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विधानसभा सत्र में हिस्सा लेंगे हमारे सभी विधायक: सचिन पायलट गुट 

विधानसभा सत्र में हिस्सा लेंगे हमारे सभी विधायक: सचिन पायलट गुट 

विधानसभा स्पीकर ने 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। 

गहलोत सरकार और राजभवन के बीच लंबे समय तक चली जोर-आज़माइश के बाद विधानसभा सत्र तो बुला लिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या बाग़ी नेता सचिन पायलट के गुट के विधायक इस सत्र में शामिल होंगे। इसके जवाब में पायलट गुट के एक विधायक ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि सभी विधायक हर हाल में विधानसभा सत्र में शामिल होंगे। विधायक ने यह भी कहा है कि जयपुर लौटने के लिए अभी कोई तारीख़ तय नहीं की गई है। 

बाग़ी विधायकों का सत्र में जाना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि अगर कांग्रेस फ़्लोर टेस्ट की स्थिति में व्हिप जारी करती है और विधायक इसका उल्लंघन करते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। उधर, विधानसभा स्पीकर ने 14 अगस्त से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। 

पायलट गुट के 19 विधायकों की सदस्यता रद्द होने की स्थिति में अशोक गहलोत के लिए बहुमत साबित करना आसान हो जाएगा। क्योंकि विधानसभा की सदस्य संख्या गिरकर 181 रह जाएगी और तब बहुमत के लिए 91 विधायक चाहिए होंगे। गहलोत कई बार कह चुके हैं कि उनके पास 102 विधायकों का समर्थन है। 

पायलट गुट के बाग़ी विधायकों ने जयपुर लौटने के लिए सुरक्षा देने की मांग की है। पायलट अपने विधायकों के साथ गुड़गांव के किसी होटल में रुके हुए हैं। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज अपने गुट के विधायकों के साथ जयपुर के फ़ेयरमॉन्ट होटल में बैठक की। बताया गया है कि गहलोत ने विधायकों से कहा है कि राजनीतिक संकट को देखते हुए उन्हें कुछ दिन और होटल में रुकना पड़ सकता है।

पाला बदलने का डर

गहलोत और पायलट दोनों पर ही अपने विधायकों को साधकर रखने की चुनौती है। सूबे की सियासत के इन दोनों दिग्गज नेताओं को इस बात का डर है कि अब तक उनके साथ रहे विधायक होटल से बाहर निकलने के बाद कहीं पाला न बदल लें। 

हाल ही में पायलट गुट के एक विधायक ने चुनौती दी थी कि गहलोत गुट के 10-15 विधायक उनके संपर्क में हैं और होटल से आज़ाद होने के बाद उनके पाले में आ जाएंगे। बता दें कि गहलोत ने अपने गुट के विधायकों को जयपुर के फ़ेयरमॉन्ट होटल में रखा हुआ है। दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा था कि पायलट गुट के तीन विधायक उसके संपर्क में हैं। 

अब देखना होगा कि भरपूर कोशिशों के बाद राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए मजबूर करने में कामयाब रहे गहलोत क्या अपनी सरकार भी बचा पाते हैं। 

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