रीद-फरोख़्त से बचाने के लिये जयपुर में एक होटल में ठहराया हुआ है। ख़बरों के मुताबिक़, राज्य के कई कांग्रेस विधायकों ने शिवसेना को समर्थन देने की इच्छा व्यक्त की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जयपुर में विधायकों से मुलाक़ात कर उनकी इच्छा जानने की कोशिश की है। 

इन बदले हुए घटनाक्रमों के बीच अब माना जा रहा है कि शिवसेना भी इस पर स्थिति साफ़ करेगी। सरकार नहीं बनाने की बीजेपी की घोषणा से पहले ही शिवसेना नेता ने अपनी पार्टी की भविष्य की रणनीति को लेकर कहा था, ‘राज्यपाल के क़दम के बाद स्थिति साफ़ हो जाने दीजिए। शिवसेना अपनी रणनीति के बारे में तब बताएगी जब कोई भी सरकार बनाने में सक्षम नहीं होगा।’ राउत ने कहा कि अगर बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करती है तो शिवसेना दावा पेश करेगी। 

राउत पहले भी शिवसेना की ओर से सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं और यहाँ तक कह चुके हैं कि शिवसेना के पास 170 विधायकों का समर्थन है। लेकिन शिवसेना के पास सिर्फ़ 56 विधायक हैं। इसका मतलब यह है कि शिवसेना की कांग्रेस-एनसीपी से पर्दे के पीछे कोई बातचीत चल रही है। 

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