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पीएम मोदी के जन्मदिन पर 3 हफ़्ते का अभियान; छवि चमकाएँगे!

पीएम मोदी के जन्मदिन पर 3 हफ़्ते का अभियान; छवि चमकाएँगे!

बीजेपी इस बार प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर कार्यक्रम को 'सेवा सप्ताह' की जगह 'सेवा और समर्पण अभियान' नाम दिया है। राज्यों में चुनाव से पहले 'थैंक्यू मोदीजी' से लेकर प्रधानमंत्री मोदी के जीवन और कार्यों को लेकर सेमिनार जैसे आयोजन क्यों?

होर्डिंग्स व पोस्टरों में 'मोदीजी का धन्यवाद' और 'थैंक्यू मोदीजी' जैसे विज्ञापन तो बहुत आए, लेकिन अब अगले कुछ हफ़्तों में बीजेपी इसे घर-घर पहुँचाने में जुटेगी। वह कोशिश करेगी कि अधिकतर लोगों के पास मोदी की तसवीर पहुँचे और उनकी एक शानदार छवि बने। दरअसल, यह सब होगा एक अभियान के तहत। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से इसकी शुरुआत होगी। वैसे तो बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर पहले भी ऐसे कार्यक्रम करती रही थी लेकिन वह कुछ दिनों के लिए होता था। इस बार इसे तीन हफ़्ते तक चलाया जाएगा। यानी इस दौरान 'थैंक्यू मोदीजी' की बाढ़ आने वाली है! यह सब तब हो रहा है जब अगले कुछ महीनों में ही कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।

बता दें कि बीजेपी सरकार की हर मोर्चे पर विपक्ष आलोचना कर रहा है। कृषि क़ानूनों पर किसान आंदोलन से बीजेपी को जबरदस्त चुनौती मिल रही है। देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। रोज़गार को लेकर सरकार घिरी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जो हालात बने उससे लोगों में जबरदस्त नाराज़गी है। यहाँ तक कि कुछ सर्वे में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता घटी है। इसी बीच बीजेपी की इस नये अभियान को शुरू करने को लेकर रिपोर्ट आई है। यह अभियान कई मायने में अलग है।

दरअसल, बीजेपी पहले प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को 'सेवा सप्ताह' मनाती थी और इसके तहत स्वास्थ्य जाँच, रक्तदान शिविर से लेकर वृद्धाश्रम में खाना बांटने जैसे कार्यक्रम करती थी। लेकिन इस बार सब अलग है। इस बार इसका नाम 'सेवा और समर्पण अभियान' दिया गया है। इसके तहत ग़रीबों को दिए जाने वाले 14 करोड़ राशन बैग पर प्रधानमंत्री मोदी की तसवीर होगी, 5 करोड़ 'थैंक्यू मोदीजी' पोस्टकार्ड भेजे जाएँगे। नदियों की सफ़ाई के 71 स्थान चिन्हित किए गए हैं जिसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। कोरोना टीकाकरण की वाहवाही तो होगी ही, प्रधानमंत्री मोदी के जीवन और कार्यों को लेकर सेमिनार जैसे आयोजन भी होंगे। 

आँकड़ों को भी सांकेतिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी से जोड़कर खास तौर पर पेश करने की कोशिश की गई है। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का 71वाँ जन्मदिन है। इसी दिन अभियान की शुरुआत होगी। 7 अक्टूबर तक यह अभियान चलेगा। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने के 20 साल पूरे हो रहे हैं। 71 साल प्रधानमंत्री की उम्र है और नदियों में साफ़-सुथरे 71 जगहों को चिन्हित किया गया है जिनका प्रचार किया जाएगा।  

हाल ही में एक बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और राज्य इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने इस अभियान की रूपरेखा का खुलासा किया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं को सौंपी गई कुछ प्रमुख गतिविधियों में शामिल हैं-

  • पीएम ग़रीब कल्याण योजना के तहत 5 किलो प्रति व्यक्ति राशन के लिए पीएम को धन्यवाद देते हुए मोदी की तसवीर के साथ 14 करोड़ बैग बांटने का लक्ष्य पूरा करें।
  • महामारी के दौरान मदद के लिए मोदी को धन्यवाद देने वाले लाभार्थियों के वीडियो को यह संकेत देते हुए बढ़ाएँ कि 'ग़रीबों का मसीहा मोदी जी ही हैं।'
  • बूथ स्तर पर लोगों को लामबंद करके ग़रीबों के कल्याण में उनके योगदान के लिए 5 करोड़ 'थैंक यू मोदीजी' पोस्ट कार्ड सीधे पीएम को मेल किए जाएँ।
  • नदियों में साफ़-सुथरे 71 स्पॉट की पहचान कर प्रचार किया जाए।
  • टीका लगवाने वालों द्वारा कोविड टीकाकरण के लिए मोदी को धन्यवाद देने वाले वीडियो शेयर किए जाएँ।
  • प्रधानमंत्री के जीवन और कार्यों पर ज़िला व राज्य स्तर पर कला, संस्कृति, खेल आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों को शामिल करते हुए बैठकें/सेमिनार किए जाएँ। 
  • जाने-माने लेखक स्थानीय मीडिया में मोदी के शासन पर टिप्पणी करें।
  • उन पात्र बच्चों के लिए पंजीकरण अभियान चलाएँ जिन्होंने माता-पिता को खो दिया है और PM-CARES योजना के अंतर्गत आते हैं।

बीजेपी के इस अभियान से साफ़ तौर पर पता चलता है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी के काम को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की जाएगी। जाहिर तौर पर यह उनकी छवि को चमकाने का प्रयास होगा। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से मोदी बीजेपी के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक अभियानों का चेहरा रहे हैं। इस अभियान से भी ऐसा ही लगता है, लेकिन हालात बदले हुए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अगले कुछ महीनों में होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी में तनाव दिख रहा है। खुद प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन सवाल है कि क्या यह अभियान लोगों की नाराज़गी को दूर कर पाएगा?

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