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कृषि क़ानून, पावर कट के ख़िलाफ़ दिल्ली में अमरिंदर का धरना

कृषि क़ानून, पावर कट के ख़िलाफ़ दिल्ली में अमरिंदर का धरना

केंद्र सरकार द्वारा मालगाड़ियों को न चलाए जाने के कारण पंजाब में बिजली का संकट गहरा गया है क्योंकि राज्य में कोयला न पहुंचने के कारण पावर प्लांट पूरी तरह बंद हो गए हैं। 

मोदी सरकार के द्वारा लाए गए कृषि क़ानूनों को लेकर उनसे दो-दो हाथ करने में जुटे पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को दिल्ली में धरना दिया। अमरिंदर सिंह इन क़ानूनों के मुद्दे पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलना चाहते थे लेकिन उन्हें वक़्त नहीं दिया गया। इसके विरोध में पंजाब सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया। 

इसके अलावा पंजाब में बिजली संकट और ज़रूरी वस्तुओं की कमी के विषय को भी नेताओं ने धरने में सामने रखा। अमरिंदर सिंह के साथ पंजाब के कई सियासी दलों के नेताओं के साथ उनके विरोधी माने जाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू भी मौजूद रहे। 

केंद्र सरकार द्वारा मालगाड़ियों को न चलाए जाने के कारण पंजाब में बिजली का संकट गहरा गया है क्योंकि राज्य में कोयला न पहुंचने के कारण पावर प्लांट पूरी तरह बंद हो गए हैं।

लंबे पावर कट 

पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन के कारण केंद्र सरकार ने मालगाड़ियों के आने पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार द्वारा मालगाड़ियों को आने देने की अपील के बाद भी केंद्र ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी है और अब राज्य के कई इलाक़ों में कई-कई घंटों के पावर कट लगने शुरू हो गए हैं, जिससे व्यापारियों के साथ ही आम लोगों को खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही अनाज और सब्जियों की भी जबरदस्त कमी हो गई है। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य के हालात बेहद ख़राब हैं और यहां कोयला, यूरिया और कई अन्य ज़रूरी चीजें ख़त्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के मालगाड़ियां न चलाने के फ़ैसले के कारण राज्य के लोगों को त्यौहार के मौसम में अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वजह से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लोगों को भी परेशानी हो रही है। 

कैप्टन ने कहा कि पंजाब में फ़सलों की ख़रीद के लिए आढ़तियों की पुरानी व्यवस्था है लेकिन केंद्र सरकार इसे तोड़ने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब का जीएसटी का 10 हज़ार करोड़ रुपया केंद्र के पास पड़ा है, लेकिन यह पैसा सरकार नहीं दे रही है। 

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में खेती के बरसों से बने हुए ढांचे को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि इन कृषि क़ानूनों के कारण देश में भुखमरी आ सकती है।

सिद्धू ने कहा कि अंबानी और अडानी के गोदामों में अनाज होता है लेकिन वह ग़रीब को नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने व्यापारी को मार दिया और ये काले कृषि क़ानून किसानों को मार रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब की सरकार इनका आगे भी विरोध करेगी। 

 - Satya Hindi

धरने में मौजूद अमरिंदर सिहं, नवजोत सिंह सिद्धू व अन्य।

विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने खेती को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ बॉर्डर खोलने की हिमायत की। उन्होंने कहा कि पंजाब में नौजवानों के पास नौकरियां नहीं हैं और खेती एकमात्र साधन है लेकिन केंद्र सरकार इसे भी छीन लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र हमारे राज्य की जीएसटी का पैसा तुरंत दे। 

खैहरा ने आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल पर हमला बोला और कहा कि इन दोनों दलों ने इन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं बोला। 

बेटे को भेजा समन

विपक्षी दलों की सरकारों में पंजाब पहला ऐसा राज्य है, जिसने इन क़ानूनों के विरोध में विधानसभा में प्रस्ताव पास किया है। पंजाब में इस क़ानून के विरोध में जोरदार आंदोलन भी हो रहे हैं। लेकिन ऐसे ही वक़्त में कुछ दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह को समन भेजकर बुला लिया है। यह समन कथित रूप से अवैध विदेशी फ़ंडिंग को लेकर भेजा गया है। 

बता दें कि कृषि क़ानूनों का देश के कई राज्यों में विरोध हो रहा है और भारत के अन्न के कटोरे कहे जाने वाले हरियाणा और पंजाब में आंदोलन चरम पर है और इन राज्यों के कई सियासी दल भी किसानों की अहमियत जानते हुए उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। 

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