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अमित शाह ने कैराना में किया डोर टू डोर प्रचार 

अमित शाह ने कैराना में किया डोर टू डोर प्रचार 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सियासी रूप से बेहद उपजाऊ इलाका रहा है। बीते तीन चुनावों में पार्टी को यहां शानदार जीत मिली थी लेकिन एक साल तक चले किसान आंदोलन और सपा रालोद गठबंधन के चलते इस बार उसके सामने चुनौतियां ज्यादा हैं। 

बीजेपी के कई बड़े नेता शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डटे रहे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चित इलाके कैराना में डोर टू डोर प्रचार किया। जबकि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बिजनौर, नगीना में बीजेपी पदाधिकारियों से मिले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहे। मुख्यमंत्री अलीगढ़ और बुलंदशहर पहुंचे। 

बीजेपी ने कैराना से पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया है। हुकुम सिंह इस सीट से कई बार विधायक रहे थे। 

अमित शाह ने कहा कि सपा के शासन में कैराना से पलायन कर गए लोगों से मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था को सुधारा है और उन्हें पलायन कराने वालों का आज खुद पलायन हो गया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी को मतदान होना है। इसलिए तमाम राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने यहां पार्टी के लिए ताकत झोंकनी शुरू कर दी है। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सियासी रूप से बेहद उपजाऊ इलाका रहा है। बीते तीन चुनावों में पार्टी को यहां शानदार जीत मिली थी लेकिन एक साल तक चले किसान आंदोलन और सपा रालोद गठबंधन के चलते इस बार उसके सामने चुनौतियां ज्यादा हैं। 

पलट गए थे हुकुम सिंह 

बीजेपी के पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने साल 2016 में कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद से यहां से लगभग 350 हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। लेकिन बाद में वह अपनी बात से पलट गए थे और उन्होंने कहा था कि उन्होंने कभी भी सिर्फ़ हिंदुओं के पलायन का मुद्दा नहीं उठाया था। उन्होंने कहा था कि यहां मुद्दा क़ानून व्यवस्था और सुरक्षा का था। 

हिंदू मतों का ध्रुवीकरण 

2013 के मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद हिंदू मतों का जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ था और 2014 के लोकसभा चुनाव, 2017 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी सियासी ताक़त राष्ट्रीय लोक दल का सफाया हो गया था। ध्रुवीकरण का यह असर उत्तर प्रदेश के बाक़ी हिस्सों में भी दिखा था।

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