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गुजरात में भी टूटी कांग्रेस, अल्पेश ठाकोर बीजेपी में शामिल

गुजरात में भी टूटी कांग्रेस, अल्पेश ठाकोर बीजेपी में शामिल

कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना के बाद कांग्रेस के लिए बुरी ख़बर आई है गुजरात से, जहाँ अल्पेश ठाकोर ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। 

लोकसभा चुनाव में क़रारी हार के बाद से ही कांग्रेस के लिए लगातार ख़राब ख़बरें आ रही हैं। कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना के बाद कांग्रेस के लिए बुरी ख़बर आई है गुजरात से, जहाँ ओबीसी समुदाय के बड़े नेता और पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल हुए अल्पेश ठाकोर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इससे पहले कांग्रेस के पाँच विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में अल्पेश ठाकोर और धवन झाला ने कांग्रेस से बग़ावत कर बीजेपी का साथ दिया था। तब ठाकोर ने राहुल गाँधी पर धोखा देने और उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया था। 

कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें लंबे समय से थीं, लेकिन बाद में वह ख़ुद ही इससे पीछे हटते रहे थे। लेकिन अब अल्पेश ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हैं और बीजेपी उन्हें जो ज़िम्मेदारी देगी, उसे ईमानदारी से निभाएँगे। 

कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोड़ने की शुरुआत पिछले साल जुलाई में हुई थी जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कुवंरजी बावलिया ने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। बाद में बीजेपी ने बावलिया को राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया था। फ़रवरी 2019 में ऊंझा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक आशा पटेल ने विधानसभा और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके बाद विधायक जवाहर चावड़ा ने कांग्रेस पार्टी तथा विधानसभा से इस्तीफ़ा दे दिया था। हैरानी तो तब हुई थी जब पार्टी छोड़ने के एक दिन बाद ही बीजेपी ने उन्हें राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया। इसके बाद विधायक पुरुषोत्तम साबरिया ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया था। 

गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है और कांग्रेस ने इस लोकसभा चुनाव में यहाँ पूरी ताक़त लगा दी थी। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह माना गया था कि पार्टी और मज़बूत होगी लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को 2014 की ही तरह राज्य की सभी 26 सीटों पर जीत मिली थी। 

हालाँकि गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पूरे राज्य में जोरदार चुनाव प्रचार किया था और उसके बेहतर परिणाम भी सामने आए थे। कांग्रेस ने 182 में से 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 115 सीटों पर जीत मिली थी जबकि 2017 में वह 99 सीटों पर आकर रुक गई थी। लेकिन उसके बाद से ही कांग्रेस अपने विधायकों को संभाल नहीं सकी और एक के बाद एक विधायक पार्टी का साथ छोड़कर चलते बने। 

कर्नाटक में कांग्रेस के विधायकों ने इस्तीफ़ों की झड़ी लगा दी, महाराष्ट्र, गोवा में नेता विपक्ष ने पार्टी छोड़ दी, तेलंगाना में 12 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। और अब गुजरात में उसे बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेतृत्व को इस बारे में विचार करना चाहिए कि आख़िर क्यों उसकी पार्टी के बड़े नेता एक-एक करके उसका साथ छोड़ते जा रहे हैं। 

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