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क्या चिदंबरम से लिया जा रहा है राजनीतिक बदला?

क्या चिदंबरम से लिया जा रहा है राजनीतिक बदला?

भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण हैं जब दिग्गज सियासतदानों को सत्ता जाने के बाद ऐसा ख़राब समय भी देखना पड़ा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।

सियासत के खेल में किसी को नहीं पता कि कब कौन ताक़तवर होगा और कब कौन कमजोर। भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण हैं जब दिग्गज सियासतदानों को सत्ता जाने के बाद ऐसा ख़राब समय भी देखना पड़ा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। आज के समय में यह बात एकदम सही बैठती है केंद्र में वित्त और गृह जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर। वैसे भी राजनीति के बारे में कहावत है कि यहाँ कुछ भी स्थाई नहीं होता, इसका सीधा मतलब यह है कि सत्ता अस्थाई है और उससे मिलने वाली ताक़त भी।

कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिये जाने के बाद लगभग 24 घंटे तक ग़ायब रहे। सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियाँ उनके घर पर दबिश देती रहीं लेकिन वह नहीं मिले। 

आख़िरकार चिदंबरम सामने आये तो लोगों के मन में यही सवाल था कि किस बात का डर है जिसे लेकर चिदंबरम सीबीआई के सामने आने से बच रहे हैं। सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि यह डर केंद्रीय गृह मंत्री और वर्तमान राजनीति के ताक़तवर शख़्स अमित शाह का है। 

बेहद दिलचस्प है कहानी

शाह और चिदंबरम की यह कहानी बेहद दिलचस्प है। चिदंबरम को जब आईएनएक्स मीडिया मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था और ईडी और सीबीआई उनकी तलाश में थीं, लगभग कुछ ऐसा ही 9 साल पहले अमित शाह के साथ हुआ था और उस समय सीबीआई उनके पीछे पड़ी थी। हुआ यूँ था कि यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान जब चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे, उस वक्त गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर का मामला बेहद जोर-शोर से गूँजा था। साल 2005 में अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे और शेख़ को एक कथित एनकाउंटर में पुलिस ने मार गिराया था। लेकिन 2014 में मोदी सरकार आते ही हालात बदल गए और सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अमित शाह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। इस केस में गवाह लगातार मुकरते चले गए थे और इसे लेकर देश भर में लोगों को ख़ासी हैरानी हुई थी। 

इस मामले में 25 जुलाई 2010 को सीबीआई ने अमित शाह को गिरफ़्तार कर लिया था और जेल में डाल दिया था। शाह को तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा था। अमित शाह को कोर्ट के आदेश पर गुजरात से भी बाहर रहना पड़ा था। लेकिन अब लगभग 10 साल बाद अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और सीबीआई-ईडी चिदंबरम को जेल में डालने के लिए तैयार हैं। तब अमित शाह ख़ुद को निर्दोष बताते थे और आज चिदंबरम ख़ुद को निर्दोष बता रहे हैं। 

जिस तरह कांग्रेस आज चिदंबरम पर कार्रवाई को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रही है, ठीक उसी तरह उस समय बीजेपी ने अमित शाह पर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पर बदले और राजनीतिक पूर्वाग्रह की भावना से काम करने का आरोप लगाया था।

सियासी गलियारों में इस बात की जोर-शोर से चर्चा है कि अमित शाह के गृह मंत्री बनते ही चिदंबरम के ख़िलाफ़ सीबीआई और ईडी ने कार्रवाई तेज़ कर दी। वैसे भी अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वह अपने दुश्मनों से बदला ज़रूर लेते हैं। हालाँकि केंद्र सरकार और बीजेपी नेताओं का साफ़ कहना है कि सरकारी एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

लेकिन देश में गृह और वित्त जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुका और देश की सबसे पुरानी पार्टी का दिग्गज नेता, लगभग 24 घंटे के लिए ग़ायब हो गया, उससे लगता यही है कि चिदंबरम के मन में 9 साल पहले का यह सारा घटनाक्रम फ़्लैशबैक में ज़रूर चला होगा। हालाँकि शाह तो सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर मामले में बरी हो गए लेकिन चिदंबरम के साथ क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी।

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