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बिलकिस केस: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद दोषी घर पर नहीं, गए कहाँ?

बिलकिस केस: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद दोषी घर पर नहीं, गए कहाँ?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 2002 के गुजरात दंगों के मामले में बिलकिस बानों के बलात्कारियों की सजा माफ करने का अधिकार गुजरात सरकार को नहीं है। यानी बलात्कारी जेल जाएँगे। लेकिन सवाल है कि दोषी हैं कहाँ?

बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट दोषियों को जेल वापस भेजने का फ़ैसला सुना रहा था तो उन दोषियों का कोई 'अता-पता' नहीं था। द इंडियन एक्सप्रेस की एक टीम जब उन दोषियों के गाँव रंधिकपुर और सिंगवाड में पहुँची तो 11 में से 9 दोषी कथित तौर पर 'लापता' थे। उनके परिजन भी यह नहीं बता पाए कि आख़िर वे कहाँ हैं। तो क्या वे जेल से बचना चाहते हैं और इसलिए वे कुछ रास्ता ढूंढ रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने सोमवार को गुजरात सरकार द्वारा 15 अगस्त, 2022 को बिलकिस के दोषियों को दी गई छूट को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार इन लोगों को रिहा करने में सक्षम नहीं है और यह निर्णय महाराष्ट्र सरकार पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी 11 दोषी कोर्ट में 15 दिनों में सरेंडर करेंगे और वहां से इन्हें जेल भेजा जाएगा।

इस फ़ैसले के कुछ घंटे बाद ही अंग्रेजी अख़बार ने दोषियों के गाँवों का दौरा किया। रंधिकपुर और सिंगवाड गाँव आसपास ही हैं। बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों में से कम से कम नौ यहाँ रहते थे। जब द इंडियन एक्सप्रेस ने सोमवार को सिंगवाड का दौरा किया, तो वे वहाँ नहीं थे। अख़बार को परिजन यह नहीं बता पाए कि आख़िर वे लोग कहाँ हैं।

दोषियों में से एक गोविंद नाई (55) के पिता अखामभाई चतुरभाई रावल (87) ने दावा किया कि उनका बेटा निर्दोष था। उन्होंने सजा को कांग्रेस के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दोषी ठहराया। रावल ने कहा कि गोविंद ने एक सप्ताह पहले घर छोड़ दिया था। एक स्थानीय पुलिसकर्मी ने बताया कि गोविंद शनिवार (6 जनवरी) को घर से निकला था। उनके पिता ने कहा, 'दोबारा जेल जाना कोई बड़ी बात नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि वह गैरकानूनी तरीके से जेल से बाहर आए हों। कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया और अब कानून ने उन्हें वापस जाने के लिए कहा है, इसलिए वह वापस जाएंगे। उन्होंने 20 साल जेल में बिताए इसलिए यह कोई नई बात नहीं है।'

एक अन्य दोषी राधेश्याम शाह पिछले 15 महीनों से घर नहीं आया है। उनके पिता भगवानदास शाह ने यह दावा किया। द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट दी है कि पड़ोसी और गांव के व्यस्त चौराहे के दुकानदार इसकी पुष्टि करते हैं कि रविवार तक लगभग सभी दोषियों को सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जिनमें राधेश्याम भी शामिल था। 

अधिकांश दुकानदार चुप्पी साधे रहते हैं और दोषियों या फैसले पर टिप्पणी करने से बचते हैं, हालांकि वे इसके बारे में जानकारी रखने की बात कहते हैं।

दोषियों के ठिकाने के बारे में पूछे जाने पर एक ग्रामीण ने कहा, 'अब आप उन्हें नहीं ढूंढ पाएंगे। वे सभी अपने घरों में ताला लगाकर चले गए।'

इनमें से प्रत्येक बंद घर के बाहर एक अकेला कांस्टेबल तैनात है, जो सोमवार के फैसले को देखते हुए पुलिस बंदोबस्त किया गया है। रणधीकपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी उप-निरीक्षक जीबी राठवा ने कहा, 'हमने बंदोबस्त की व्यवस्था की क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि कोई भी अप्रिय घटना हो, न तो दोषियों की ओर से, न उनके परिवार और रिश्तेदारों की ओर से, न ही दूसरी तरफ से, जो ऐसा करना चाहते हों।'

बता दें कि गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना के तुरंत बाद, बिलकिस और उनके परिवार ने 28 फरवरी, 2002 को रणधीकपुर में अपना घर छोड़ दिया था। 3 मार्च 2002 को दाहोद के लिमखेड़ा तालुका में भीड़ ने उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया और उसकी तीन साल की बेटी सहित परिवार के 14 सदस्यों की हत्या कर दी। छह के शव कभी नहीं मिले। 21 जनवरी, 2008 को सीबीआई की विशेष अदालत ने 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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